महाराष्‍ट्र में अब क्‍या भाजपा विधायक करने वाले हैं बड़ी बगावत? NCP नेता अनिल देशमुख ने किया बड़ा दावा

Anil Deshmukh: महराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शरद पवार गुट के एनसीपी नेता और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख में गुरुवार को एक ऐसा बयान दिया है। जिसके बाद महाराष्‍ट्र में सत्‍तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल भाजपा के विधायकों में बड़ी टूट होने की अटकलें लगाई जाने लगी है।

एनसीपी (सपा) के नेता अनिल देशमुख ने कहा भाजपा के ये विधायक सरकार में अपना प्रतिनिधित्व न मिलने से नाखुश हैं। इसके साथ ही देशमुख ने दावा किया है कि भाजपा के कुछ विधायक उनकी पार्टी में शामिल होने के इच्छुक हैं।

Anil Deshmukh

नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देशमुख ने ये दावा किया। इसके साथ ही राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह उनके खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों पर आयोग की रिपोर्ट जारी करे। देखमुख ने इसके साथ ही चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।

अजित पवार गुट की टूट का भी किया जिक्र

देशमुख ने अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में हाल ही में हुए इस्तीफों का भी जिक्र किया। याद रहे पिंपरी-चिंचवाड़ इकाई के प्रमुख अजित गव्हाने और दो पूर्व पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी और गव्हाने ने अपने इस्तीफे के बाद शरद पवार का आशीर्वाद लेने की घोषणा की।

देशमुख ने मीडिया से बात करते हुए कहा "बीजेपी के कुछ विधायक भी उनकी पार्टी का हिस्सा बनने के इच्छुक हैं क्योंकि वे सरकार में प्रतिनिधित्व न मिलने से निराश हैं। एनसीपी विधायक (अजित पवार गुट) भी वापस आएंगे। हालांकि, शरद पवार तय करेंगे कि एनसीपी (सपा) में किसे लिया जाएगा।"

अजित पवार के लिए बारे में बोली ये बात

अजित पवार के बारे में पूछे जाने पर अनिल देशमुख ने कहा "वे अपनी पार्टी बना रहे हैं। उन्हें अपनी पार्टी का विस्तार करने दीजिए।" याद रहे शरद पवार ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी में शामिल होने वाले नए नेताओं के बारे में कोई भी निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा। उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि अगर अजित पवार वापस आना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा या नहीं।

लोकसभा चुनाव परिणामों ने बढ़ाई महायुति ने बढ़ाई टेंशन

बता दें हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में अजित पवार की एनसीपी ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन तीन सीटों पर हार गई। वहीं शरद पवार के गुट ने दस में से आठ सीटें जीतीं। एमवीए ने 30 सीटें हासिल कीं, जबकि महायुति ने 17 सीटें जीतीं।

महाराष्ट्र में बीजेपी सबसे ज्यादा 28 लोकसभा सीटों पर लड़ी थी और महज 10 सीटों पर ही जीत हासिल की थी। ये नतीजे महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में बदलते समीकरणों की गवाह है। इस चुनाव परिणाम के बाद महायुति में शामिल पार्टियों के नेताओं में भारी निराशा नजर और भविष्‍य को लेकर चिंता है।

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