Mumbai News: मुंबई से ही अंग्रेज भारत छोड़कर भागे थे, जानें कहां और किस हाल में है अब वह जगह?
Mumbai News: मुंबई की पहचान बन चुका गेटवे ऑफ इंडिया सिर्फ एक स्मारक भर नहीं है। इसे भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यह जगह मुंबई शहर की पहचान है और इसे मायानगरी का लैंडमार्क भी कहा जाता है। मुंबई आने वाले पर्यटक भी इस जगह पर जरूर घूमने आते हैं। यह इमारत भारत के उपनिवेशकाल और आजादी के सफर का साक्षी भी है। अरब सागर के किनारे खड़ा यह शानदार मेहराबदार ढांचा हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
गेटवे ऑफ इंडिया की कहानी 110 साल पहले शुरू होती है। यह इमारत एक शाही यात्रा की याद में बनाया गया था। एक दौर में यह भारत के औपनिवेशिक अतीत का साक्षी बना। भारत की आजादी के स्वर्णिम इतिहास का भी गवाह यही जगह बनी थी।

Gateway Of India का इतिहास है दिलचस्प
- ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी पहली बार दिसंबर 1911 में भारत आए थे। इस जोड़े की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने एक भव्य स्मारक के निर्माण का निर्णय लिया था।
- इस प्रतिष्ठित संरचना का डिजाइन ब्रिटिश वास्तुकार जॉर्ज विटेट ने तैयार किया, जिन्होंने इसे इंडो-सारासेनिक शैली में तैयार किया।
- इस वास्तुकला में मध्यकालीन गुजराती कला, हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य की विशेषताओं का मेल दिखता है। विशाल मेहराब, जटिल नक्काशी और प्रभावशाली ढांचा इसे मुंबई का ताज बनाते हैं।
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Mumbai News: 9 साल में तैयार हुआ भारत का प्रवेश द्वार
गेटवे ऑफ इंडिया की आधारशिला 31 मार्च 1913 को रखी गई थी। हालांकि, प्रथम विश्व युद्ध और अन्य औपचारिकताओं के कारण निर्माण कार्य 1915 में शुरू हो पाया था। लगभग 9 साल की मेहनत के बाद यह स्मारक 1924 में पूरा हुआ। इसकी कुल निर्माण लागत उस समय करीब ₹21 लाख थी, जो उस दौर की एक बड़ी राशि मानी जाती थी। दिलचस्प बात यह भी है कि इसे भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ब्रिटिश सम्राट के आगमन के प्रतीक के तौर पर इसे बनाया गया था। आजादी के बाद एक ऐतिहासिक विदाई स्थल भी यही जगह साबित हुई थी। 1948 में यही वह जगह था, जहां से आखिरी ब्रिटिश सैनिक भारत छोड़कर गए।
आज गेटवे ऑफ इंडिया भारतीय ही नहीं विदेशी पर्यटकों का भी पसंदीदा स्थान है। यहां पास में ही ताज होटल है, जो भारत की भव्यता की कहानी कहता है। हर साल न्यू ईयर और क्रिसमस जैसे मौकों पर यहां भारी संख्या में पर्यटक जुटते हैं।
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