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Mumbai: 'सबक सिखाना जरूरी’, मुंबई BMW हादसे के आरोपी को SC से नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

Mumbai BMW Hit and Run Case: मुंबई के बहुचर्चित BMW हिट-एंड-रन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी मिहिर शाह (24) को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने को साफ शब्दों में कहा कि "ऐसे लड़कों को सबक सिखाने की ज़रूरत है।"

इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज कर दी, जिसे उसने बॉम्बे हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल किया था। जानिए क्या है मुंबई का हिट-एंड-रन केस...

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कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ 13 दिसंबर को सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा,"माता-पिता भी जिम्मेदार हैं। हम अपने बच्चों को सही संस्कार देने में असफल रहे हैं।" कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि आरोपी एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता है और उसके पिता राजेश शाह, महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े रहे हैं और एक समय एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में नेता रह चुके हैं।

पीठ ने आरोपी के आचरण पर नाराजगी जताते हुए कहा,"यह लड़का देर रात मर्सिडीज से घर आता है, उसे शेड में खड़ा करता है, फिर BMW निकालता है, हादसा करता है और फरार हो जाता है। ऐसे मामले में उसे जेल में ही रहने दिया जाना चाहिए।"

क्या है पूरा मामला?

यह दर्दनाक हादसा जुलाई 2024 में मुंबई के वर्ली सी फेस रोड पर हुआ था। आरोप है कि मिहिर शाह नशे की हालत में तेज रफ्तार BMW चला रहा था, जब उसने स्कूटर सवार दंपति को टक्कर मार दी। स्कूटर चला रहे प्रदीप नाखवा तो बोनट से गिर जाने के कारण बच गए, लेकिन उनकी पत्नी की मौके पर मौत हो गई। बताया गया कि महिला का शव करीब दो किलोमीटर तक सड़क पर घसीटता चला गया।

पुलिस जांच में सामने आया कि मिहिर शाह शराब के नशे में था। हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया और दो दिन बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने आरोपी के पिता और ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया था, जिन पर मिहिर को बचाने और उसके फरार होने में मदद करने का आरोप है।

हाईकोर्ट पहले ही कर चुका है ज़मानत खारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 नवंबर 2024 को मिहिर शाह की ज़मानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर है। कोर्ट ने आरोपी के आचरण, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका और सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना को आधार बनाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह छूट दी थी कि ट्रायल कोर्ट में अहम गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद आरोपी फिर से ज़मानत के लिए आवेदन कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने दलील दी कि मामले के तथ्य "थोड़े अप्रिय" जरूर हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने भविष्य में ज़मानत का विकल्प खुला रखा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुझाव दिया कि याचिका वापस ले ली जाए। इसके बाद आरोपी पक्ष ने ज़मानत याचिका वापस ले ली, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

मिहिर शाह पर भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज है, जो गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide not amounting to murder) से जुड़ी है। इस धारा के तहत अधिकतम सज़ा उम्रकैद तक हो सकती है। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि यह प्रस्ताव कांग्रेस में कितना समर्थन हासिल कर पाता है और क्या भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को हटाने की दिशा में कोई ठोस फैसला होता है या नहीं।

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