'भारत की बढ़ती ताकत से डर रहा है विश्व', मोहन भागवत ने ट्रंप के टैरिफ पर साधा निशाना
Mohan Bhagwat News: नागपुर में आयोजित ब्रह्मा कुमारीज़ विश्व शांति सरोवर के सातवें स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत और दुनिया की मौजूदा परिस्थितियों पर अपनी बात रखी।
इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव से पैदा हुए डर का नतीजा है।

भागवत ने कहा, "जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया के कई देशों को यह चिंता होती है कि हमारे साथ क्या होगा। ऐसे में समाधान के तौर पर टैरिफ लगाने की कोशिश की जाती है। असल में यह डर की अभिव्यक्ति है।"
उन्होंने समझाया कि व्यक्ति जब 'मुझे चाहिए' और 'मेरे लिए चाहिए' जैसे भाव से सोचता है, तो वही झगड़ों की जड़ बनता है। यही मानसिकता राष्ट्रों के बीच टकराव और व्यापारिक विवादों की वजह बनती है।
भारत के लिए समाधान बनने की क्षमता
आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि आज पूरी दुनिया समाधान खोज रही है और भारत के पास वह रास्ता दिखाने की क्षमता है। उन्होंने भारतीय समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां के लोग विपरीत परिस्थितियों में भी संतुष्ट रहते हैं और बदलाव की उम्मीद बनाए रखते हैं। भागवत ने कहा, "अगर हम डर को छोड़कर करुणा का भाव अपनाएं, तो हमारे कोई शत्रु नहीं रहेंगे। इंसान 'मैं' से निकलकर 'हम' की सोच अपनाएगा, तभी समस्याओं का समाधान संभव होगा।"
अमेरिका का रिकॉर्ड टैरिफ
आपको बता दें कि अमेरिका ने 2025 में भारत पर रिकॉर्ड स्तर के टैरिफ लगाए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन्हें "रिसिप्रोकल टैरिफ" नीति के तहत लागू किया। जुलाई 2025 में पहली बार यह टैरिफ लगाया गया, जो 1 अगस्त से प्रभावी हुआ।
तब अमेरिकी प्रशासन ने तर्क दिया था कि भारत के ऊंचे टैरिफ और व्यापार घाटे का जवाब देना जरूरी है। इसके बाद अगस्त 2025 में दूसरा बड़ा टैरिफ लागू किया गया, जिसमें यह कारण बताया गया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और इससे यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंड मिल रहा है।
इन दोनों फैसलों के बाद अमेरिका ने भारतीय निर्यातों पर टैरिफ की दर 50% तक बढ़ा दी। यह दर अमेरिका के किसी भी बड़े व्यापारिक साझेदार पर लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ माने जा रहे हैं। मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है। भागवत ने साफ किया कि भारत की प्रगति किसी के खिलाफ नहीं है, लेकिन दुनिया को यह समझना होगा कि प्रतिस्पर्धा से ज्यादा जरूरी सहयोग है।












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