मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जारांगे ने मांगें पूरी होने तक खाई ये कसम, कल से छोड़ देंगे पानी भी
Manoj Jarange maratha protest: मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल मुंबई के आज़ाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे शहर नहीं छोड़ेंगे। पीटीआई ने रविवार को यह जानकारी दी।
43 वर्षीय जरांगे-पाटिल शुक्रवार से ही दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। वे मराठाओं को 10 प्रतिशत कोटा देने और उन्हें कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। कुनबी मराठाओं की एक किसान उप-जाति है। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार सभी मराठाओं को 'कुनबी प्रमाण पत्र' जारी करे, जिससे पूरे समुदाय को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में वर्गीकृत किया जा सके और उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सके।

पीटीआई के हवाले से जरांगे ने कहा, "कल से मैं पानी लेना भी बंद कर दूंगा, क्योंकि सरकार हमारी मांगें नहीं मान रही है। लेकिन जब तक कोटे की मांग पूरी नहीं हो जाती, मैं पीछे नहीं हटूंगा। हम मराठा आरक्षण ओबीसी श्रेणी के तहत ही प्राप्त करेंगे, चाहे कुछ भी हो।"
मराठों को कुंबी घोषित कर आरक्षण दिया जाना चाहिए
जरांगे ने अपनी मांग दोहराई कि मराठवाड़ा के मराठों को कुंबी घोषित कर आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा "हमारी मांग संवैधानिक रूप से वैध है। सरकार के पास 58 लाख मराठाओं के कुनबी होने के रिकॉर्ड हैं।" उन्होंने आंदोलनकारियों से आग्रह किया कि "जब भी उन्हें समय मिले, मराठा मुंबई आएंगे।"
आंदोलनकारियों को केवल 'भीड़' न मानें
जरांगे-पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया है कि वे आंदोलनकारियों को केवल 'भीड़' न मानें। पीटीआई के अनुसार, उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय के लोग बहुत दर्द के साथ मुंबई आए हैं। उन्होंने कहा, "सरकार को उन्हें भीड़ नहीं समझना चाहिए। वे यहां बहुत पीड़ा के साथ आए हैं।"
गोरतलब है कि बड़ी संख्या में आंदोलनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर मौजूद थे, जिससे क्षेत्र और आसपास के चौराहों पर यातायात प्रभावित हुआ। मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने अपने 'X' हैंडल पर लिखा, "चूंकि आज़ाद मैदान में आंदोलन जारी है, आंदोलनकारी CSMT जंक्शन पर मौजूद हैं, जिससे क्षेत्र और आसपास के चौराहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे इन मार्गों से बचें और अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं।"
इसके बावजूद, जरांगे ने अपने समर्थकों से आग्रह किया है कि वे अपने वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर पार्क करें और आज़ाद मैदान तक पहुंचने के लिए ट्रेन का उपयोग करें।
बता दें प्रदर्शन स्थल पर भारी भीड़ के कारण आसपास के यातायात पर बुरा असर पड़ा। कई प्रदर्शनकारी सड़क पर ही स्नान करते हुए देखे गए।
वहीे शनिवार को मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार उनके मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है, और भेजे गए प्रतिनिधि समाधान करने में सक्षम नहीं हैं। जरांगे मराठा समुदाय के लिए 10 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे हैं, जिसे ओबीसी श्रेणी के तहत कुंबी जाति का दर्जा दिया जाए।
मनोज जरांगे ने सरकार पर केवल समय बर्बाद करने का आरोप लगाया है, और कहा कि समिति को कोई वास्तविक अधिकार नहीं दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे का काम सरकार का प्रस्ताव (GR) जारी करना नहीं है। जरांगे ने स्पष्ट किया कि मराठों को कुंबी (ओबीसी) का दर्जा दिलाने की उनकी लड़ाई अब अंतिम चरण में है।












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