Maratha Reservation: भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे का अनशन खत्म, CM शिंदे ने अपने हाथों से पिलाया जूस
Maratha Activist Manoj Jarange Patil: महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा आरक्षण की मांग बुलंद होने लगी है, जिसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे, हालांकि अब सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद उन्होंने अपना अनशन वापस ले लिया है।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कई दिनों से अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल से मिलने सीएम शिंदे गुरुवार (14 सितंबर) को जालना जिले पहुंचे, जहां उन्होंने पाटिल से मुलाकात करते उनसे बात की और अपने हाथों से जूस पिलाकर उनकी भूख हड़ताल को खत्म करवाया।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सहमति बनने के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। दरअसल, पिछले 17 दिनों से जरांगे आरक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। इससे पहले मंगलवार को मनोज जरांगे ने सीएम शिंदे से मिलने की बात कही थी।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गुरुवार को अंतरवाली सराती (जालना) में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन स्थल पर जाकर मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे, राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल, ग्रामीण विकास मंत्री गिरीश महाजन, उद्योग मंत्री उदय सामंत मौजूद रहे।
29 अगस्त को शुरू की थी भूख हड़ताल
40 वर्षीय मनोज जरांगे पाटील ने मराठा समुदाय के आरक्षण के लिए अनगिनत आंदोलन किए है, लेकिन इस बार उनकी भूख हड़ताल ने महाराष्ट्र में हलचल पैदा कर दी। 29 अगस्त को शुरू हुई उनकी भूख हड़ताल के बाद महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़क गई। जालना में स्थिति बेकाबू तक हो गई थी।
जानिए कौन हैं मनोज जरांगे पाटिल?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मनोज जारांगे पाटील मूल रूप से महाराष्ट्र के बीड के रहने वाले हैं, जो फिर बाद में जालना शिफ्ट हो गए। उन्होंने यहां एक होटल में काम भी किया। शुरुआत में उन्होंने कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में किया, हालांकि कुछ वक्त बाद ही उन्हें पार्टी छोड़ दी। बता दें कि मनोज जरांगे पाटील विभाग प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने मराठा आरक्षण की मांग के लिए राजनेताओं से मुलाकात की।












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