महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन में क्या चल रहा है, सीएम शिंदे की चाल में फंस गई बीजेपी?
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी महायुति गठबंधन का प्रदर्शन उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को उससे सिर्फ 2 सीटें कम मिली हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव इसी साल अक्टूबर में होने हैं। शिंदे सरकार के रविवार को ही दो साल पूरे हुए हैं। हाल में उनकी सरकार ने चुनावी साल में जो लोकलुभावन बजट पेश किया है और उसके बाद उनकी पार्टी ने विज्ञापन अभियान शुरू किया है, उससे भाजपा को झटका लग सकता है।

खुद को अगले सीएम के चेहरा के तौर पर भी पेश कर रहे हैं शिंदे!
महाराष्ट्र के हालिया बजट और शिवसेना के विज्ञापन अभियान को देखकर लगता है कि मुख्यमंत्री शिंदे आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए खुद को महायुति गठबंधन के सीएम चेहरा के तौर पर पेश कर रहे हैं। लोकसभा चुनावों में भाजपा के 9 के मुकाबले 7 सीटें बचाने के बाद गठबंधन में शिंदे सेना के तेवर अलग ही नजर आ रहे हैं।
बजट के माध्यम से भी छाने की कोशिश में दिख रहे शिंदे
राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि राज्य के बजट में महिलाओं, युवाओं, किसानों आदि के लिए जो लोकप्रिय योजनाओं की घोषणा की गई है, उसमें मुख्यमंत्री का नाम दिया गया है। ये उन विभागों का भी हाल है, जो बीजेपी और अजित पवार की एनसीपी के पास हैं।
भाजपा का बड़ा भाई बनने की कोशिश में शिवसेना!
सबसे बड़ी बात की बजट पेश होने के बाद शिवसेना ने जो प्रचार अभियान शुरू किया है, उसकी होर्डिंग्स में 'मदतिचा हाथ एकनाथ' (मदद का हाथ एकनाथ) दिखाया जा रहा है। इसका फोकस पूरी तरह से सीएम शिंदे पर है, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को प्रमुखता नहीं दी जा रही है।
लोकसभा चुनावों के बाद शिंदे के बदलने लगे तेवर!
एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक, 'शिंदे की अब सत्ता पर मजबूत पकड़ है। जब उन्होंने बीजेपी से 15 लोकसभा सीटें लीं, तो उन्होंने साबित कfया कि उनका दिल्ली से सीधा संपर्क है। जब बीजेपी 9 और अजित पवार की एनसीपी सिर्फ 1 सीट जीत पाई, तब 7 सीटें जीतना यह स्पष्ट करता है कि शिंदे अब वर्षा (मुख्यमंत्री आवास) में दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी संभावनाओं को भुनाने में लग गए हैं।'
विश्लेषक के अनुसार, 'लगता है कि यह बजट सीएम के लिए ब्रांडिंग एक्सरसाइज बन चुका है। इसमें वोटरों के साथ-साथ गठबंधन के सहयोगियों के लिए भी एक संदेश है।'
मुख्यमंत्री शिंदे के तेवरों में गठबंधन सरकार के अंदर जो एक मजबूती की धार नजर आ रही है, उसकी एक वजह ये भी है कि पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे कई बार इस सरकार की उम्र को लेकर सवाल उठा चुके हैं। लेकिन, सीएम शिंदे ने दो वर्षों में खुद को उनसे कहीं ज्यादा स्थापित करके दिखा दिया है।
लेकिन, मुख्यमंत्री शिंदे का यह बदला अवतार भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। क्योंकि, सीएम की कुर्सी भले ही उन्हीं के पास है, लेकिन सरकार में बड़े भाई की भूमिका में अबतक बीजेपी ही रही है।












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