Rain: स्कूल बंद, ट्रेनें प्रभावित, जनजीवन अस्त-व्यस्त...जुलाई की शुरुआती बारिश से मुंबई हलकान क्यों?
Rain in Maharashtra: जुलाई की शुरुआती बारिश में ही पश्चिमी महाराष्ट्र, मुंबई, तटीय जिलों में हाहाकार मचा है। सोमवार को भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। शहर की सड़कों, निचले इलाकों और रेलवे ट्रैकों पर पानी भर गया, जिससे यातायात प्रभावित होता नजर आया। नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती दिख रही है।
कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं, विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए और किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए एहतियाती उपाय किए गए। इस बीच, विपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मौसम की पहली भारी बारिश ने उसके बड़े-बड़े दावों की पोल खोल दी है।

राज्य प्रशासन ने छात्रों को असुविधा से बचाने के लिए मुंबई और ठाणे में स्कूल और कॉलेज बंद करने की घोषणा की है। अंधेरी और नागपुर में पूर्णकालिक रूप से तैनात टीमों के अलावा ठाणे, कुर्ला, घाटकोपर, वसई, महाड (रायगढ़), चिपलून (रत्नागिरी), कोल्हापुर, सांगली, सतारा और सिंधुदुर्ग में एहतियात के तौर पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें तैनात की गई हैं। एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने कहा कि इन तैनाती से हमें किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और बाढ़ जैसी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया करने में मदद मिलेगी।
'घरों से बाहर न निकलें', CM शिंदे
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दोपहर में मंत्रालय में राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ में समीक्षा बैठक की और लोगों से आग्रह किया कि जब तक कोई आपात स्थिति न हो, वे बाहर न निकलें। उन्होंने कहा कि मैं स्थिति पर नजर रखने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), राज्य आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, रेलवे और पुलिस के साथ लगातार संपर्क में हूं।
शिंदे ने राज्य प्रशासन को लोगों की जान बचाने, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और अलर्ट रहने का निर्देश दिया। मुंबई पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जो बारिश के कारण पूरी तरह से ठप्प हो गया है, उन्होंने कहा कि बीएमसी ने स्थिति की निगरानी के लिए 5,000 से अधिक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। हम उच्च ज्वार के दौरान समुद्र के पानी को शहर में वापस आने से रोकने के लिए मीठी नदी के तट पर बाढ़ के द्वार बना रहे हैं। बाढ़ के पानी को बाहर निकालने के लिए सात स्थानों पर पंपिंग स्टेशन भी स्थापित किए जा रहे हैं।
कई ट्रेनें ठप्प, फंसे विधायक
मुंबई जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को अंबरनाथ, कल्याण और ठाणे में रोक दिया गया, जिससे दो दिन के अवकाश के बाद राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र में भाग लेने के लिए मुंबई जा रहे विधायक फंस गए। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधानसभा को दिनभर के लिए स्थगित करने से पहले बताया कि हमने सिद्धूदुर्ग में 24 घंटे में 216.5 मिमी बारिश होने के बाद 374 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
10 जुलाई तक बारिश का अलर्ट
स्थानीय मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार सुबह मुंबई के डिंडोशी में भारी बारिश जारी रही, जिससे कई इलाकों में जलभराव हो गया। आईएमडी ने महाराष्ट्र में तीन से चार दिनों में भारी बारिश का अनुमान लगाया है। मौसम विभाग ने संकेत दिया कि 8 जुलाई से 10 जुलाई, 2024 तक मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा क्षेत्रों में भारी बारिश होगी।
महाराष्ट्र और मुंबई की आबादी:
- महाराष्ट्र: 2021 की जनगणना के अनुसार, महाराष्ट्र की अनुमानित आबादी लगभग 12 करोड़ है।
- मुंबई: मुंबई की आबादी लगभग 2 करोड़ है, जिससे यह भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन गया है।
मुंबई में जलभराव के प्रमुख इलाके
(सायन (Sion), किंग्स सर्कल (King's Circle), दादर (Dadar), माटुंगा (Matunga), वडाला (Wadala), कुर्ला (Kurla), सांताक्रूज (Santacruz), अंधेरी (Andheri), चेम्बूर (Chembur) और गोरेगांव (Goregaon) जैसे कई इलाके मुंबई में जलभराव के प्रमुख इलाकों में गिने जानते हैं।
मुंबई में बारिश से रेलवे पर प्रभाव:
रेलवे ट्रैकों पर जलभराव:
- मुंबई की उपनगरीय रेल सेवाएं भारी बारिश के दौरान बुरी तरह प्रभावित होती हैं। पानी भर जाने के कारण रेलवे ट्रैकों पर ट्रेन चलाना मुश्किल हो जाता है।
- ट्रेन सेवाएं अक्सर देरी से चलती हैं या रद्द कर दी जाती हैं, जिससे दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा होती है।
सिग्नलिंग सिस्टम पर प्रभाव:
- बारिश के कारण सिग्नलिंग सिस्टम भी प्रभावित होता है, जिससे ट्रेन संचालन में देरी होती है।
- सुरक्षा कारणों से ट्रेन की गति कम कर दी जाती है, जिससे यात्रा का समय बढ़ जाता है।
सामान्य जनजीवन पर प्रभाव:
- यातायात जाम: सड़कों पर जलभराव और वाहनों की धीमी गति के कारण यातायात जाम की समस्या उत्पन्न होती है।
- बिजली कटौती: बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचने के कारण बिजली कटौती होती है, जिससे घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में परेशानी होती है।
- स्वास्थ्य जोखिम: जलभराव और गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लोग संक्रमित पानी के संपर्क में आते हैं, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
- स्कूल और कॉलेज बंद: भारी बारिश के कारण स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए जाते हैं, जिससे शिक्षा प्रभावित होती है।
पिछले 5 सालों में जुलाई के महीने में कितनी हुई बारिश?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 5 सालों के दौरान, जुलाई में औसतन 1,200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। हर साल, बारिश के कारण जलभराव, यातायात जाम, और रेलवे सेवाओं में व्यवधान जैसी समस्याएं सामने आई हैं। प्रशासन को इन समस्याओं से निपटने के लिए सतर्क और सक्रिय रहना पड़ता है।
- जुलाई 2019 में, मुंबई में रिकॉर्डतोड़ बारिश हुई थी। कुल बारिश लगभग 1,500 मिमी तक पहुंच गई थी।
- जुलाई 2020 में, मुंबई में कुल 1,200 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
- जुलाई 2021 में, मुंबई में लगभग 1,100 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। सायन, दादर, कुर्ला, अंधेरी और गोरेगांव जैसे इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर हो गई थी।
- जुलाई 2022 में, मुंबई में कुल 1,300 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
- जुलाई 2023 में, मुंबई में लगभग 1,250 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। पाउधन, माटुंगा, वडाला और कुर्ला जैसे इलाकों में जलभराव की समस्या देखी गई।












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