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Maharashtra Politics: शरद पवार क्यों करने लगे RSS का गुण गान, किस गलती का हुआ एहसास?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में बड़ी ही उथल-पुथल मची हुई है। विपक्षी इंडिया ब्लॉक के प्रादेशिक ब्रांच महा विकास अघाड़ी (MVA) में शामिल तीनों दलों के नेता एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ने का बहाना ढूंढ़ते दिख रहे हैं। इसी दौरान एनसीपी (एसपी) के चीफ शरद पवार ने विपक्षी गठबंधन के कट्टर-विरोधी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की महाराष्ट्र चुनाव में भूमिका की सराहना करके खलबली मचा दी है।

पिछले साल नवंबर में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन की जो अप्रत्याशित सफलता मिली है और उससे पहले हरियाणा में जिस तरह से बीजेपी ने चुनावी पंडितों की भविष्यवाणियों की धज्जियां उड़ाकर अबतक की सबसे ज्यादा बहुमत वाली सरकार बना ली है, उसके लिए पक्ष और विपक्ष सब आरएसएस के स्वयंसेवकों का मुरीद बना हुआ है।

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Maharashtra Politics: शरद पवार को अब आरएसएस का काम पसंद आ रहा है!

हाल ही में मुंबई में आयोजित अपनी पार्टी एनसीपी (एसपी) की एक बैठक में पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ने कार्यकर्ताओं को आरएसएस से सीखने की नसीहत दे डाली।

जानकारी के मुताबिक पवार ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा, 'विधानसभा चुनावों ने बता दिया है कि अपनी विचारधारा को लेकर आरएसएस की समर्पित वफादारी और प्रतिबद्धता कैसे काम करती है। हमें भी एक मजबूत और प्रतिबद्ध कैडर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जो छत्रपति शाहू महाराज,महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ बीआर अंबेडकर की विचारधाराओं के प्रति समर्पित हो।'

आरएसएस एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है; जिसे बीजेपी का वैचारिक रूप से अगुवा संगठन माना जाता है। पवार ही नहीं, उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं को भी संघ के स्वयंसेवकों के समर्पण और वफादारी पसंद आने लगी है।

Maharashtra Politics: शरद पवार क्यों करने लगे RSS का गुण गान?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पवार की टिप्पणियों के बारे में उनकी पार्टी के नेता जितेन्द्र आव्हाड ने कहा, 'आरएसएस का उदाहरण उनके कैडर की प्रतिबद्धता और वफादारी के संदर्भ में था। अगर कुछ अच्छा है, तो हमें उसपर चर्चा क्यों नहीं करनी चाहिए? लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि एनसीपी (एसपी) या इसके नेता उनकी विचारधारा का समर्थन करते हैं।'

Maharashtra Politics: आरएसएस से दूरी का खामियाजा भुगत चुकी है बीजेपी!

आरएसएस की बीजेपी की राजनीतिक यात्रा में क्या महत्त्व है, इसकी झलक पिछले साल लोकसभा चुनावों में देखने को मिल चुका है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में इतना भर कह दिया था कि अब उनकी पार्टी खुद में ही सक्षम है और उन्हें किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है। जानकारी के मुताबिक इससे आरएसएस के समर्पित कैडर में बहुत ही ज्यादा निराशा हुई।

भाजपा को उस चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक की ओर से 'संविधान बदलने और आरक्षण खत्म कर देने' वाले कथित झूठे नैरेटिव का सामना करना था। पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगा और वह अपने दम पर बहुमत नहीं जुटा सकी और कांग्रेस ने 10 वर्षों बाद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 99 का आंकड़ा हासिल कर लिया।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र और हरियाणा में आरएसएस की सहायता ने भाजपा को दिलाई शानदार जीत

कहा जाता है कि बीजेपी नेताओं को अपनी भूल का अंदाजा लगते हुए देर नहीं हुई और उन्होंने फिर से आरएसएस की अहमियत को तरजीह देना शुरू कर दिया। खुद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संघ के पाधिकारियों के साथ कम से कम 6 बैठकें कीं। आरएसएस के नेताओं के साथ मिलकर विपक्ष के कथित 'झूठे नैरेटिव' के खिलाफ अपनी रणनीति तैयार की और आरएसएस के कैडर भाजपा के पक्ष में जमीन तैयार करने के लिए गली-गली, घर-घर पहुंच गए। पार्टी को पहले हरियाणा में उसी रणनीति से सफलता मिली।

फिर महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन ने 288 में से 235 सीटों पर कब्जा कर लिया। बीजेपी की अपनी स्ट्राइक रेट लगभग 90 तक पहुंच गई। संघ के आशीर्वाद से इसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी का भी शानदार तरीके से बेड़ा पार हो गया।

Maharashtra Politics: आरएसएस अपनी वाहवाही खुद नहीं करता,दूसरे करते हैं?

संघ का यह स्वभाव रहा है कि वह जो भी काम करता है, उसका कभी सार्वजनिक तौर पर खुद ही वाहवाही नहीं करता। लेकिन, जिसे उनकी वजह से फायदा मिलता है या जिनका संकट दूर होता है, वह तो आगे बढ़कर उन्हें सिर आंखों पर उठाने के लिए तैयार ही रहते हैं।

फडणवीस सरकार में मंत्री और पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने भी कहा,'महाराष्ट्र चुनाव में आरएसएस और इसके सभी अगुवा संगठनों की भूमिका बहुत ही विशाल थी। घर-घर जाकर चलाए गए उनके अभियान से हमें हार को जीत में बदलने में मदद मिली।'

आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 'अब हम सौ साल पुराना संगठन हैं। हमारे संगठन के दो उत्कृष्ट पहलू हैं, इसकी प्रतिबद्धता और इसका समर्पण। व्यक्तियों को जो भी कार्य मिलता है, वह बिना सवाल किए और बिना रुके निभाते हैं।'

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