Maharashtra Politics: 'लव जिहाद' के खिलाफ कानून, फडणवीस सरकार के सामने क्या हैं चुनौतियां? 5 बड़ी बातें
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार राज्य में 'लव जिहाद' या शादी का झांसा देकर 'जबरन धर्म परिवर्तन' करवाने के खिलाफ कानून लाने के लिए काफी गंभीर है। लेकिन, मौजदा परिस्थितियों में सीएम फडणवीस के सामने इस कानून को पास करवाने में कई चुनौतियां हैं, वहीं सियासी तौर पर देखा जाए तो बीजेपी इसे स्थानीय निकाय चुनाव में फायदे के सौदे के तौर पर भी देख सकती है।
कथित 'लव जिहाद' के खिलाफ कानून की आवश्यकता को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस का साफ कहना है कि उनकी सरकार दो-धर्म के लोगों के बीच शादी के खिलाफ नहीं है, लेकिन उन्हें चिंता इसकी वजह से होने वाले उत्पीड़नों और धोखाधड़ी को लेकर है।

Maharashtra Politics: झूठी पहचान का इस्तेमाल करके होने वाली शादियों को रोकने के लिए कानून की जरूरत-सरकार
इस तरह का कानून लाना बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति सरकार का चुनाव से पहले का संकल्प है। सीएम फडणवीस ने कहा है कि उन्हें दो धर्मों के बीच शादी से कोई दिक्कत नहीं है, 'लेकिन,जहां शादी जबरन,झूठी पहचान का इस्तेमाल करके और धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न के उद्देश्य से होते हैं,उनसे कानून के जरिए दृढ़ता से निपटने की जरूरत है।'
महायुति सरकार में बीजेपी के अलावा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उपमु्ख्यमंत्री अजित पवार की एनसीपी भी शामिल है। मुख्यमंत्री के इस कानून को लेकर ठोस इरादे के बावजूद सरकार इस विधेयक को सदन में पेश करने से पहले काफी सोच-समझकर कदम बढ़ाना चाहती है। इनमें से कुछ बातें सरकार और सत्ताधारी दलों की चुनौतियां बढ़ा सकती हैं तो कुछ सियासी तौर पर फायदेमंद भी साबित हो सकती हैं।
Maharashtra Politics: 1) महाराष्ट्र सरकार ने सात सदस्यीय समिति बनाकर अपना इरादा कर दिया साफ
विरोधी दलों और कुछ सहयोगियों के इस कानून को लेकर असहमति के बावजूद महायुति सरकार ने पिछले हफ्ते लव जिहाद के मामलों को रोकने के इरादे वाले 'सरकारी संकल्प'(GR- government resolution) जारी कर दिए हैं। सरकार ने इसपर विचार के लिए डीजीपी की अगुवाई में सात सदस्यीय एक समिति भी बनाई है। यह समिति इसके कानूनी प्रावधानों को देखेगी।
Love Jihad Maharashtra Politics: 2) बीजेपी के हिंदुवादी एजेंडे के लिए काफी फिट हो सकता है यह कानून
बीजेपी नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा इस कानून के सबसे बड़े पैरोकार हैं। उनका कहना है कि लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए इसके खिलाफ सख्त कानून लाना जरूरी है। उनका दावा है, 'ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं,खासकर मुंबई में। ऐसे मामलों की संख्या बहुत ही ज्यादा है,जहां हिंदू लड़कियां पीड़िता बनी हैं।'
Maharashtra Politics Love Jihad: 3) विरोधियों के साथ-साथ कुछ सहयोगियों के विरोध का भी बीजेपी को सता रहा है डर
लेकिन, बीजेपी के कुछ ऐसे भी सहयोगी हैं, जो इस मुद्दे पर खुलकर महायुति सरकार का साथ देने को तैयार नहीं हैं। मसलन, एनसीपी इस मुद्दे पर उतनी ही प्रतिबद्ध होगी, जितनी कि बीजेपी और शिवसेना है, यह कहना बहुत कठिन है। वहीं केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की आरपीआई (ए) तो इस प्रस्तावित कानून को लेकर पहले ही नाखुश लग रही है।
एनसीपी के एक मंत्री ने नाम गुमनाम रखने के अनुरोध के साथ बताया है कि 'इस तरह के संवेदनशील विषय पर हम जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे। धर्मों के बीच विवाह के खिलाफ कोई नहीं है और यही हमारा भी स्टैंड है। अगर अंतर-धार्मिक शादियों में शामिल महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं,तो उनका पता लगाने और उनसे निपटने की जरूरत है। लेकिन किसी एक समुदाय को अलग-थलग करने का हम समर्थन नहीं करते।'
लेकिन, अठावले की प्रतिक्रिया इससे ज्यादा सख्त है। उनके मुताबिक, 'दो धर्मों के बीच शादी को लव जिहाद कहना गलत है और हमें स्वीकार्य नहीं है। संविधान जाति, समुदाय और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जो सभी के लिए लाभप्रद हैं। फिर अंतर-धार्मिक के साथ भेदभाव क्यों? अगर ऐसी शादियों में अपराध की घटनाएं होती हैं, तो उनसे निपटने के लिए सख्त कानून होने चाहिए।'
Maharashtra Politics: 4) विधानसभा में महायुति के पास संख्या गणित को देखते हुए कानून पास करवाने में नहीं दिख रही कोई रुकावट
वहीं कानून विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कानून को पास करवाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। अलबत्ता लोग इसे अदालतों में चुनौती दे सकते हैं। सरकार इसी को टालना चाहती है और इसी वजह से समिति बनाई गई है, ताकि सभी तरह के पहलुओं पर विचार पहले ही कर लिया जाए।
Maharashtra Political News: 5) स्थानीय निकाय चुनावों में बन सकता है बड़ा मुद्दा
सबसे बड़ी बात ये है कि राज्य में आने वाले महीनों में निकाय चुनाव होने हैं। इन चुनावों में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) में शामिल तीनों दल काफी पहले से कह रहे हैं कि वे अलग-अलग मैदान में उतरेंगे। सत्ताधारी महायुति के दलों के बीच अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि वे अकेले चुनाव में उतरेंगे या फिर गठबंधन में ही किस्मत आजमाएंगे।
जहां तक बीजेपी और शिवसेना की बात है तो इस कानून के माध्यम से उसे अपने हिंदुत्व के एजेंडे पर आक्रमकता के साथ आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। खासकर मुंबई के बीएमसी (BMC Polls) में जहां लगभग तीन दशकों से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) का कब्जा है।
एक बीजेपी नेता ने कहा है, 'हिंदुत्व पर हम अपने स्टैंड पर समझौता नहीं करने जा रहे हैं। कानूनी और संवैधानिक वैधता के अभाव वाला 'लव जिहाद' कानून लाना हमारे घोषित उद्देश्य को नाकाम कर देगा।'












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