Atishi Father Death Reason: दिल्ली की पूर्व CM आतिशी के पिता का कैसे हुआ निधन? किस बीमारी से थे परेशान?
Atishi Father Vijay Singh Death Reason: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रमुख चेहरा आतिशी मार्लेना के पिता, प्रोफेसर विजय सिंह का शुक्रवार (17 अप्रैल) को निधन हो गया। 80 वर्षीय विजय सिंह पिछले एक साल से बेड रेस्ट पर थे और उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था। वे बिना सहारे के चल भी नहीं पाते थे। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। वहीं, उन्होंने अंतिम सांस ली।
यह खबर न सिर्फ आतिशी के परिवार के लिए, बल्कि पूरे AAP परिवार के लिए बेहद दुखद है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तुरंत शोक व्यक्त किया। आतिशी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक परिवार इस वक्त गहरे शोक में डूबा हुआ है।

Who Was Atishi Father Vijay Singh: विजय सिंह कौन थे? एक समर्पित शिक्षक का पूरा सफर
प्रोफेसर विजय सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के इतिहास विभाग में प्रोफेसर रहे। पंजाबी मूल के राजपूत परिवार से ताल्लुक रखने वाले विजय सिंह ने अपना पूरा जीवन शिक्षा के क्षेत्र में बिताया। उनकी पत्नी तृप्ता वाही भी DU की प्रोफेसर रही हैं। दोनों ने मिलकर न सिर्फ अपनी बेटी आतिशी को मजबूत मूल्यों वाला जीवन दिया, बल्कि हजारों गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के छात्रों को पढ़ाया।
विजय सिंह हमेशा कहते थे कि शिक्षा ही समाज को बदल सकती है। उन्होंने दिल्ली के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया। उनके छात्र आज भी उन्हें याद करते हुए कहते हैं कि सर जी की क्लास में सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन के सबक मिलते थे। उन्होंने कभी राजनीति में सीधे कदम नहीं रखा, लेकिन अपने मूल्यों के कारण AAP परिवार के करीब रहे। आतिशी की राजनीतिक यात्रा में उनके पिता की शिक्षा और ईमानदारी की छाप साफ दिखती है।
Atishi Father Vijay Singh Passes Away Reason: कैसे हुआ आतिशी के पिता का निधन?
पिछले एक साल से वे बेड रेस्ट पर थे। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण वे घर से बाहर भी नहीं निकल पाते थे। आतिशी कई बार अपनी व्यस्तता के बावजूद पिता की देखभाल के लिए समय निकालती थीं। जनवरी 2025 में जब भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने उनके पिता को लेकर विवादित बयान दिया, तो आतिशी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक होकर रो पड़ी थीं। उन्होंने कहा था कि मेरे पिता जीवन भर शिक्षक रहे हैं। उन्होंने गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के परिवारों के हजारों बच्चों को पढ़ाया है। आज वे 80 वर्ष के हैं और उनका स्वास्थ्य बहुत खराब है। वे बिना सहारे के चल भी नहीं सकते।
उस घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। आतिशी ने बिधूड़ी पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक बीमार बुजुर्ग को निशाना बनाया। वह पल आतिशी की संवेदनशीलता और परिवार के प्रति लगाव को दिखाता था। अब जब पिता का निधन हो गया, तो वह घटना और भी भावुक कर देती है।
राजनीतिक परिवार में शोक की लहर
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के शोक संदेश ने AAP के अंदर एकता का संदेश दिया। केजरीवाल ने लिखा कि विजय सिंह जी ने शिक्षा के माध्यम से समाज सेवा की। सिसोदिया ने कहा कि वे शिक्षा और मूल्यों पर आधारित जीवन जीते थे। दोनों नेता इस वक्त आतिशी के परिवार के साथ खड़े होने की बात कर रहे हैं।
मनीष सिसोदिया ने विस्तार से लिखा कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के पिता विजय सिंह के निधन का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज को समर्पित कर दिया और शिक्षा व मूल्यों पर आधारित जीवन जिया। इस कठिन समय में मेरी गहरी संवेदनाएं आतिशी और उनके परिवार के साथ हैं। ईश्वर उन्हें इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
दिल्ली की राजनीति में यह निधन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बड़ा है। आतिशी 2024-25 में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं थीं। उनके कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर खास फोकस रहा। उनके पिता की शिक्षक पृष्ठभूमि ने हमेशा उनकी नीतियों को प्रेरणा दी।
आतिशी की जिंदगी में पिता की भूमिका
आतिशी मार्लेना का जन्म 8 जून 1981 को हुआ। उनके माता-पिता दोनों DU प्रोफेसर थे। नाम 'मार्लेना' मार्क्स और लेनिन से मिलाकर रखा गया था, जो उनके वामपंथी विचारों को दर्शाता है। लेकिन आतिशी ने 2018 में अपना सरनेम 'मार्लेना' राजनीतिक कारणों से छोड़ दिया। पिता विजय सिंह ने उन्हें हमेशा कहा कि सच्ची सेवा बिना किसी स्वार्थ के होनी चाहिए। आतिशी ने ऑक्सफर्ड से पढ़ाई की और वापस लौटकर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार पर काम किया। AAP में शामिल होने के बाद वे केजरीवाल की सबसे करीबी सलाहकार बनीं। 2025 में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद भी वे पिता की सलाह लेती रहती थीं।
पिछले एक साल में पिता की बीमारी ने आतिशी को व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती दी। बिधूड़ी वाले बयान के बाद उन्होंने कहा था कि राजनीति इतनी नीचे नहीं गिरनी चाहिए। अब निधन के बाद पूरा AAP परिवार उन्हें संबल दे रहा है।
आगे क्या?
परिवार अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा है। आतिशी के करीबी कह रहे हैं कि वे कुछ दिन परिवार के साथ बिताएंगी। AAP ने पार्टी कार्यक्रमों में बदलाव किया है। यह निधन हमें याद दिलाता है कि राजनीति के चमक-दमक के पीछे भी परिवार और निजी जिंदगी होती है। आतिशी जैसे मजबूत नेता भी जब पिता को खोती हैं, तो इंसानियत सामने आ जाती है।













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