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Raj Thackeray के बयान पर भड़के रामदास अठावले, पूछा- तो क्या राज ठाकरे सबको नौकरी देंगे?

Maharashtra marathi language Row: महाराष्‍ट्र में निकाय चुनाव से पहले मराठी बनाम हिंदी भाषा विवाद खत्‍म होने के बजाय गरमाता जा रहा है। महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा स्‍कूलों में तीसरे विषय के तौर पर हिंदी पढ़ाए जाने की अनिवार्यता का फैसला वापस लिए जाने के बाद शिसेना यूटीबी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने 5 जुलाई को मुंबई में विजय रैली का आयोजन किया।

जिसमें मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने ऐसा विवादित बयान दिया जिसने महाराष्‍ट्र में बड़ा बवाल मचा दिया है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने राज ठाकरे के विवादित बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयानों से दादागिरी करने वालों को बढ़ावा मिलता है।

Maharashtra marathi language Row

रामदास अठावले ने कहा, "राज ठाकरे ने बहुत ही विवादित बयान दिया है। ऐसे बयान दादागिरी करने वालों को बढ़ावा देता है। वह एक राजनेता हैं, इसलिए उन्हें ऐसी बातों से बचना चाहिए। भाषा के कारण किसी को पीटना ठीक नहीं है, और किसी को थप्पड़ मारने जैसी भाषा बंद होनी चाहिए।

अठावले ने कहा, "देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में गैर-मराठी लोग भी हैं, जो उद्योग भी चलाते हैं। अगर उद्योग बंद हो गए तो क्या राज ठाकरे सबको नौकरी देंगे? मेरा उद्धव ठाकरे से एक सवाल है, क्योंकि हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं और बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुओं के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन अब वह क्या कर रहे हैं?... मुझे लगता है कि मनसे के कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"

राज ठाकरे ने क्‍या दिया है बयान, जिस पर भड़के अठावले

दरअसल, शनिवार को शिवसेना यूटीबी और मनसे द्वारा आयोजित विजय रैली के अवसर पर राज ठाकरे ने कहा, "महाराष्‍ट्र में सभी निवासियों, "चाहे वे गुजराती हों या कोई और," को मराठी सीखनी चाहिए़। इसके साथ ही उन्होंने कहा, "मराठी नहीं बोलने के लिए लोगों को पीटने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन अगर कोई अनावश्यक नाटक करता है, तो आपको उनके कान के नीचे मारना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा, "ऐसी घटनाओं को रिकॉर्ड न करें। जिस व्यक्ति को पीटा गया है, उसे इसके बारे में बोलने दें।"

अठावले बोले- राज ठाकरे "आरक्षण विरोधी" टिप्पणी वापस लें नहीं तो..

इसके अलावा सामाजिक न्याय राज्य मंत्री अठावले ने राज ठाकरे से अपनी "आरक्षण विरोधी" टिप्पणी वापस लेने को कहा है, अन्यथा दलित और पिछड़े वर्ग आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में एमएनएस उम्मीदवारों का बहिष्कार करेंगे। राज ठाकरे की आलोचना करते हुए कहा, "अगर वह अपनी टिप्पणी वापस नहीं लेते हैं, तो दलितों, आदिवासियों और ओबीसी को विधानसभा चुनावों में एमएनएस उम्मीदवारों का बहिष्कार करना चाहिए।"

राज ठाकरे ने मराठी आरक्षण को लेकर क्‍या कहा था?

पंढरपुर शहर में पत्रकारों से बात करते हुए ठाकरे ने कहा था कि नौकरी के अवसरों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। एमएनएस प्रमुख ने कहा था, "मेरा रुख है कि नौकरी के अवसरों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसमें जाति एक कारक क्यों होनी चाहिए? अगर निजी क्षेत्र में नौकरियां सृजित होती रहती हैं, तो हमें इस बारे में सोचना चाहिए कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण से कितने लोगों को लाभ होगा।"

ठाकरे ने यह भी कहा कि सभी समुदायों को यह समझना चाहिए कि उन्हें वोटों के लिए मूर्ख बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा था, "मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में किसी को प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करके अपना एजेंडा चलाया जा रहा है, ओबीसी, मराठा और अन्य समुदायों के छात्रों की जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।"

राज ठाकरे की इस टिप्पणी के बाद मराठा कोटा आंदोलनकारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। मराठा समुदाय के सदस्य, जिनकी अगुवाई कार्यकर्ता मनोज जारांगे कर रहे हैं, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।

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