Maharashtra Lok Sabha Chunav: निर्यात पर बैन हटने से महायुति को फायदा मिलेगा? या 'खून' के आंसू रुलाएगा प्याज!
Maharashtra Lok Sabha Chunav 2024: महाराष्ट्र में प्याज वाले उत्पादन वाले इलाके में चुनाव शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने इसके निर्यात पर लगी पाबंदी हटाने की घोषणा की है। सरकार ने देश में प्याज की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए पिछले साल दिसंबर में इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।
शनिवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने नोटिफिकेशन जारी करके प्रति टन 550 डॉलर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) और 40% निर्यात शुल्क के साथ प्याज निर्यात की अनुमति देने की घोषणा की है।

प्याज निर्यात पर बैन से किसानों में थी नाराजगी
पश्चिम महाराष्ट्र और इसका मराठवाड़ा इलाका देश में प्याज उत्पादन के लिए मशहूर है। महाराष्ट्र के अकेले यही दो इलाके देश में प्याज का करीब 40% उत्पादन करते हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध की वजह से इस साल जनवरी से ही इन इलाकों के किसान बहुत नाखुश थे और उनकी ओर से प्रदर्शन भी किया जा रहा था।
गुजरात से सफेद प्याज के निर्यात में पहले ही दी गई थी रियायत
महाराष्ट्र के किसानों की यह नाराजगी तब और बढ़ गई थी, जब सरकार ने पिछले 25 अप्रैल को गुजरात से 2,000 टन सफेद प्याज के निर्यात में राहत दे दी थी। गुजरात सफेद प्याज का बड़ा उत्पादक है और विदेशों में इसकी काफी मांग भी है।
गुजरात में भी भावनगर और अमरेली जिले में सबसे ज्यादा सफेद प्याज का उत्पादन होता है और इन दोनों सीटों पर तीसरे चरण में 7 मई को वोटिंग होनी है।
गुजरात में रियायत मिलने के बाद महाराष्ट्र के किसानों में और बढ़ गई थी नाराजगी
जबकि, महाराष्ट्र में लाल प्याज का उत्पादन होता है और गुजरात के किसानों को दी गई छूट से यहां के प्याज उत्पादक किसानों का रोष और बढ़ गया था।
मसलन नासिक के एक प्याज किसान अभिषेक सालुंखे ने बताया, 'यह एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन बहुत देर से आया है। पहले तो निर्यात पर प्रतिबंध लगना ही नहीं चाहिए। और अगर निर्यात पर से प्रतिबंध हटाना ही है तो सभी राज्यों में हटना चाहिए न कि सिर्फ एक में।'
महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक बेल्ट में एनडीए ने किया था शानदार प्रदर्शन
महाराष्ट्र का नासिक राज्य के प्याज उत्पादक किसानों का गढ़ है। यहां के लासलगांव में देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी है। नासिक लोकसभा सीट से पिछले दो चुनावों से महायुति में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना के हेमंत गोडसे चुनाव जीत रहे हैं।
मराठवाड़ा इलाके में लोकसभा की 8 सीटों में से पिछली बार बीजेपी 4 पर जीती थी और 3 उसकी सहयोगी शिवसेना के खाते में गई थी। सिर्फ औरंगाबाद में ही एनडीए गठबंधन को निराशा हाथ लगी थी, जहां से हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील शिवसेना प्रत्याशी से मात्र 4,492 वोटों से जीत गए थे।
हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी!
सरकार ने महाराष्ट्र में बाकी बचे अगले तीन चरणों के चुनाव से पहले बैन हटाकर प्याज किसानों को बहुत बड़ी राहत दी है। लेकिन, चुनावों में इससे महायुति गठबंधन को कोई लाभ मिल पाएगा या उसे फिर भी प्याज के आंसू रोने ही पड़ेंगे यह कहना बहुत मुश्किल है।
खासकर यह वही इलाका है, जो मराठा आरक्षण आंदोलन से प्रभावित है। ऊपर से अगर विपक्षी महा विकास अघाड़ी प्याज किसानों के प्रति सहानुभूति दिखाकर उनके गुस्से से जरा भी वोट निचोड़ने में सफल हो गया तो बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।












Click it and Unblock the Notifications