Maharashtra Local Body Elections: SC ने लगाई फटकार, चुनाव आयोग कब और कितने चरण में करवा रहा निकाय चुनाव?
Maharashtra Local Body Elections: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए पहले निर्धारित समय-सीमा का पालन न करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। हालांकि, कोर्ट ने एक बार की रियायत के तौर पर समय-सीमा बढ़ाते हुए निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक पूरे कर लिए जाएं।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि परिसीमन का कार्य 31 अक्टूबर, 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसीमन की कवायद चुनावों को टालने का आधार नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य चुनाव आयोग द्वारा 6 मई को जारी पिछले निर्देशों का पालन न करने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिसके अनुसार चुनाव चार महीने के भीतर संपन्न होने थे।

तीन चरण में चुनाव होगा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने तीन चरणों में स्थानीय निकाय चुनाव कराने की तैयारी कर ली है। इन चुनावों को जिला परिषदों और पंचायत समितियों, उसके बाद नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों, और अंत में महानगरपालिकाओं के रूप में तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने इसके लिए विस्तृत तैयारी कर ली है।
हालांकि अभी तारीखों का ऐलान नहीं किया है लेकिन आयोग की योजना के अनुसार, नवंबर के अंत तक जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव होंगेदिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत में नगरपालिकाओं के चुनाव आयोजित किए जाएंगे, जबकि महानगरपालिकाओं के चुनाव जनवरी के अंत तक संपन्न होंगे।
पहले चरण में जिला परिषदों और पंचायत समितियों के क्यों होंगे चुनाव?
जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए वार्ड और निर्वाचन क्षेत्र पहले ही अंतिम रूप दिए जा चुके हैं। पिछले सप्ताह ही जिला परिषदों के अध्यक्षों के आरक्षण का ड्रा निकाला गया था। अब अगले चरण में वार्डों और निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आरक्षण का ड्रा निकाला जाएगा।
इस प्रक्रिया के चलते जिला परिषदों के चुनाव सबसे पहले होंगे। इन चुनावों के नतीजों से सभी राजनीतिक दलों को ग्रामीण महाराष्ट्र के राजनीतिक रुझान का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इसके बाद नगरपालिकाओं के चुनाव होंगे।
कब होंगे महाराष्ट्र महानगरपालिकों के चुनाव?
सबसे आखिर में महानगरपालिकाओं के चुनाव होंगे, जो सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जिला परिषदों के चुनावों के बाद 200 से अधिक नगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं। नगरपालिकाओं के वार्डों की संरचना को अंतिम रूप देने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है।
इस समय-सीमा को देखते हुए, दिसंबर में नगरपालिकाओं के चुनाव आयोजित किए जा सकते हैं। मुंबई सहित 29 महानगरपालिकाओं के लिए वार्डों की अंतिम संरचना घोषित करने की समय-सीमा 13 अक्टूबर है।
मुंबई के लिए यह समय-सीमा 6 अक्टूबर है, जबकि 'डी' वर्ग की महानगरपालिकाओं के लिए यह 13 अक्टूबर तक है। इसके बाद, वार्डों का आरक्षण और मतदाता सूची तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं में कुछ समय लगेगा।
संभावना है कि महानगरपालिकाओं के चुनाव जनवरी के तीसरे या अंतिम सप्ताह में होंगे। सभी को यह जानने की उत्सुकता है कि मुंबई महानगरपालिका के चुनाव कब होंगे। अनुमान है कि यह चुनाव जनवरी के अंत तक हो सकते हैं।
तीन चरण में चुनाव होने से किसे होगा फायदा?
सत्ताधारी महायुति के भीतर यह धारणा है कि तीन चरणों में होने वाले चुनाव उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। कांग्रेस, शिवसेना (ठाकरे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) अभी उतनी संगठित नहीं दिख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में महायुति के तीनों घटक दलों का दबदबा अधिक है। नगरपालिका चुनावों में भी सत्ताधारी महायुति अधिक सफलता प्राप्त करने का प्रयास करेगी।
सत्ताधारी गठबंधन का मानना है कि यदि जिला परिषदों और नगरपालिकाओं के चुनावों में महायुति के घटक दलों को अच्छा प्रदर्शन मिलता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव महानगरपालिका चुनावों पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से महायुति के रणनीतिकारों का मानना है कि तीन चरणों में होने वाले चुनाव उनके लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।












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