Maharashtra: RSS का मजबूत नेटवर्क होने के बावजूद उत्‍तर महाराष्‍ट्र को लेकर क्‍यों डरी है भाजपा?

Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनावों का महासंग्राम शुरू हो चुका हैं। भाजपा ने 99 उम्‍मीदवारों की पहली लिस्‍ट जारी कर चुनाव का अगाज़ कर दिया है। इस बार के चुनाव में भाजपा को विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार की एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस शामिल हैं।

वहीं उत्‍तर महाराष्‍ट्र जो भाजपा का गढ़ रहा है और भाजपा के महाराष्‍ट्र के उदय में इस क्षेत्र की अहम भूमिका रही है। इस क्षेत्र में आरएसएस का मजबूत नेटवर्क होने के बाजजूद भाजपा इस क्षेत्र को लेकर डरी हुई है।

Maharashtra Assembly Elections 2024

बता दें उत्‍तर महाराष्‍ट्र जो अपनी समृद्ध कृषि उपज, विशेष रूप से प्याज के लिए जाना जाता है, राज्य के राजनीतिक भाग्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भाजपा को ये पता है कि नासिक, जलगांव, धुले और नंदुरबार जिला और छह लोकसभा और 35 विधानसभा क्षेत्रों वाले इस उत्‍तर महाराष्‍ट्र क्षेत्र को किसानों के बीच अशांति के कारण आगामी विधानसभा चुनावों में हल्के में नहीं लिया जा सकता है। क्‍योंकि किसानों में असंतोष और भाजपा के खिलाफ मुस्लिम-मराठा वोटों को एकजुट करने के प्रयास महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश सकते हैं।

लोकसभा चुनाव में लग चुका है भाजपा को झटका

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा जो सत्‍तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्‍सा है उसे उत्‍तर महाराष्‍ट्र में करारी हार का सामना करना पड़ा था। उत्‍तर महाराष्‍ट्र में सत्ता विरोधी लहर और किसानों के बीच गुस्से ने क्षेत्र में पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। 2019 में भाजपा को महाराष्‍ट्र के ग्रामीण वोट का 39.5 फीसदी हासिल हुआ था। इस बार के चुनाव में महज 35 फीसदी ग्रामीण वोट भाजपा काे मिले थे।

भाजपा की क्षमता की परीक्षा है ये विधानसभा चुनाव

वहीं अब पांच महीने बाद नवंबर में हो रहे महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में उत्तर महाराष्ट्र महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ गठबंधन सहयोगियों शिव सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए चुनौतियों का सामना करने की भाजपा की क्षमता की परीक्षा है। याद रहे विपक्षी महा अघाड़ी गठबंधन उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार की एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस से मिलकर बना है।

क्‍यों भाजपा से नाराज हुए थे महाराष्‍ट्र के किसान

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्याज निर्यात नीतियों में हाल ही में किए गए बदलाव उत्तर महाराष्ट्र में कृषक समुदाय की शिकायतों को दूर करने का प्रयास किया है। याद रहे शुरुआत में, दिसंबर 2023 में, सरकार ने 40% निर्यात शुल्क लगाने के बाद घरेलू आपूर्ति और कीमतों को स्थिर करने के लिए प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए किए गए ये उपाय

हालांकि 4 मई को प्रतिबंध हटा लिया गया था, लेकिन लोकसभा चुनावों के दौरान इसे फिर से लागू कर दिया गया और बाद में, 13 सितंबर को निर्यात शुल्क 40% से घटाकर 20% कर दिया गया। इन उपायों का उद्देश्य किसानों के बीच अशांति को शांत करना है, जो भारत के प्याज उत्पादन का 30% हिस्सा रखने वाले इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। क्या ये प्रयास किसानों का समर्थन हासिल करने और विपक्ष के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त होंगे, यह देखना बाकी है।

उत्तर महाराष्ट्र में 2019 में भाजपा को मिली थी बढ़त

2019 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने उत्तरी महाराष्ट्र में 13 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल करते हुए बढ़त हासिल की। ​​इसके बाद अविभाजित शिवसेना और एनसीपी ने क्रमशः छह और सात सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस और एआईएमआईएम ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

लोकसभा चुनाव में भाजपा को हुआ नुकसान

हालांकि, हाल के लोकसभा चुनावों ने एक अलग तस्वीर पेश की, जिसमें कांग्रेस और भाजपा ने दो-दो सीटें जीतीं, और एनसीपी (सपा) और शिवसेना (यूबीटी) ने एक-एक सीट हासिल की। ​​यह एनडीए के पहले के प्रभुत्व से हटकर इस क्षेत्र में भाजपा के गढ़ को चुनौती देने वाला था।

क्‍या भाजपा का ये एजेंडा करेगा चुनाव में कमाल?

चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, भाजपा ने उत्तरी महाराष्ट्र में अपनी ज़मीन पूरी तरह नहीं खोई है, इसका श्रेय उसके हाई-वोल्‍टेज हिंदुत्व एजेंडे को जाता है जो इस क्षेत्र में कई लोगों के बीच गूंजता है, जिसमें नासिक भी शामिल है, जो एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है।

"हिंदू ख़तरे में हैं" नारे का इस्तेमाल दक्षिणपंथी और उससे जुड़े संगठनों ने समर्थन जुटाने और एमवीए के पक्ष में मुस्लिम वोटों के कथित एकीकरण का मुकाबला करने के लिए किया है। इस रणनीति का उद्देश्य हिंदू मतदाताओं को संगठित करना और क्षेत्र में पार्टी का प्रभाव बनाए रखना है।

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