महाराष्ट्र चुनाव में इस बार मुस्लिम उम्मीदवारों की कितनी बड़ी है भूमिका, किस दल ने सबसे ज्यादा किया भरोसा?

Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बड़े राजनीतिक दलों ने एक बार फिर से मुसलमानों को निराश किया है। अलबत्ता बड़े दलों के मुकाबले छोटे दलों ने जरूर बड़ा दिल दिखाया है। लेकिन, फिर भी हकीकत ये है कि आधे से ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशी निर्दलीय ही भाग्य आजमा रहे हैं। बात मुस्लिम महिलाओं की करें तो 288 सीटों में से 270 में एक भी मुस्लिम महिला प्रत्याशी नहीं है।

2011 की जनगणना के अनुसार महाराष्ट्र में मुसलमानों की आबादी साढ़े ग्यारह प्रतिशत से कुछ अधिक है। टीओआई ने निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के आधार पर बताया है कि इस बार राज्य में कुल 4,136 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें से 420 मुसलमान हैं। इस हिसाब से करीब 10% मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जो उनकी आबादी के लगभग अनुकूल ही है।

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150 से भी अधिक सीटों पर एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नही
लेकिन, तथ्य यह है कि ये उम्मीदवार कुछ ही सीटों पर ज्यादा संख्या में चुनाव लड़ रहे हैं और 150 से भी अधिक सीटों पर एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं है। करीब 50 सीटों पर सिर्फ एक ही मुसलमान उम्मीदवार है और 23 विधानसभा क्षेत्रों में 2 और इतने ही और पर 3 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि, 5 सीटें ऐसी भी हैं, जहां 7 मुस्लिम उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

छोटे दलों ने 150 मुसलमानों को दिया टिकट
महाराष्ट्र में सियासी दलों की मुस्लिम प्रत्याशियों के प्रति बेरुखी का सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि करीब 420 में से 218 मुसलमान निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं और वे किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। सबसे ज्यादा 150 मुसलमानों को छोटे दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस के टिकट पर 9 मुस्लिम लड़ रहे चुनाव
अगर दलों की बात करें तो खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली बीजेपी ने एक भी मुसलमान को महाराष्ट्र में टिकट नहीं दिया है। जबकि, खुद को भारत की सबसे पुरानी पार्टी कहने वाली कांग्रेस ने मात्र 9 मुस्लिम चेहरों पर भरोसा किया है। बीजेपी ने भले ही एक भी मुसलमान को नहीं उतारा है, लेकिन उसकी सहयोगी अजित पवार की एनसीपी से 5 मुसलमान प्रत्याशी इस बार चुनाव लड़ रहे हैं।

ओवैसी को सबसे ज्यादा मुस्लिम चेहरों पर भरोसा
मुसलमानों को सबसे ज्यादा टिकट देने वाली असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम है, जिसने राज्य में 16 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। राज्य में चुनाव मैदान में मुसलमान प्रत्याशियों की इस असंतुलित तस्वीर को लेकर वरिष्ठ वकील फिरदौस मिर्जा ने कहा है, 'मुसलमानों के लिए एससी और एसटी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं, जिससे उन्हें सामान्य सीटों से ही लड़ना है, जो कि मौजूदा सांप्रदायिक माहौल में उनके लिए जीत को लगभग नामुमकिन बना देता है।'

औरंगाबाद पूर्व सीट पर 17 मुस्लिम उम्मीदवार
तथ्य यह भी कि ज्यादातर मुसलमान प्रत्याशी अधिक मुस्लिम आबादी या मुस्लिम-बहुल सीटों से ही चुनाव लड़ रहे हैं। जैसे औरंगाबाद पूर्व सीट पर कुल 29 उम्मीदवारों में 17 मुस्लिम प्रत्याशी हैं। इनमें तीन मुस्लिम महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं।

राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री अनीस अहमद के मुताबिक, 'अधिकर मध्यम-वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अब चुनाव वित्तीय तौर पर बहुत ही मुश्किल हो चुका है, खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के लिए। निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए यह बहुत ही बड़ा आर्थिक बोझ बन जाता है, जबकि बड़ी पार्टियां अपने प्रत्याशियों के प्रचार का खर्चा भी उठाती हैं।'

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