Maharashtra Elections: जारांगे पाटिल ने कैसे पलट दिया गेम? BJP को यूं मिला एक और 'दिवाली' मनाने का मौका

Maharashtra Elections 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी महायुति गठबंधन और उसमें भी भाजपा के लिए सबसे बड़े सिरदर्द बन चुके मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे पाटिल ने नामांकन वापसी के दिन सारा गेम ही पलट दिया है। नामांकन के आखिरी दिन कहां उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वह अपनी ओर से उम्मीदवारों के समर्थन का एलान करेंगे, लेकिन उन्होंने तो चुनावों से अचानक अपना कदम ही पीछे खींच लिया।

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर बीते 15 महीनों से सत्ताधारी गठबंधन की नाक में दम कर चुके मनोज जारांगे पाटिल कभी अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के दावे कर रहे थे तो कभी मराठा-दलित और मुसलमानों की गोलबंदी की वकालत करने में लगे हुए थे। वे बेहिचक बीजेपी और उसके सहयोगियों को चुनावों में सबक सिखाने की बातें कर रहे थे।

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बीजेपी और महायुति को हराने के स्टैंड से पीछे हटे मराठा आंदोलनकारी
लेकिन, सोमवार को उन्होंने अचानक फैसला ले लिया कि वह किसी भी प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेंगे। यही नहीं, उन्होंने मराठा समुदाय से भी कह दिया है कि वह सिर्फ मराठा आरक्षण का विरोध करने वालों के खिलाफ मतदान न करें। मतलब, वह अपनी इच्छानुसार जहां चाहें वोट डालें। बीजेपी ने उनके इस फैसले को हाथों हाथ लिया है।

खुश तो बहुत ज्यादा हो रहे होंगे देवेंद्र फडणवीस!
इस बात में कोई दो राय नहीं कि मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता का यह फैसला सीधे तौर पर भाजपा और उसके महायुति गठबंधन का हौसला बढ़ाने वाला है। क्योंकि, मराठा आंदोलनकारियों के सबसे ज्यादा निशाने पर बीजेपी नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही रहे हैं।

कई बार तो इस मुद्दे पर फडणवीस महायुति के सहयोगियों के बीच भी घिरते नजर आ चुके हैं। मराठा आंदोलनकारियों ने एक तरह से उन्हें कोटा-विरोधी विलेन के तौर पर पेश करने तक से भी परहेज नहीं किया था।

'हमारे लिए तो असली दिवाली यही है'
जारांगे पाटिल के फैसले की बात जैसे ही फैली, बीड जिले में एक भाजपा नेता ने कहा कि 'हमारे लिए तो असली दिवाली यही है।' जारांगे पाटिल के आंदोलन को झेलते आ रहे है महाराष्ट्र के आम भाजपाइयों की भावना भी इससे अलग नहीं होगी।

जारांगे पाटिल ने अपने यू-टर्न से पलट दिया चुनावी गेम!
क्योंकि, एक दिन पहले ही रविवार देर रात जारांगे ने मराठा समुदाय को 'धोखा' देने का आरोप लगाते हुए महायुति से बदला लेने का आह्वान किया था और सोमवार सुबह सात बजे तक अपने समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी करने का वादा करते हुए रो भी पड़े थे।

उन्होंने कहा था, 'हम उम्मीदवारों को समर्थन देंगे और जहां उम्मीदवारों को समर्थन नहीं देंगे, हम उन्हें हराएंगे जो मराठा आरक्षण का विरोध करते हैं।'

जारांगे का मुस्लिम कार्ड फेल कर गया?
उन्होंने जो संकेत दिया था, उससे लगा था कि बीड, जालना, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे में उनके प्रत्याशी उतर भी चुके हैं। लेकिन, सोमवार सुबह 9.30 बजे उन्होंने घोषणा कर दी कि वह किसी भी प्रत्याशी को समर्थन नहीं देंगे। उन्होंने इसकी वजह ये बताई कि 'मित्र दलों' ने वादे के मुताबिक उनके पास नामों की लिस्ट नहीं भेजी। उनकी बातों से लगा कि ये पार्टियां मुसलमान और दलितों को लेकर ज्यादा फिक्रमंद हैं।

जारांगे के फैसले से विपक्षी एमवीए को हो सकता है नुकसान
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की जनसंख्या 30 से 32% बताई जाती है। जारांगे के आंदोलन की वजह से ऐसा लग रहा था कि आखिरकार मराठा वोट पूरी तरह से विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के पक्ष में गोलबंद हो सकता है। जबकि, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार खुद भी मराठा हैं।

मराठा क्रांति मोर्चा के एक प्रमुख नेता जिन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन में भी अहम रोल निभाया है, उनका कहना है कि उन्हें कुछ दिनों पहले से ही लगने लगा था कि जारांगे-पाटिल यू-टर्न ले सकते हैं। उन्होंने अपनी पहचान नहीं उजागर करने के आग्रह के साथ कहा कि, 'राजनीति अलग चीज है, जिसे जारांगे पाटिल को समझना चाहिए।'

गांवों और शहरों में जो जहर फैल रहा था- बीजेपी
भाजपा प्रवक्ता प्रवीण दारकेकर के मुताबिक, 'जहां तक आरक्षण के लिए उनके आंदोलन का सवाल है तो, जारांगे पाटिल ने सही फैसला लिया है। आंदोलन पर राजनीति हो रही थी। उनका उम्मीदवारों को समर्थन देने और प्रत्याशियों को हराने की बातें करने से मराठा समुदाय में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही थी...गांवों और शहरों में जो जहर फैल रहा था, इस फैसले से उनसे खत्म करने में जरूर मदद मिलेगी।'

उनका यह भी कहना है कि हो सकता है कि मुसलमानों और दलितों में गठबंधन की उनकी कोशिश फेल हो गई थी। वे बोले, 'ऐसा लगता है कि उन्होंने इनके आह्वान पर ध्यान ही नहीं दिया।' उन्होंने यहां तक कहा कि तथ्य ये है कि मराठा समुदाय 'एआईएमआईएम के जलील जैसों से' उनकी बातचीत के उनके फैसले से निराश था।

महायुति गठबंधन के अब दोनों हाथों में लड्डू!
बीजेपी और महायुति गठबंधन महाराष्ट्र चुनाव में इस बार एक तरह से मानकर चल रहा था कि उसे मराठा आरक्षण आंदोलन का खामियाजा उठाना पड़ सकता है। इसीलिए पार्टी और गठबंधन ने शुरू से ओबीसी और दलित समुदायों के गोलबंदी पर काफी काम किया है।

जारांगे पाटिल जिस तरह से आक्रामक रवैया अपनाए हुए थे, उससे बीजेपी को उसके विरोध में ओबीसी वोट बैंक का फायदा स्वाभाविक ही मिलने की उम्मीद थी। लेकिन, अब जिस तरह से जारांगे पाटिल ने चुनावों से लगभग दो हफ्ते पहले पलटी मारी है, सत्ताधारी गठबंधन के दोनों ही हाथों में लड्डू महसूस होने लगे हैं!

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