Maharashtra: महायुति की लहर से राज्य में किन दलों पर आया अस्तित्व का संकट?
Maharashtra Election 2024: महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हुए इस बार के चुनाव ने कई छोटी-छोटी पार्टियों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है। इनमें से कई पार्टी पहले न सिर्फ 'वोट कटवा' का रोल निभाने में सक्षम थीं, बल्कि विधानसभा तक अपनी बातें पहुंचाने में भी सफल होती थीं। लेकिन, इस बार महाराष्ट्र में ऐसा चुनाव नतीजा आया है, जिससे इन दलों के लिए आगे आने वाले चुनावों में संभावित 'सौदेबाजी' की शक्ति भी सीमित हो गई है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस बार सत्ताधारी महायुति के पक्ष में लहर चली है। बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी गठबंधन ने 288 में से 235 सीटें जीती हैं। महायुति में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी की स्ट्राइक रेट तो करीब 90% रही है। इनके मुकाबले प्रमुख विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी बेदम हो गया है। लेकिन, सबसे बड़ी चुनावी मार छोटे दलों पर पड़ी है।

महायुति की लहर में छोटे दलों पर संकट
महाराष्ट्र चुनाव में बहुत ही खराब प्रदर्शन की वजह से राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS),प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA),असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) और मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सामने राज्य में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हुआ है।
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पांच साल में औंधे मुंह गिर गया वोट शेयर
एक समय ये तमाम दल महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत ही प्रभावशाली नजर आते थे और इन्हें दोनों गठबंधनों के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता था। लेकिन, इन तमाम दलों का वोट शेयर 2019 के चुनावों के मुकाबले 2024 में बहुत ही ज्यादा गिर गया है।
वीबीए, बीएसपी का हुआ बुरा हाल
मसलन, 2019 में वीबीए 236 सीटों पर लड़ी थी और उसे 4.57% वोट मिले थे। इस बार पार्टी ने 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे,फिर भी महज 2.7% वोट ही जुटा सकी। इसी तरह से बीएसपी पिछली बार 262 सीटों पर लड़ी थी और उसे 0.92% वोट मिले थे। इस बार पार्टी 237 सीटों पर लड़ी और सिर्फ 0.48% वोट ही जुटा सकी।
राज ठाकरे की एमएनएस का अबतक का सबसे खराब प्रदर्शन
राज ठाकरे की एमएनएस को पिछली बार 1 सीट भी मिली थी। तब वह 101 सीटों पर लड़ी थी और उसका वोट शेयर 2.25% था। लेकिन, इस बार 125 सीटों पर लड़कर भी उसे मात्र 1.55% वोट मिले और एक भी उम्मीदवार नहीं जीता।
ओवैसी की पार्टी के वोट शेयर में भी गिरावट
इन सब में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम जरूर अपनी पीठ कुछ हद तक थपथपा सकती है, क्योंकि वह मुस्लिम-बहुल मालेगांव सेंट्रल सीट मात्र 162 वोट से जीतने में सफल रही है। लेकिन, इस बार पार्टी का वोट शेयर गिरकर 0.85% रह गया है।
यह 16 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। अगर 2019 के चुनावों से तुलना करें तो ओवैसी भी सिर पीट रहे होंगे। पार्टी पिछली बार यह न केवल 2 सीटें जीती थी, बल्कि 44 सीटों पर लड़ने के बाद उसका वोट शेयर 1.34% रहा था।
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अब इन पार्टियों के सामने चुनौती ये है कि इनमें से कुछ का महाराष्ट्र में चुनाव निशान छिन सकता है। अधिकारियों का कहना है कि नियम स्पष्ट है, अगर किसी दल की मान्यता रद्द कर दी जाती है तो, उसे पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल घोषित किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि एमएनएस के सामने क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा खत्म होने का खतरा है और इससे रेलवे इंजन वाला इसका चुनाव निशान भी छिन सकता है।












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