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Maharashtra New CM: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के पद को लेकर इतना शांत क्यों है BJP नेतृत्व, ये वजह तो नहीं?

Maharashtra New CM: महाराष्ट्र में बीजेपी की ओर से नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तारीख बताई जा चुकी है, जो कि 5 दिसंबर है। लेकिन, अबतक पार्टी नेतृत्व की ओर से नया मुख्यमंत्री कौन होगा, इस रहस्य से पर्दा नहीं उठाया जा रहा है। हालांकि, आम भावना यही दिख रही है कि आखिरकार देवेंद्र फडणवीस को ही यह जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन सवाल है कि फिर इसको लेकर इतनी चुप्पी क्यों बरती जा रही है?

महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति को 288 में से 235 सीटें मिली हैं। लेकिन,मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह अभी भी सवाल ही बना हुआ है। राज्य में बीजेपी को अकेले 132 सीटें मिली हैं, लेकिन फिर भी इसके नेतृत्व ने अबतक सीएम पद को लेकर जो शांति बरती हुई है,वह चौंकाने वाली है।

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फडणवीस से मिलकर शुभकामनाएं दे रहे हैं विधायक
जबसे कार्यपालक मुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो एकनाथ शिंदे ने खुद को सीएम की रेस से एक तरह से पीछे किया है,देवेंद्र फडणवीस से 200 से ज्यादा विधायक निजी तौर पर मिलकर उन्हें बधाइयां दे चुके हैं। इन नेताओं में एकनाथ शिंदे सरकार के कई कैबिनेट मंत्री भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर छगन भुजबल, दिलिप वाल्से पाटिल और गुलाबराव पाटिल का नाम लिया जा सकता है, जो कि शिंदे के बहुत ही भरोसेमंद चेहरे हैं।

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बीजेपी विधायक दल की बैठक में देरी का राज?
बीजेपी की ओर से अबतक सिर्फ यही कहा गया है कि नए मुख्यमंत्री का नाम पार्टी विधायक दल की बैठक के बाद घोषित किया जाएगा, जो कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में होगी। लेकिन, हैरानी की बात है कि चुनाव नतीजे आने के 10 दिन होने को हैं, लेकिन पार्टी की यह महत्वपूर्ण बैठक नहीं हो सकी है। जबकि, यह लगभग तय है कि जो भाजपा विधायक दल का नेता होगा, वही महाराष्ट्र का नया सीएम बनेगा।

क्या इस वजह से बीजेपी नेतृत्व नए सीएम के नाम पर शांत है?
दरअसल, लग रहा है कि बीजेपी की ओर से देरी के पीछे इसकी संख्या गणित है। बीजेपी के पास अकेले कुल 138 (BJP+) विधायक हैं। यह बहुमत के जादुई आंकड़े से सिर्फ 8 कम है। ऐसे में लग रहा है कि पार्टी नेतृत्व राजनीतिक वजहों से समय ले रहा है और वह चाहता है कि आखिरी वक्त में नए सीएम के नाम की घोषणा हो, जो कि उसकी ओर से कई बार किया भी जा चुका है। यह शिवसेना और एनसीपी जैसे सहयोगी दलों को नए जमीनी हालात से वाकिफ कराने की एक रणनीति भी हो सकती है।

खुद फडणवीस जो राज्य में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं और उन्हें ही अगला संभावित मुख्यमंत्री बताया जा रहा है, वह भी चुनाव नतीजों के बाद से इस मुद्दे पर ज्यादा मुखर नहीं हैं। वे कह रहे हैं कि सही समय पर लोगों को नए मुख्यमंत्री के बारे में पता चल जाएगा। जबकि, उनसे मुलाकात करने वाले नव-निर्वाचित विधायकों का उनके घर पहुंचने का सिलसिला जारी है।

नव-निर्वाचित विधायकों के स्वागत में जुटे हैं फडणवीस
अबतक फडणवीस ने सिर्फ इतना ही किया है कि जो भी विधायक उनसे मिलने उनके घर पहुंच रहा है, वह उसका मराठी संस्कृति के हिसाब से स्वागत कर रहे हैं। मतलब, शॉल, श्रीफल (नारियल) और मिठाइयां देकर उसका सम्मान कर रहे हैं। फडणवीस और उनके परिवार वाले खुद ही हैरान हैं कि उनके नाम की घोषणा भी नहीं हुई है और लोग उसी अंदाज में मिलने पहुंच रहे हैं, जैसे कि उनका नाम तय हो चुका है। जबकि, भाजपा में आखिरी वक्त में कुछ भी हो सकता है।

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शिंदे को पर्याप्त समय देना चाहता है बीजेपी नेतृत्व!
लेकिन, अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी लग रहा है कि सही समय आ चुका है और फडणवीस के नाम की औपचारिक घोषणा हो जानी चाहिए। क्योंकि, बीजेपी नेतृत्व एकनाथ शिंदे की नाम पर मुहर लगाएगा, इसकी संभावना नहीं लग रही है।

शायद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व शिंदे को जमीनी हालात और मौजूदा परिस्थितियों को समझने, परखने और उसे आत्मसात कर लेने का पर्याप्त समय देना चाहता है, ताकि अगर उनके मन में कुर्सी का कोई मोह रह गया हो तो उसे खत्म होने में आसानी रहे!!!

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