Maharashtra Chunav: 10 लाख वोटरों के सामने क्यों खड़ा हुआ संकट, मतदान से रह सकते हैं वंचित
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में इस साल मतदान की तारीख और गन्ने की पेराई का सीजन आपस में मिल रहा है। इसकी वजह से राज्य के कई जिलों के 10 लाख से ज्यादा कामगारों और मजदूरों को मतदान से वंचित रहना पड़ सकता है। मतदान की तारीख और गन्ना पेराई का सीजन न टकराए, इसके लिए काफी कोशिशें भी की गईं, लेकिन आखिरकार अभी तक बात नहीं बन पाई है।
महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 20 नवंबर को मतदान होना है। लेकिन, राज्य में इस साल गन्ने की पेराई का सीजन भी इस समय में ही पड़ रहा है। इसका असर राज्य के नंदुरबार, धुले, बीड, परभणी और जलगांव जिलों के 10 लाख मतदाताओं पर पड़ने की आशंका है, जिनका वोट डालने के लिए मतदान के दिन अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचना मुश्किल है।

चुनाव आयोग और हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
महाराष्ट्र सरकार की एक मंत्रिस्तरीय समिति ने चुनाव तारीखों की घोषणा से काफी पहले ही प्रदेश में 15 नवंबर से गन्ना पेराई की शुरुआत होने का एलान किया था। राज्य सरकार ने भी चुनाव आयोग से गुजारिश की थी। बाद में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ सुगरकेन कटर्स एंड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट भी पहुंचा।
वोटरों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने की मांग की गई
बॉम्बे हाई कोर्ट से यह मांग की गई थी कि या तो चुनाव आयोग चुनाव के दिन इन कामगारों को उनके मतदान केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था करवाए या फिर उनका उनके काम वाली जगह पर ही मतदान का इंतजाम करवाए। लेकिन, हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की तारीख चार हफ्ते बाद के लिए तय कर दी।
ग्रामीण इलाकों के वोटरों की वजह से फर्जी मतदान की भी बढ़ी आशंका
याचिका दायर करने वाले संगठन के अध्यक्ष जीवन हरिभाउ राठौड़ को आशंका है कि इतनी बड़ी तादाद में जो गांव वाले अपने मतदान केंद्रों से चुनाव के दिन दूर रहेंगे तो कहीं उनकी जगह वोगस वोटिंग का फायदा न उठा लिया जाए।
मजदूरों के लिए जीविकोपार्जन पहली प्राथमिकता
जहां तक श्रमिकों की बात है तो उनकी पहली प्राथमिकता उनका जीविकोपार्जन है, क्योंकि इसी के भरोसे उनका परिवार है। एक ऐसे ही श्रमिक ने बताया, उनकी पूरी अर्थव्यवस्था इसी कटाई के सीजन के भरोसे टिकी हुई है।
लेकिन, इतनी बड़ी तादाद में मतदाताओं का मताधिकार से वंचित रह जाना, लोकतंत्र की पवित्रता के लिए सही नहीं है। यही वजह है कि खासकर महाराष्ट्र के सांगली जिले में यह एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। महाराष्ट्र में 23 नवंबर को वोटों की गिनती होनी है।












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