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Maharashtra Chunav: विदर्भ में कांग्रेस और बीजेपी में इसबार किसका पलड़ा भारी?

Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में इसबार भी कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही मुख्य मुकाबला होने की संभावना दिख रही है। यह इलाका कभी कांग्रेस का गढ़ था। लेकिन, 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की वजह से यह भाजपामय होना शुरू हो गया। लेकिन, पिछले लोकसभा चुनाव ने यहां बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बजा दी थी और इस वजह से इसबार का चुनाव बीजेपी के लिए चुनौती बनकर उभरा है।

पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और उसकी महा विकास अघाड़ी (MVA) के सहयोगियों ने विदर्भ क्षेत्र की 10 में से 7 सीटें जीतकर बीजेपी के जनाधार में सेंध लगाने का काम किया था। इस बार के चुनाव में भी इस क्षेत्र से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने कई दिग्गज नेताओं को इसी इलाके से उतारने जा रहे हैं।

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विदर्भ क्षेत्र से बीजेपी और कांग्रेस के कई दिग्गज लड़ रहे हैं चुनाव
बीजेपी की ओर से विदर्भ में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार दिखेंगे तो कांग्रेस पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार पर भी यहीं से दांव लगाएगी। ये सारे बड़े नेता हैं, इसलिए अपनी-अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की भी जिम्मेदारी इन्हीं की है।

विदर्भ में 2014 वाला प्रदर्शन दोहरा सकेगी बीजेपी?
2014 के विधानसभा चुनाव में विदर्भ में भाजपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा था। लेकिन, 2019 के विधानसभा चुनाव से उसकी लोकप्रियता का रंग यहां फीका पड़ने लगा। 2014 में पार्टी यहां से 44 सीटें जीती थी, जो कि 2019 में घटकर सिर्फ 33 रह गई। जबकि, कांग्रेस और उसकी सहयोगी एनसीपी की सीटें बढ़नी शुरू हो गईं। कांग्रेस अकेले 15 सीट जीत गई।

विदर्भ क्षेत्र के मतदाताओं के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
इस बार का समीकरण और भी उलट-पुलट हो चुका है। शिवसेना और एनसीपी दोनों आधी-अधूरी रह गई है। जानकारों की मानें तो इससे इलाके के मतदाताओं के बीच एक असमंजस का माहौल पैदा हो सकता है। माना जा रहा है कि विदर्भ के मतदाताओं के बीच किसानों की दिक्कतें, महंगाई और बेरोजगारी बड़ा मुद्दा हो सकता है। इसके अलावा जातिगत समीकरण भी राजनीतिक दलों का सियासी भाग्य तय करने जा रहे हैं।

भाजपा के लिए ज्यादा चुनौती इस वजह से है, क्योंकि लोकसभा चुनावों में इस क्षेत्र में उसका प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा। पार्टी यहां की 10 में से सिर्फ 3 ही सीटें जीत सकी है। ऊपर से केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर उसकी सरकार होने की वजह से जवाबदेही भी ज्यादा बनती है।

भाजपा नेताओं को विदर्भ में बेहतर प्रदर्शन का भरोसा
हालांकि, भाजपा के नेताओं को यकीन है कि पार्टी अपना बेहतर प्रदर्शन करके दिखाएगी। आरएसएस से जुड़े रहे एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने टीओआई से कहा, 'हम मुद्दा आधारित राजनीति, विशेष रूप से समाज कल्याण और विकास के कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो लोगों की जरूरतों से मेल खाते हैं।'

लोकसभा चुनाव वाले माहौल के भरोसे कांग्रेस के नेता
उनका दावा है कि बीजेपी का जनाधार अभी भी मजबूत है और लोकसभा चुनावों के बाद लोग अपनी पसंद पर फिर से विचार करेंगे, जिससे मतदान का प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेताओं को लगता है कि लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी उनकी दाल गलनी तय है।

मसलन, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे को यकीन है कि एमवीए (महा विकास अघाड़ी) इस इलाके में लोकसभा चुनाव वाला ही प्रदर्शन दोहरा पाने में सफल रहेगा। उन्होंने कहा, 'लाडली बहिन योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से वोटरों को लुभाने की मौजूदा सरकार की कोशिशों के बावजूद एमवीए गठबंधन अनुकूल स्थिति में है।' इन्हें लगता है कि खासकर विदर्भ में बीजेपी के दिन गुजर चुके हैं।

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