Maharashtra Election Result 2024: मराठवाड़ा में MVA मराठा आरक्षण, जातिगत जनगणना का वादा क्यों नहीं आया काम?
Maharashtra Election Result 2024: महाराष्ट्र महायुति से लगातार पिछड़ता महाविकास अघाड़ी गठबंधन अब स्पष्ट रुप से विपक्ष की भूमिका में दिखने लगा है। रुझानों और परिणामों को देखते महाराष्ट्र में महायुति की सरकार बनती दिख रही है। ऐसे में सवाल एमवीए के उन वादों को जिक्र हो रहा है, जिसके दम पर गठबंधन में शामिल दलों के नेता महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा कर रहे थे। खासकर जिक्र अगर मराठवाड़ा क्षेत्र का करें तो यहां एमवीए का मराठा आरक्षण का वादा काम नहीं आया। वहीं पूरे महाराष्ट्र में जातिगत जनगणना का वादा भी नाकाम रहा।
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में महायुति को 37 सीटें मिलती दिख रही हैं। बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गठजोड़ ने कमाल कर दिया। जबकि एमवीए को महज 11 सीटें मिलती दिख रही हैं। हालांकि यहां एमवीए में मराठा वर्ग को लुभाने के पुरजोर कोशिश की। जतिगत जनगणना का वादा या फिर मराठा आरक्षण का वादा हो सब का सब धरा रह गया।

हालांकि इससे पहले 2019 विधानसभा चुनाव में मराठवाड़ा की 46 सीटों में बीजेपी-शिवसेना (अविभाजित) गठबंधन मजबूत स्थिति में रहा। पिछले चुनाव में बीजेपी शिवसेना का गबंधन को 28 सीटें हासिल हुई थी, जिसमें बीजेपी ने 16 और शिवसेना ने 12 सीटें अपने नाम की थी। कांग्रेस और एनसीपी ने आठ-आठ सीटें और दो सीटें अन्य दलों ने जीती थी। 2014 चुनाव में मराठवाड़ा की 46 सीटों में से बीजेपी 15, शिवसेना 11, कांग्रेस 9, एनसीपी 8 और अन्य को 3 सीटें मिली थी।
बीजेपी और शिवसेना ने मराठवाड़ा की सीटों पर कब्जा जमाकर महाराष्ट्र की सत्ता अपने नाम कर ली थी, लेकिन साल 2023 से ही मराठा आंदोलन के चलते सियासी समीकरण बदल चुके हैं। हालांकि बीजेपी के क्रेज यहां कम नहीं हुआ है। इस बार बीजेपी शिवसेना और एनसीपी गठबंधन को 37 सीटें मिल रही हैं।
मराठा में एवीएम का वादा क्यों फेल?
एमवीएम को लेकर चुनाव से पहले टूटने के कई बार दावे किए गए। हालांकि शरद पवार, राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे डैमेज कंट्रोल में जुटे रहे। पार्टियों के बंटवारे और गठबंधन के कारण कई सीटों पर ताकतवर उम्मीदवारों को भी उनकी पार्टी ने टिकट नहीं दिए। ऐसे में गंवराई सीट पर एनसीपी अजीत गुट से विजय पंडित हैं, तो शिवसेना उद्धव गुट से उनके चाचा बादाम राव पंडित मैदान में हैं। दोनों ही मराठा हैं। भाजपा के मौजूदा विधायक लक्ष्मण पंवार को गठबंधन के कारण टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने भी ताल ठोंक दी। माजलगांव सीट से 4 बार के विधायक प्रताप सोलंकी को इस बार शरद पवार पवार नहीं बल्कि अजीत गुट से मौका मिला। इसके अलावा शरद गुट से मोहन जगताप रहे, तो भाजपा के खाते में सीट न आने के कारण रमेश आडसगर बागी होकर मैदान में उतरे। ऐसे में महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के दो गुटों के बीच टकराव के चलते नए चुनावी समीकरण ने सीधा एमवीए के फायदा पहुंचा दिया। ऐसे में एमवीए के लुभावने वादे धरे के धरे रह गए।












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