Maharashtra Chunav: ओबीसी वोट के भरोसे है महायुति गठबंधन, कैसे RSP के महादेव जानकर दे रहे हैं टेंशन?
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में बीजेपी की अगुवाई वाला महायुति गठबंधन हरियाणा की राह चलने की कोशिश में है। मतलब यहां गैर-मराठा ओबीसी गोलबंदी की कोशिशें जारी हैं। लेकिन, वहां इसके पूर्व सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष (RSP) ने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी सुप्रीमो महादेव जानकर ने राज्य की सभी 288 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है।
आरएसपी एक ओबीसी वोट बैंक आधारित पार्टी है और इससे सबसे ज्याद महायुति गठबंधन को ही नुकसान होने की आशंका है। हरियाणा में बीजेपी ने गैर-जाट ओबीसी जातियों की गोलबंदी करके चुनाव जीता है। लगभग, उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में उसका महायुति गठबंधन गैर-मराठा ओबीसी वोटरों पर फोकस करने की रणनीति अपना रहा है।

RSP के महादेव महायुति को कैसे दे रहे हैं टेंशन?
लेकिन, राष्ट्रीय समाज पक्ष के नेता ने हाल ही में गठबंधन छोड़ने के बाद जो तेवर दिखाए हैं, उससे विपक्षी एमवीए की राह आसान हो सकती है। देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री पद संभाल चुके महादेव जगन्नाथ जानकर का कहना है कि इस चुनाव में उनकी पार्टी न तो महायुति का हिस्सा होगी और न ही उनका एमवीए के साथ किसी तरह के तालमेल का इरादा है।
उनका कहना है कि अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए विधानसभा चुनाव ही सर्वश्रेष्ठ प्लेटफॉर्म है, इसलिए उनकी पार्टी ने अकेले ही सभी सीटों पर चुनाव लड़ना तय किया है।
जानकर ने टीओआई को बताया है, 'महाराष्ट्र में मेरी पार्टी सभी 288 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। अबतक हमने 242 सीटें तय कर लिए हैं। कुछ दिनों में हम बाकी बची सीटों पर भी फैसला कर लेंगे। अब समय आ गया है कि हम अपनी पार्टी का विस्तार करें और विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को शामिल करें।'
परभणी लोकसभा से लड़ चुके हैं महायुति की ओर से चुनाव
लोकसभा चुनावों से पहले आरएसपी को महायुति और एमवीए दोनों ने अपने पाले में रखने की कोशिश की थी। उनकी शरद पवार से भी बात हुई थी। लेकिन, आखिरकार उन्होंने महायुति में शामिल होना बेहतर समझा और उन्हें एनडीए उम्मीदवार के तौर परभणी लोकसभा सीट भी दी गई। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके लिए रैली की। हालांकि, जानकर ने वहां 4,67,282 वोट जुटाए, लेकिन उद्धव ठाकरे की शिवसेना से हार गए।
विधानसभा चुनाव में महायुति से भाव नहीं मिलने का दावा
उन्होंने कहा, 'लोकसभा चुनावों के दौरान महायुति ने मुझे पूरा सम्मान दिया। लेकिन, जब गठबंधन के सहयोगी विधानसभा चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे पर चर्चा कर रहे थे, तब उन्होंने मेरी पार्टी को कोई अहमियत नहीं दी। जब यह महसूस हुआ कि मेरे लिए गठबंधन में सीमित संभावनाएं हैं, मैंने निकलने का फैसला कर लिया।'
ओबीसी समुदाय के नेता हैं महादेव जगन्नाथ जानकर
जानकर भले ही लोकसभा चुनाव में महायुति के उम्मीदवार होने के बावजूद हार गए हों, लेकिन उनका ओबीसी समुदाय पर अच्छी पकड़ है, ऐसा माना जाता है। 2014 में उन्होंने बारामती में एनसीपी (एससीपी) नेता सुप्रिया सुले को भी कड़ी टक्कर दी थी।
ओबीसी वोट के बंटवारे की आशंका से महायुति में टेंशन
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने उनके फैसले को लेकर कहा है, 'ऐक्टिविस्ट मनोज जारंगे महायुति उम्मीदवारों के खिलाफ मराठा समुदाय को एकजुट करने को लेकर काफी मुखर हैं और हमारे सहयोगियों को ओबीसी वोट एकजुट करने की जरूरत है। लेकिन, जानकर के फैसले से कुछ दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वोटों के संभावित बंटवारे की वजह से गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान न पहुंचे।'
लोकसभा चुनाव में महादेव नहीं दिला पाए महायुति को फायदा
वैसे लोकसभा चुनावों के लिए महायुति ने राष्ट्रीय समाज पक्ष से गठबंधन यही सोचकर किया था कि इससे उसे ओबीसी वोटों का फायदा मिलेगा। लेकिन, परभणी में खुद महादेव भले ही दूसरे नंबर पर रहे हों, लेकिन उनकी मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस और एमवीए के 'बीजेपी आरक्षण खत्म कर देगी' वाले दावे की वजह से ओबीसी वोट उनके पक्ष में जाने से नहीं रोक पाए।
ऐसे में उनके अकेले चुनाव मैदान में उतरने से महायुति के लिए यह दुविधा बढ़ गई है कि इसका कितना असर होगा, क्योंकि ओबीसी वोट बैंक को सहेजने के लिए गठबंधन ने हाल के दिनों में तमाम सारी गोटियां सेट करने की कोशिशें की हैं।












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