Maharashtra Chunav: महायुति ने OBC, ऊंची जातियों, अल्पसंख्यकों के लिए कैसे अपनाई हरियाणा वाली रणनीति?
Maharashtra Chunav 2024: महाराष्ट्र में बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन को लोकसभा चुनावों में यूपी के बाद सबसे तगड़ा झटका लगा था। इसलिए सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पूरी रणनीति ही बदल दी है। भाजपा को हरियाणा चुनाव में जिस रणनीति का फायदा मिला है, उसपर महाराष्ट्र में भी यह सोचकर अमल किया गया है कि आखिरकार 23 नवंबर को यह गठबंधन के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।
लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) ने जहां 48 में से 30 सीटें जीत ली थीं। वहीं भाजपा की अगुवाई वाले महायुति को सिर्फ 17 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। सबसे बड़ी चोट बीजेपी को लगी थी, जो 28 सीटों पर लड़कर भी सिर्फ 9 ही जीत सकी थी।

महाराष्ट्र में महायुति का गैर-मराठा वोट बैंक पर फोकस
लोकसभा चुनाव में जो नतीजे आए, उससे लगा कि भाजपा का मजबूत आधार ओबीसी वोट बैंक उससे दूर हो गया है। जबकि, इसके ठीक उलट मराठा, दलित और मुस्लिम वोट बैंक विपक्षी एमवीए के पक्ष में पूरी तरह से गोलबंद हो गया।
विधानसभा चुनावों में फिर से ऐसी नौबत न आ जाए, इसके लिए बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी की महायुति सरकार ने गैर-मराठा समुदायों का वोट लेने के लिए पूरा जोर लगा दिया है।
हरियाणा से लेकर सीख, महाराष्ट्र में एमवीए का गेम ओवर करने की तैयारी!
हरियाणा में भी बीजेपी ने गैर-जाट 36 बिरादरियों के साथ-साथ अन्य समुदायों पर फोकस किया था और इसके दम पर एक तरह से कांग्रेस के मुंह से जीत छीनने में सफल हो गई। लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में एमवीए का जो शानदार प्रदर्शन रहा, उसके पीछे मराठा वोटरों को एक बहुत बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।
आज भी मराठा बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति सरकार से उसी तरह से नाराज बताए जाते हैं, जैसा कि हरियाणा में कथित तौर पर जाटों के लिए दावे किए जा रहे थे।
महाराष्ट्र में ओबीसी, ऊंची जातियों और अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिए योजनाओं की झरी
महाराष्ट्र में खास तौर पर ओबीसी समुदाय के बीच फिर से जनाधार जुटाने के लिए महायुति सरकार ने चुनाव तारीखों के एलान से करीब दो हफ्ते पहले 100 से ज्यादा योजनाओं की घोषणाएं कीं।
इन योजनाओं में कई कल्याणकारी कार्यक्रम सिर्फ पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को ध्यान में रखकर घोषित किए गए। बीजेपी ने हरियाणा में भी यही रणनीति अपनाई थी और वह वहां तीसरी बार और सबसे ज्यादा बहुमत से सरकार बनाने में सफल रही।
बीजेपी की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने ओबीसी वोट बैंक को ध्यान में रखकर पिछले दिनों जो फैसले लिए उनमें 7 जातियों और उनकी उपजातियों को ओबीसी सेंट्रल लिस्ट में शामिल करने की सिफारिश भी शामिल है।
यही नहीं राज्य सरकार ने 50 से ज्यादा सरकारी निगम स्थापित करने जैसा भी कदम उठाया है, जिससे विशेष रूप से ब्राह्मणों, आर्य व्यास और तेली, लोनारी जैसी ओबीसी जातियों के लिए फायदेमंद है।
दलित-आदिवासियों के लिए भी लिए गए बड़े फैसले
यही नहीं, महायुति सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजातियों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए गोर बंजारा समुदाय के प्रमुख नेता धर्मगुरु बाबुसिंह महाराज राठौर को विधान परिषद के सदस्य के रूप में मनोनीत करने जैसा कदम उठाया है।
दलित वोट बैंक में विपक्षी दलों के प्रभाव को कम करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार ने दलित-बौद्ध सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए भी अनुदानों की घोषणा की है।
इसी तरह से 'लाडका भाऊ योजना' और 'लड़की बहिन योजना' शुरू करके भी महायुति गठबंधन ने शहरी वोटरों, खासतौर पर युवाओं और महिलाओं के बीच अपना जनाधार बढ़ाने के उपाय निकाले हैं। इसी तरह ब्राह्मण छात्रों के लिए 50 करोड़ रुपए का फंड और राजपूतों और जैन समुदाय के लिए आर्थिक कल्याण बोर्ड का गठन भी सत्ताधारी गठबंधन की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
मुस्लिम-अल्पसंख्यक वोट बैंक में भी सेंधमारी की कोशिश!
इतना ही नहीं, सत्ताधारी गठबंधन ने विपक्ष के मुस्लिम-अल्पसंख्यक वोट बैंक में भी सेंध लगाने की पहल में कोई कमी नहीं छोड़ी है। राज्य सरकार ने चुनाव तारीखों की घोषणा से पहले मदरसा टीचरों की सैलरी बढ़ा दी और मौलाना आजाद अल्पसंख्यक वित्त विकास निकम का बजट भी बढ़ा दिया।
माना जा रहा है कि इन फैसलों से विशेष रूप से बीजेपी और शिवसेना की सहयोगी अजित पवार की एनसीपी को मौजूदा चुनावों में ज्यादा फायदा मिल सकता है। 288 सीटों वाले महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव 20 नवंबर को होगा और 23 नवंबर को वोटों की गिनती के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।












Click it and Unblock the Notifications