Maharashtra Election: बीजेपी या कांग्रेस, विदर्भ में जातीय समीकरण साधने में कौन निकला आगे?
Maharashtra Election 2024: महाराष्ट्र की 288 सीटों में से 62 विदर्भ इलाके में हैं। इन सीटों पर मतदाताओं का झुकाव चुनावों के अंतिम नतीजे पर बहुत असर डालन वाले हैं। यह ओबीसी-वोटर बहुल इलाका है। जाहिर है कि यहां का जातीय गणित बहुत ही अहम है और मूल रूप से बीजेपी और कांग्रेस पार्टी ने इस समीकरण को साधने के लिए अपनी ओर से तमाम कोशिशें की हैं।
माना जा रहा है कि अंतिम नतीजे आने के बाद वही पार्टी मुस्कुराते दिखेगी, जो इस जातीय समीकरण को साधने में प्रभावी रहेगी। विदर्भ की 62 सीटों में से 12 अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। यानी बाकी 50 सीटों पर ही जातीय गणित से चुनावों में हार और जीत तय होने वाला है।

कांग्रेस पार्टी जातीय समीकरण बिठाने में पिछड़ी!
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अपनी हर रैली और चुनावी सभा में जातीय जनगणना,आरक्षण की सीमा बढ़ाने के दावे करते हैं। लेकिन, कांग्रेस पार्टी ने उम्मीदवारों का जो चुनाव किया है, वह कुछ अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है।
जहां तक बीजेपी और उसकी अगुवाई वाले महायुति की बात है तो इसने क्षेत्र की सामाजिक समीकरण के हिसाब से ही प्रत्याशियों का चयन किया है। जहां कांग्रेस कुनबी जैसी प्रभावशाली ओबीसी बिरादरी को सीमित प्रतिनिधित्व दिया है, बीजेपी और महायुति इस मामले में उससे काफी आगे निकल गई है।
बीजेपी ने ओबीसी वोट बैंक के लिए बनाई ठोस रणनीति
बीजेपी ने सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित सीटों में 19 पर अकेले कुनबी जाति के उम्मीदवारों पर ही दांव लगाया है। भाजपा की रणनीति क्षेत्र के जातीय समीकरण को देखते हुए काफी प्रभावी माना जा रहा है। इसकी तुलना में कांग्रेस जातीय गणित बिठाने में पिछड़ती नजर आई है।
कुछ सीटों पर कांग्रेस के दिग्गजों की भी फंस सकती है सीट!
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुनबी समुदाय के लोगों को लगता है कि जिन इलाकों में उनकी ज्यादा जनसंख्या है, वहां संपर्क बढ़ाने में भाजपा की रणनीति प्रभावी साबित हो रही है। इसके चलते कुछ सीटों पर कांग्रेस के दिग्गजों की भी परेशानी बढ़ती नजर आ रही है।
मसलन, भंडारा जिले की साकोली सीट से भाजपा ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के खिलाफ कुनबी जाति के अविनाश ब्राह्मणकर को मौका दिया है। इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान कुनबी जाति के लोगों ने जिस तरह से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन दिखाया है, उसकी वजह से पटोले की सीट फंसी हुई बताई जा रही है।
इसी तरह से ब्रह्मपुरी में कृष्ण लाल सहारे विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। यहां कुनबी बिरादरी के समर्थन से उनकी उम्मीदवारी मजबूत हुई है। इस क्षेत्र की अनेकों सीटों पर यही समीकरण काम करता नजर आ रहा है।
विदर्भ की सबसे बड़ी ओबीसी जाति है कुनबी
बता दें कि कुनबी समाज विदर्भ की सबसे बड़ी ओबीसी जाति है। इनका इलाके में बहुत प्रभावी सियासी प्रभाव है। इनके बाद तेली, माली और पोवार समुदाय का रोल माना जाता है। भाजपा ने लोकसभा चुनावों के बाद से लगातार ओबीसी समीकरण साधने में अपना पूरा दम लगाया है।
कांग्रेस की क्यों बढ़ सकती है चुनौती?
कुनबी बिरादरी की ओर से शिकायत है कि कांग्रेस ने उनके प्रतिनिधित्व को अहमियत नहीं दी है। समुदाय के नेताओं की ओर से उसके दावों पर सवाल भी उठाए गए हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस बात का खंडन किया गया है कि उसने ओबीसी उम्मीदवारों को अहमियत नहीं दी है।
पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे का दावा है कि उसने विदर्भ क्षेत्र में ओबीसी प्रत्याशियों को तबज्जो दी है। हालांकि, अपने दावे के समर्थन में उनके पास कोई ठोस आंकड़े का अभाव नजर आया है।
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