महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार बारामती से चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं, बेटे को आगे लाने के दिए संकेत
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने हाल ही में बारामती विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने में अपनी अनिच्छा व्यक्त की है। उन्होंने संकेत दिया कि उनके बेटे जय पवार को उनकी जगह पर चुनाव लड़ने पर विचार किया जा सकता है। अजित पवार ने कहा कि मुझे इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। क्योंकि मैं 7-8 चुनावों का हिस्सा रहा हूं। अगर लोग और पार्टी कार्यकर्ता इस तरह से सोचते हैं तो संसदीय बोर्ड को इस बारे में सोचना चाहिए। अगर संसदीय बोर्ड और स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता ऐसा चाहते हैं तो हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं।
अजित पवार 1995 से बारामती विधानसभा सीट पर काबिज हैं और इसके बाद के चुनावों में कई बार फिर से चुने गए हैं। अभी वे महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले सरकारी योजनाओं का प्रचार करने के लिए राज्यव्यापी दौरे पर हैं। बारामती से उनका लंबे समय से जुड़ाव स्थानीय राजनीति के लिए इस संभावित बदलाव को महत्वपूर्ण बनाता है।

इस हफ्ते की शुरुआत में अजित पवार ने माना कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती से सुप्रिया सुले के खिलाफ अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारकर उन्होंने गलती की है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी सभी बहनों से प्यार करता हूँ। राजनीति को घर में घुसने नहीं देना चाहिए। मैंने अपनी बहन के खिलाफ सुनेत्रा को मैदान में उतारकर गलती की। ऐसा नहीं होना चाहिए था। लेकिन संसदीय बोर्ड ने फैसला किया। अब मुझे लगता है कि यह ग़लत था।
इस फैसले के बाद शरद पवार की अगुआई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में फूट पड़ गई। अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट ने सुप्रिया सुले के गढ़ बारामती को चुनौती देते हुए सुनेत्रा पवार को अपना उम्मीदवार घोषित किया।
एनसीपी के अंदरूनी कलह के बावजूद सुप्रिया सुले ने अपनी बारामती लोकसभा सीट को बड़े अंतर से बरकरार रखा। उन्हें 7,32,312 वोट मिले। जबकि सुनेत्रा पवार को 5,73,979 वोट मिले। इस तरह वे 1.55 लाख से ज़्यादा वोटों से जीतीं।
इस जीत ने सुप्रिया सुले की स्थिति को मजबूत किया और बारामती के मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता को दर्शाया। चुनाव परिणामों ने एनसीपी के भीतर अजित पवार के गुट के सामने आने वाली चुनौतियां भी सामने आई।
अब अजित पवार बारामती से चुनाव लड़ने से पीछे हटने और अपने बेटे जय को राजनीति में उतारने पर विचार कर रहे हैं। यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक करियर और एनसीपी के भीतर भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण चरण है।
आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण होंगे कि पार्टी का यह आंतरिक निर्णय राज्य में मतदाताओं की भावना और समग्र चुनाव परिणामों को किस तरह प्रभावित करता है।












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