महाराष्‍ट्र सीएम शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट पर किया वार, बोले- वे बालासाहेब की विचारधारा के 'गद्दार' हैं

शिवसेना के स्‍थापना दिवस पर महाराष्‍ट्र सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्व ठाकरेगुट पर जमकर हमला बोला।

शिवसेना जो एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद दो धड़ों में बंट चुकी उन दोनों ने ही शिवसेना दिवस मनाया। दोनों ही गुटों ने एक दूसरे पर जमकर हमला बोला।

मुंबई में शिवसेना स्थापना दिवस समारोह पर सीएम एकनाथ शिंदे ने जमकर उद्धव ठाकरे गुट पर वार किया। शिंदे ने कहा हमने धनुष और तीर और शिवसेना के नाम को बचाया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को मुंबई के नेस्को गोरेगांव में शिवसेना स्थापना दिवस समारोह का आयोजन करवाया था।

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इस समारोह मे शिंदे ने कहा सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि पिछले साल उन्होंने जो किया, ऐसा करने के लिए बाघ जैसा साहत चाहित होता है।

उन्‍होंने कहा हमारी सरकार लोगों के कल्याण के लिए काम कर रही है। उन्होंने (उद्धव ठाकरे ने) कहा कि वे 20 जून को 'देशद्रोही दिवस' मनाएंगे, लेकिन वे बालासाहेब की विचारधारा के 'गद्दार' हैं। जिन्होंने विश्वासघात किया मतदाताओं को सहानुभूति नहीं मिलेगी।

शिंदे बोले- मैंने जो किया उसे करने के लिए बाघ जैसा साहत चाहिए

सीएम शिंदे ने कहा आज यहां शिवसेना स्‍थापना दिवस मनाने के लिए एकत्र हुए हैं, मैं आप सभी के समर्थन के लिए आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं। उन्‍होंने कहा हमने जो एक साल पहले किया था उसे करने के लिए बाघ जैसे साहस की जरूरत होती है। शिंदे ने कहा मैं मुख्‍यमंत्री बनने के बाद नहीं बदला हूं।

बता दें शिंदे गुट के कार्यक्रम में होर्डिंग्स पर सीएम की फोटो थी। वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पोस्टरों में दिवंगत बाल ठाकरे, उनके बेटे उद्धव और पोते आदित्य की तस्वीरें थीं।

देवेंद्र ने भी उद्धव ठाकरे को गदृार कहा

वहीं पीएम मोदी के कार्यकाल के 9 साल पूरा होने पर आयोजित कार्यक्रम में महाराश्‍ट्र के उप प्रमुख मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने 2019 के चुनावों में मुख्यमंत्री पद के लिए अपने पूर्व-चुनाव गठबंधन सहयोगी बीजेपी को धोखा दिया। उन्‍होंने कहा वो असली गद्दार विश्वासघाती थे जिसे दूसरों को गद्दार कहने का कोई अधिकार नहीं है ।

शिवसेना की स्‍थापना के समय पार्टी का मूल मंत्र क्‍या था

19 जून, 1966 में जब दिवंगत बाल साहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की, तो यह मराठी मानुषों को एकजुट करने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए सशक्त बनाने का आह्वान था। बाल ठाकरे ने शिवसेना की स्‍थापना के समय मंत्र था 80 फीसदी सामाजिक कार्य, 20 फीसदी राजनीति लेकिन स्‍थापना के 57 साल बाद शिवसेना दो दलों में बंट गई है। उद्धव ठाकरे के पास 16 विधायक और सात सांसद रह गए हैं। जबकि विद्रोह का नेतृत्व करने वाले एकनाथ शिंदे के पक्ष में 40 विधायक और 13 सांसद थे।

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