महाराष्‍ट्र में वोटिंग से पहले राज ठाकरे की MNS को लगा तगड़ा झटका, अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

Maharashtra Civic Poll: महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव की गहमागहमी तेज है, जहां गुरुवार, 15 जनवरी को मतदान होना है। मतदान शुरू होने के ठीक पहले राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा। अदालत ने निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ दायर मनसे की याचिका लौटा दी।

MNS नेता अविनाश जाधव ने आरोप लगाया कि कई प्रत्याशियों ने पैसे और सत्ता का दुरुपयोग कर निर्विरोध चुनाव जीते हैं। उनके अनुसार, यह चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Maharashtra Civic Poll

राज्य में कुल 67 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। मनसे का दावा है कि इनमें से अधिकांश सत्ता पक्ष से जुड़े हैं, जो चुनावी निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है। पार्टी ने उच्च न्यायालय से इन मामलों की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश या सीधी कोर्ट निगरानी में कराने की मांग की थी। साथ ही आग्रह किया कि जांच पूरी न होने तक विजेताओं की घोषणा रोकी जाए, पर कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया।

राज ठाकरे ने चुनाव आयोग की तीखी आलोचना

वहीं दूसरी ओर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग (ईसी) के नए फैसलों पर तीखी आलोचना की है। उन्होंने आयोग व सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए 'सरकार के लिए काम' करने का दावा किया।

राज ठाकरे ने ईसी के उस नए नियम पर आपत्ति जताई है, जो प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद भी उम्मीदवारों को मतदान के दिन तक घर-घर जाकर मतदाताओं से मिलने की अनुमति देता है। उन्होंने सवाल उठाया, 'हमने इतने सालों से चुनाव देखे हैं। प्रचार हमेशा शाम 5 बजे खत्म होकर एक दिन का अंतराल होता था, फिर मतदान। यह नया तरीका कहाँ से आया?'

राज ठाकरे का सवाल यह नई पद्धति आज ही क्यों आई?

मनसे प्रमुख ने आगे सवाल उठाया, 'यह नई पद्धति आज ही क्यों आई? विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह क्यों नहीं थी? मतदाताओं से मिलने की अनुमति तो है, पर पर्चे नहीं बांट सकते। शायद इसका मतलब पैसे बांटना है।' उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह 'छूट' कानून बदलकर दी गई, जिसका उद्देश्य स्पष्ट नहीं है।

इसके अलावा, राज ठाकरे ने 'पाडू' (Printing Auxiliary Unit) नामक एक नई मशीन की शुरुआत पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे किसी राजनीतिक दल को नहीं दिखाया गया और न ही लोगों को इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने मशीन के प्रदर्शन की मांग को लेकर उद्धव ठाकरे द्वारा लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया।

ठाकरे ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यह कौन सी प्रथा है? क्या कानून बदला जा रहा है? सभी को यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या चुनाव आयोग सरकार की इच्छा पूरी कर रहा है?' उन्होंने ईवीएम के पुराने होने का हवाला देते हुए नई 'पाडू' मशीनों पर संदेह जताया, जिनके बारे में राजनीतिक दलों को भी जानकारी नहीं है।

मनसे प्रमुख ने अपने शिवसैनिकों और मनसेसैनकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा, 'उम्मीदवार लोगों से मिल रहे हैं, इस पर ध्यान दें। पैसे कैसे बांटे जा रहे हैं, यह साफ दिख रहा है। भाजपा और शिंदे गुट के पर्चों के भीतर पैसे डालकर दिए जा रहे हैं, जिसे लोग अस्वीकार कर रहे हैं।' यह अच्छी बात है। राज ठाकरे ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सरकार की मदद कर रहा है। उन्होंने पूछा कि यह नया नियम सिर्फ इन चुनावों के लिए क्यों, और विधानसभा या लोकसभा चुनावों में क्यों लागू नहीं हुआ?

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