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Maharashtra Chunav: मुस्लिम-बहुल सीटों पर लोकसभा चुनावों से भी ज्यादा मतदान! किस दिशा में रुझान?

Maharashtra Chunav 2024: मालेगांव विधानसभा सीट महाराष्ट्र का मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। एक आंकड़े के मुताबिक यहां 78% से भी ज्यादा वोटर मुसलमान हैं। लोकसभा चुनाव में यहां जबर्दस्त वोटिंग हुई थी और इस बार वह आंकड़ा भी पार कर जाने की संभावना है। सवाल है कि इस सीट पर भारी मतदान का संकेत क्या है। क्योंकि, लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में बीजेपी हारी थी तो उसमें से वह मालेगांव सेंट्रल के अपने खिलाफ वोटिंग पैटर्न का ही उदाहरण दे रही थी।

मालेगांव सेंट्रल सीट पर बुधवार (20 नवंबर,2024) को हुए मतदान के हमारे पास शाम 6 बजे तक के जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उस हिसाब से यहां 66% वोटिंग हो चुकी थी। लेकिन, जिस तरह से रात 11.30 में जारी महाराष्ट्र के कुल मतदान प्रतिशत का आंकड़ा 65.1% तक पहुंच गया, उससे संभावना है कि मालेगांव सेंट्रल में भी यह आंकड़ा लोकसभा चुनावों में हुई 68% वोटिंग को को पार कर जाएगा।

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मालेगांव सेंट्रल की वजह से धुले लोकसभा जीती कांग्रेस
तथ्य यह है कि लोकसभा चुनावों में मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट पर भारी मतदान की वजह से ही कांग्रेस लोकसभा सीट पर बीजेपी को हराकर जीत गई थी। धुले लोकसभा क्षेत्र में कुल 6 विधानसभा क्षेत्र हैं, उनमें से 5 में भाजपा को भारी बढ़त मिली हुई थी। लेकिन, सिर्फ मालेगांव सेंट्रल सीट पर अकेले कांग्रेस को 1.98 लाख वोट मिल गए और वह बीजेपी से सिर्फ 3,831 वोटों से जीतने में सफल हो गई।

'धर्मनिरपेक्ष ताकतों' की जीत सुनिश्चित करने निकले मुसलमान!
टीओआई ने बुधवार को यहां के मतदाताओं से बात की तो यही बात सामने आई कि वह इतनी बड़ी तादाद में मतदान के लिए इसलिए निकले हैं, ताकि 'धर्मनिरपेक्ष ताकतों' की जीत सुनिश्चित कर सकें। एक ऐसे ही मतदाता जिसने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि 'बेशक, जो जीतेगा हम उससे विकास की भी उम्मीद करेंगे।' लेकिन, उनकी प्राथमिकता बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति को हराने की ही दिखी।

भाजपा 'वोट जिहाद' का उठा चुकी है मुद्दा
लोकसभा चुनावों में मालेगांव सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग पैटर्न को बीजेपी के दिग्गज देवेंद्र फडणवीस तक मुद्दा बना चुके हैं। बीजेपी नेताओं का कहना रहा है कि असल में इस बार के लोकसभा चुनावों में हुआ ये कि पार्टी ज्यादातर विधानसभा सीटों पर भले ही बढ़त बनाए रही,लेकिन,एक या दो विधानसभा सीटों पर एकतरफा वोटिंग हुई और अंतिम नतीजे उसके खिलाफ चले गए।

विकास में पिछड़ा दिखता है मालेगांव सेंट्रल
जहां तक मालेगांव सेंट्रल में मूलभूत सुविधाओं का सवाल है तो शहजाद अली नाम के एक दुकानदार का कहना है, 'गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य में थोड़ी भी दक्कत होने पर नासिक या धुले के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है।'इसी तरह से बीए,बीएड, ग्राफिक डिजाइनिंग की योग्यता रखने वाले फैसल शेख को ऑटो चलाना पड़ रहा है। आसिफ हानिफ नाम के एक कॉलेज छात्र को लगता है कि ज्यादा कॉलेज खोलना और रोजगार पैदा करना समय की मांग है।

वोट खरीदे भी जाते हैं!
कई लोग ऐसे हैं, जिनका कहना है कि यहां विकास के कई काम ठप पड़े हैं। मसलन, शहर में एक फ्लाईओवर पांच वर्षों में भी पूरा नहीं हुआ है। फजलुर रहमान नाम के एक रिटायर्ड शिक्षक का कहना है, 'क्षेत्र के लिए निर्वाचित प्रतिनिधिनियों ने कुछ नहीं किया है। आप सड़कों, गड्ढों, खुले नाले और अतिक्रमणों को देख सकते हैं। साक्षरता का भी अभाव है। कई लोग 500 रुपए से लेकर 1,000 रुपए में अपने वोट बेच देते हैं।'

इस बार इस सीट पर महायुति ने कोई उम्मीदवार ही नहीं दिया है। कांग्रेस, एआईएमआईएम, समाजवादी पार्टी और निर्दलियों में मुकाबला है। लेकिन, मालेगांव सेंट्रल में मुसलमानों का वोटिंग पैटर्न सिर्फ इसी सीट तक सीमित रहा है, यह कहना सही नहीं है। इसलिए 23 नवंबर को पता चलेगा कि इस तरह की रणनीतिक वोटिंग से इस चुनाव में बीजेपी या महायुति को कहां-कहां झटका लग सकता है।

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