Maharashtra Chunav: मराठा आंदोलन और उसके विरोध के गढ़ में भारी मतदान, क्या कहता है शांतिपूर्ण वोटिंग का रुझान?
Maharashtra Chunav 2024: मराठा आरक्षण आंदोलन ने लोकसभा चुनावों में बीजेपी और उसकी अगुवाई वाले महायुति गठबंधन को भारी नुकसान पहुंचाया था। यह मुद्दा विधानसभा चुनावों में भी हावी रहा है। लेकिन, मतदान से ठीक पहले इस आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे पाटिल के बार-बार के यू-टर्न ने लोगों को असमंजस में डाले रखा। लेकिन, जब बुधवार को वहां वोट पड़े तो मतदाताओं ने बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से 77% से ज्यादा मतदान कर दिखाया।
मनोज जारांगे पाटिल ने लंबे समय से जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव को अपने कोटा आंदोलन का केंद्र बनाया हुआ है। यहीं पर उन्होंने बार-बार भूख हड़ताल की है। यह गांव धुले सोलापुर नेशनल हाईवे से कुछ ही किलोमीटर अंदर है। इसी हाईवे पर अंतरवाली सरती से मात्र 2 किलोमीटर दूर वादीगोद्री गांव भी है, जो मराठों को ओबीसी कोटे से आरक्षण दिए जाने के विरोध का केंद्र रहा है।

अंतरवाली सरती और वादीगोद्री दोनों गांवों में भारी मतदान
अंतरवाली सरती और वादीगोद्री दोनों ही गांव जालना जिले के घनसावंगी विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। बुधवार यानी 20 नवंबर, 2024 को इस सीट पर 77% से भी ज्यादा मतदान हुआ है। अगर अंतरवाली सरती मराठों का गढ़ है, तो वादीगोद्री ओबीसी समाज के धानगर जाति बहुल गांव है। यहां की 80% आबादी ओबीसी है, जो मराठों को अपने कोटे से आरक्षण देने के विरोधी हैं।
तनाव हुआ बेसर, शांतिपूर्ण तरीके से हुआ मतदान
जिस तरह से मराठा आरक्षण आंदोलन की अगुवाई जारांगे करते आ रहे हैं, उसी तरह से उन्हें ओबीसी कोटे से आरक्षण देने के विरोध वाले आंदोलन की अगुवाई प्रोफेसर लक्ष्मण हाके करते आ रहे हैं। उन्होंने भी अपने विरोध के लिए दो बार भूख हड़ताल की है। लेकिन, इसकी वजह से जिस तरह से दोनों गांवों के बीच एक तनाव की स्थिति पैदा होती रही है, चुनाव वाले दिन वह पूरी तरह से बेअसर दिखा और अप्रत्याशित तरीके से शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ।
जारांगे अपने समर्थन को लेकर ढुलमुल नीति अपनाते दिखे हैं
विधानसभा चुनाव में शुरू में जारांगे पाटिल ने अपने दम पर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। अनेकों सीटों पर उम्मीदवार भी उतारे थे। लेकिन, नामांकन वापसी के आखिरी दिन अचानक अपने कदम पीछे खींच लिए। उस दिन यह एलान किया कि मराठा अपनी मर्जी से जहां चाहें वोट डाल सकते हैं।
फिर बाद में उन्होंने अपने सुर बदल लिए और साफ तौर पर भाजपा को मराठा आरक्षण का विरोधी बताकर उसे हराने के लिए वोट डालने का आह्वान करते दिखे। फिर जब मतदान का दिन करीब आया तो फिर से सुर-ताल बदलकर महायुति और महा विकास अघाड़ी सबको मराठा आरक्षण का विरोधी बता दिया।
ओबीसी वोट बैंक की गोलबंदी में जुटी रही बीजेपी
वैसे लोकसभा चुनावों में अपनी रणनीति में मात खा चुकी बीजेपी ने इस बार मराठों की नाराजगी की आशंका में ओबीसी जातियों की गोलबंदी पर पूरा ध्यान दिया था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने भी उसकी काफी मदद की है।
मतदान के ठीक पहले तक सियासी गतिविधियों में जुटे रहे जारांगे
मतदान से एक दिन पहले रात को जारांगे से मिलने उनके गांव आने वाले लोगों की लंबी लिस्ट रही। इनमें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पूर्व सांसद और प्रदेश अध्यक्ष सैयद इम्तियाज जलील भी शामिल थे। वह औरंगाबाद पूर्वी सीट से बीजेपी नेता राज्य के आवास मंत्री अतुल सावे के खिलाफ मैदान में हैं।
मतदान वाले दिन यानी बुधवार को एक बार फिर उनसे मिलने आने वालों में काफी लोग थे। इस दौरान उन्होंने फिर कहा कि जो ओबीसी श्रेणी में मराठा आरक्षण देने के समर्थन में हैं, उनकी मदद की जाए और जो इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें मदद न करें।
जालना मराठवाड़ा इलाके में आता है, जहां विधानसभा की 46 सीटें हैं। यहां के लिए जो कुछ एग्जिट पोल के नतीजे आए हैं, उसमें महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच एकतरफा लड़ाई नहीं दिखाई गई है। यानी अब 23 नवंबर को ही पता चलेगा कि 77% से ज्यादा वोटरों ने मतदान में हिस्सा लेकर बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से क्या जनादेश सुनाया है।
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