Maharashtra Chunav: जिनसे वोट नहीं मिलेंगे उनकी भी चिंता! चुनावों में पहली बार क्यों हो रही ये चर्चा

Maharashtra Chunav 2024: इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 'बटेंगे तो कटेंगे', 'उलेमाओं की मांग', 'फतवों' की गूंज बहुत ही ज्यादा सुनाई दे रही है। लेकिन, इस चुनावी चकल्लस के बीच कुछ सकारात्मक चीजें भी हो रही हैं, जिसकी धमक अब महसूस की जा रही है। यह मामला है, इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव के समाधान का। शायद भारत के हालिया चुनावी इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि इस गंभीर विषय को गंभीरता से उठाया गया है और सकारात्मक उपाय निकालने का भरोसा दिया जा रहा है।

बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जो अपना संकल्प पत्र या घोषणापत्र जारी किया है, उसमें राज्य में इंसान और जानवरों के संघर्ष की बढ़ती समस्या के समाधान का वादा किया गया है। इस सकारात्मक पहल की काफी प्रशंसा हो रही है।

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मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान का दिया भरोसा
बीजेपी ने वादा किया है कि इंसान और वन्यजीव दोनों की रक्षा के लिए उसकी सरकार बनने पर आर्टिफिशियल इंटेलिएजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े लोग बीजेपी के इस संकल्प की जमकर सराहना कर रहे हैं।

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'अच्छा है कि इसे घोषणापत्र में शामिल किया है'
एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने भाजपा के घोषणापत्र में शामिल किए गए इस वादे को लेकर कहा है, 'मानव-जानवर संघर्ष, वन संरक्षण, पर्यावरण और हरियाली चुनावों के दौरान कभी भी राजनीतिक दलों की प्राथमिकता नहीं रहती है। यह अच्छा है कि बीजेपी ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल किया है। एआई-आधारित टेक्नोलॉजी की ओर झुकाव आवश्यक है।'

कई राज्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष बना है बड़ा संकट
मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष अकेले महाराष्ट्र की समस्या नहीं है। विशेष रूप से केरल में यह बहुत भयावह रूप ले चुका है। देश में जहां भी जंगलों के आसपास आबादी है, वहां यह बड़े संकट का रूप धारण कर चुका है।

जंगली जानवरों के डर से कभी इंसान उनपर हमला कर देते हैं। कभी शिकार की तलाश में निकलने वाले वन्यजीव इंसान को निशाना बना लेते हैं। मवेशियों की जान पर तो संकट बना ही रहता है।

महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में रहा है बड़ा मुद्दा
महाराष्ट्र का विदर्भ इलाका बाघ-हाथी और इंसान के बीच संघर्ष झेलता रहा है। अभी तक किसी दल ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान नहीं दिया था। क्योंकि, राजनीतिक दलों को तो सिर्फ वोट चाहिए, वोट बैंक चाहिए, उन्हें वास्तविक सामाजिक सराकारों से शायद ही कभी ज्यादा मतलब रहता है।

अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से इस संकट का समाधान है संभव
विदर्भ क्षेत्र के चंद्रपुर जिले में कुल 1,500 गांव हैं। इनमें से करीब 450 गांव जंगल से सटे हुए हैं। इसकी वजह से यहां आए दिन किसी जंगली जानवर के हमले या फिर मानव के साथ उनके संघर्ष की स्थिति पैदा होती रहती है। इन गांवों में अगर एआई सिस्टम लगाया जाता है तो इस तरह के संकट का स्थायी समाधान मिल सकता है।

लेकिन तथ्य है कि एआई सिस्टम के लिए बहुत बड़े निवेश की आवश्यकता है। इसके लिए पूरा अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। कंट्रोल रूम चाहिए और उसे संचालित करने वाले लोग चाहिए, जो डेटा जुटाने का काम कर सकें। बीजेपी का घोषणापत्र इन्हीं जरूरतों को पूरा करने का संकल्प है।

समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और मुआवजे की रकम भी बढ़ रही है
अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या की वजह से इंसानों के जख्मी होने, जानवरों के घायल होने, मवेशियों के मारे जाने और फसलों के नुकसान की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

यह संकट कितना भयावह हो चुका है, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि महाराष्ट्र सरकार ने इन घटनाओं के लिए साल 2018-19 में जो 28 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया था, वह 2023-24 में बढ़कर 137 करोड़ रुपए हो गया।

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ है काम
टीओआई को अधिकारियों ने बताया है कि 'राज्य का वन विभाग बाघों और जंगली हाथियों की निगरानी के लिए पहले ही ड्रोन का इस्तेमाल करने लगा है। तडोबा के आसपास और एक पेंच के पास 10 संवेदनशील गांवों में एआई-आधारित टेक्नोलॉजी का संचालन हो भी रहा है। ये प्रोजेक्ट पायलट योजना के तहत लागू किए गए हैं।'

पीएम मोदी भी कर चुके हैं 'मन की बात' में जिक्र
तडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व (TATR) में लगाई गई एआई-टेक्नोलॉजी का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 'मन की बात' में भी कर चुके हैं। यह सिस्टम एक तरह से पूर्वानुमानों के विश्लेषण के आधार पर काम करता है।

इससे गांव वालों को आसपास से गुजरने वाले बाघों, भालुओं और तेंदुओं के बर्ताव और जोखिमों की सूचना पहले ही मिल जाती है। इससे इंसान और मानव संघर्ष का खतरा टल जाता है और नागरिकों और पशुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

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अभी थोड़ा है, ज्यादा की जरूरत है
टीएटीआर के एक अधिकारी ने बताया, 'अभी तडोबा के आसपास के 10 गांवों में साउंड अलर्ट भेजने के लिए चार से पांच एआई कैमरे लगाए गए हैं। हमें पूर्वानुमान पर आधारित डेटा जुटाने के लिए ज्यादा सॉफिस्टिकेटेड सिस्टम की आवश्यकता है। इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ेगी।' बीजेपी के घोषणापत्र में इसी से जुड़ा वादा है।

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