'योजना हाईजैक किया, अजित का मंत्रालय रद्दी', शिंदे और पवार गुट में बढ़ी टेंशन, चुनाव में भारी ना पड़ जाए मतभेद
Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति में 'लाडकी बहीण योजना' को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। लाडकी बहीण योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (शिंदे गुट) और अजित पवार की एनसीपी के बीच विवाद हो रह है। अजित पवार और एकनाथ शिंदे गुट के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना से जुड़े राज्य के जल आपूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटिल ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विभाग वित्त मंत्रालय को सरकार का सबसे रद्दी विभाग बताया है। वहीं शिवसेना के आबकारी मंत्री शंभूराज देसाई ने कहा है कि अजित पवार ने लाडकी बहीण योजना' को हाईजैक कर लिया है।

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शिंदे गुट के शंभूराज देसाई और गुलाबराव पाटिल पवार पर साधा निशाना
शंभूराज देसाई ने आरोप लगाया, "योजना के नाम में 'मुख्यमंत्री' है और इसे योजना से हटाना अनुचित है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। यह राज्य सरकार की योजना है और उन्हें (पवार) सभी को साथ लेकर चलना चाहिए था।"
वहीं गुलाबराव पाटिल ने कहा, 'वित्त मंत्रालय सरकार का सबसे रद्दी विभाग है। मैंने इस मंत्रालय को एक फाइल भेजी थी। उसे 10 बार वापस किया गया है और सिर्फ नकारात्मक टिप्पणियां की गई हैं। लेकिन मैंने भी हार नहीं मानी है और अनुवर्ती कार्रवाई की।''
पाटिल शिंदे खेमे के दूसरे नेता हैं जिन्होंने अजित पवार की पार्टी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है। पाटिल का कहना है कि हमें कई बार फाइलों के साथ अपने लोगों को भेजना पड़ता है।
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शिवसेना के मंत्री तानाजी सावंत के बयान पर भी मचा था विवाद
पिछले महीने शिवसेना के मंत्री तानाजी सावंत ने एक सार्वजनिक बैठक में "एनसीपी नेतृत्व के साथ कभी नहीं घुलने-मिलने" की अपनी टिप्पणी से एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था।
स्वास्थ्य मंत्री सावंत ने यह भी कहा था कि कैबिनेट में उनके नेताओं के बगल में बैठने मात्र से उन्हें "उल्टी" आती है। शिवसेना के मंत्री तानाजी सावंत ने कहा कि वह "कट्टर शिवसैनी" हैं और वह कांग्रेस और एनसीपी को बर्दाश्त नहीं कर सकते।
शिवसेना के मंत्री तानाजी सावंत ने कहा था, ''मैं कैबिनेट में एनसीपी नेताओं के बगल में बैठता हूं, लेकिन बाहर आने के बाद उल्टी करता हूं।''
स्वास्थ्य मंत्री सावंत ने कहा था, "मैं एक कट्टर शिवसैनिक हूं। मैं अपने जीवन में कभी भी कांग्रेस और एनसीपी के साथ नहीं घुला-मिला। मैं जब से छात्र था, तब से कभी घुला-मिला नहीं। यह सच्चाई है। आज, भले ही मैं उनके (एनसीपी) साथ कैबिनेट में बैठूं, लेकिन बाहर आने के बाद मुझे उल्टी आती है। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता, यह एक सच्चाई है।"
चुनाव के पहले कहीं भारी ना पड़ जाए ये मतभेद
नवंबर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले अजीत पवार गुट और शिंदे गुट के बीच बढ़ती टेंशन इनपर भारी पड़ सकती है। इसका फायदा विपक्ष भी उठा सकता है। वहीं ये दरार वोटरों को भी दुविधा में डाल सकता है। जिस तरह से लगातार अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी दोनों गुटों से की जा रही है, उससे वोटरों में इनकी विश्वसनीयता कम हो सकती है।
भाजपा के भीतर काफी वक्त पहले से अजित पवार के खिलाफ असंतोष की आवाजें उठ रही हैं। शिंदे गुट के कई नेताओं का मानना है कि महायुति गठबंधन लाने से उन्हें लोकसभा के चुनावों में नुकसान हुआ है। ऐसे में अब ये देखने












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