महायुति से बाहर भी हो सकते हैं अजित पवार? महाराष्ट्र में बीजेपी और एनसीपी में चल क्या रहा है
Maharashtra News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने अंतरिम बजट में जिस तरह से 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' योजना का प्रस्ताव रखा है, उससे साफ है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी महायुति गठबंधन इसे बहुत बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहती है।
इस योजना के तहत जुलाई से राज्य में महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए देने का एलान किया गया है। लेकिन, सत्ताधारी गठबंधन में कुछ इस तरह के उथल-पुथल हो रहे हैं, जिससे विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल रहा है कि क्या अजित पवार की एनसीपी चुनावों तक सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रह भी पाएगी?

भाजपा नेता के वायरल वीडियो से सामने आई गठबंधन की सही तस्वीर!
दरअसल, पुणे जिले के भाजपा उपाध्यक्ष सुदर्शन चौधरी के एक वायरल वीडियो ने एनसीपी को लेकर बीजेपी की चिंता और असमंजस सामने ला दी है। उस वीडियो में चौधरी शिरूर लोकसभा सीट के चुनाव परिणाम की समीक्षा बैठक में अजित पवार गुट से रिश्ता तोड़ने की वकालत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'अगर आप सड़क पर कार्यकर्ता से पूछेंगे तो वे कहेंगे कि अजित के साथ गठबंधन खत्म करें....हम उनके खिलाफ कई वर्षों तक लड़े हैं, हमें उनकी आवश्यकता नहीं है। हमें उनकी जरूरत क्यों है?' इस वीडियो के लीक होने के बाद भाजपा और एनसीपी के बीच पहले से ही अंदर ही अंदर महसूस की जा रही असहजता और बढ़ गई है।
बीजेपी नेता की टिप्पणी पर भड़की एनसीपी
बाद में भाजपा नेता को एनसीपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ी और उनपर स्याही फेंकने भी कोशिश की गई। एनसीपी की ओर से भाजपा नेताओं पर सवाल उठाए गए हैं कि उनके नेता गठबंधन के सहयोगियों को लेकर इस तरह की टिप्पणियां कैसे कर रहे हैं।
पुणे की एनसीपी नेता रुपाली पाटील ने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से चौधरी के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है, हालांकि वे पहले ही इसे अपनी निजी राय बता चुकी हैं। पाटील ने कहा, 'हम बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व से पूछना चाहेंगे कि क्या वे अपने नेताओं को इस तरह के बयान देने से रोकेगी। वे अब इस तरह से क्यों बोल रहे हैं और लोकसभा चुनावों से पहले नहीं बोले।'
संघ के विचारक के लेख से भी पैदा हुई दूरी!
दरअसल, सत्ताधारी गठबंधन के दोनों सहयोगियों में पहले से ही अंदरखाने तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। खासकर जब से आरएसएस के विचारक रतन शारदा ने ऑर्गेनाइजर में लिखा है कि भाजपा का एनसीपी से हाथ मिलाना सही नहीं था, क्योंकि इससे उसकी 'ब्रांड वैल्यू' घटी है।
अलग चुनाव लड़ सकता अजित पवार गुट- शरद पवार गुट का दावा
दोनों दलों के बीच जारी इस तरह की तल्खी के बीच शरद पवार गुट का कहना है कि हो सकता है कि विधानसभा चुनावों में अजित पवार की एनसीपी महायुति का हिस्सा न रहे। एनसीपी (एसपी) के नेता रोहित पवार ने दावा किया है, 'अजित पवार को बाहर रखना बीजेपी की या बीजेपी और अजित पवार गुट दोनों की रणनीति हो सकती है। वे अलग चुनाव लड़ सकते हैं ताकि महा विकास अघाड़ी वोट विभाजित कर सकें, खासकर एनसीपी (एसपी) का।'
एनसीपी पहले ही मोदी सरकार की नई कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज बताई जा रही है। इसके राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल को राज्यमंत्री का ऑफर मिला था, लेकिन बताया जाता है कि उनकी चाहत कैबिनेट मंत्री बनने की थी। लोकसभा चुनावों में इस बार एनसीपी के साथ गठबंधन के बावजूद एनडीए का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। 48 सीटों में से बीजेपी 9, शिवसेना 7 और एनसीपी सिर्फ 1 सीट जीत सकी है।












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