महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में सामने आए 51, 880 नए कोरोना पॉजिटिव केस
मुंबई, 4 मई: कोरोना महामारी की दूसरी लहर में हर दिन नए पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 51 हजार 880 नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं। वहीं इस अवधिम में 65,934 लोग कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके हैं और 891 संक्रमितों की मौत हो गई।

मंगलवार को जारी किए गए हेल्थ अपडेट के अनुसार महाराष्ट्र में कुल 51,880 नए मामले दर्ज हुए वहीं पिछले 24 घंटों में 65,934 लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके है और 891 लोगों की कोरोना के चलते मौत हो गई। इसके बाद महाराष्ट्र में कोरोना पॉजिटिव के सक्रिय मामले 6,41,910 है वहीं अब तक 71,742 लोगों की कोरोना के चलते मौत हो चुकी है।
बता दें देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में एक साथ इतनी अधिक संख्या में कोरोना पॉजिटिव केस बढ़ने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में मरीजों को बेड और ऑक्सीजन तक ढंग से नहीं मिल पा रहे हैं। साथ ही सरकारी और प्राइवेट लैब्स पर टेस्टिंग का बोझ इतना ज्यादा बढ़ गया है कि रिपोर्ट आने में 5 से 7 दिन का वक्त लग जा रहा है, जिससे पॉजिटिव मरीजों की जान खतरे में पड़ रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने RT-PCR टेस्ट के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।
टीकाकरण की रफ्तार हुई धीमी
वहीं टीकाकरण की रफ्तार में भी कमी आठ है जिसको लेकर से केंद्र सरकार भी चिंतत है।23 अप्रैल को 11 मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में पीएम मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाया था। अब जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीकार लगना शुरू हो चुका है ऐसे मेें रफ्तार तेज होनी चाहिए थी लेकिन धीमी है। सर रकारी आंकड़ों के मुताबिक 10-16 अप्रैल के बीच देशभर में 2.07 करोड़ टीकाकरण किया गया वहीं, 17-23 अप्रैल के मध्य 1.7 करोड़ और अप्रैल 24- 30 सप्ताह में 1.48 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया गया। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में हुए टीकाकरण से पता चलता है कि महीने के पहले सप्ताह के मुकाबले 40 प्रतिशत कम वैक्सीनेशन किया गया। टीकाकारण करवाने वालों की संख्या में कमी आने के पीछे ये तथ्य बताया जा रहा है कि लोग कोरोना के डर से घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वैक्सीनेशन सेंटर पर लगी लंबी लाइनों को देखकर लोग डरे हुए है। यही कारण है कि कम लोग वैक्सीन लगवाने जा रहे हैं।












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