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LPG Crisis: छत्रपति संभाजीनगर में एलपीजी संकट गहराया, गैस सप्‍लाई बंद होने से इतने फीसदी MSME पर लगा ताला

LPG Supply Crisis: ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब देश के औद्योगिक ढांचे पर भी साफ दिखने लगा है। इस अंतरराष्ट्रीय स्थिति के कारण एलपीजी की देशव्यापी किल्लत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है। गैस सप्‍लाई बंद होने से महाराष्ट्र के औद्योगिक पहियों पर ब्रेक लग चुका है।

5 मार्च से कमर्शियल एलपीजी गैस की सप्‍लाई पूरी तरह बंद होने के कारण राज्य के कई औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा है। खासकर छत्रपति संभाजीनगर के एमआईडीसी इलाकों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं, जहां गैस संकट ने छोटे और मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ दी है। उत्पादन रुकने से लाखों कामगारों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है, जबकि उद्योग जगत अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

LPG Crisis

गैस संकट से थमी औद्योगिक रफ्तार

एबीपी न्‍यूज रिपोर्ट के अनुसार कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति बंद होने का सबसे बड़ा असर एमआईडीसी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वाळूज, चिकलठाणा, शेंद्रा, पैठण और औरिक जैसे औद्योगिक इलाकों में करीब 4,000 कंपनियां संचालित हैं, जिनमें से 40 से 50 प्रतिशत यूनिट पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं। गैस की कमी के चलते इन उद्योगों का उत्पादन लगभग ठप हो गया है।

70% छोटे-मध्यम उद्योगों पर संकट

गैस आपूर्ति बाधित होने से लगभग 70 प्रतिशत छोटे और मध्यम उद्योग गंभीर संकट में आ गए हैं। कई यूनिट अपनी उत्पादन क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पा रहीं, जिससे आर्थिक नुकसान तेजी से बढ़ रहा है। उद्योगपतियों के अनुसार, यह स्थिति कुछ ही दिनों में और भयावह रूप ले सकती है।

वैकल्पिक ईंधन पर स्विच करना मुश्किल

उद्योगपतियों का कहना है कि गैस संयंत्रों को अचानक किसी अन्य ईंधन पर शिफ्ट करना आसान नहीं है। इसके लिए समय, निवेश और तकनीकी बदलाव की जरूरत होती है, जो मौजूदा हालात में संभव नहीं है। यही वजह है कि अधिकांश इकाइयाँ फिलहाल बंद या सीमित उत्पादन पर चल रही हैं।

कामगारों को बचाने की कोशिश

संकट के बावजूद कई कंपनियां अपने कुशल कामगारों को हटाने से बच रही हैं। उन्हें नियमित रूप से बुलाकर मशीनों की सर्विसिंग और रखरखाव जैसे कार्य करवाए जा रहे हैं, ताकि गैस आपूर्ति शुरू होते ही उत्पादन तेजी से बहाल किया जा सके।

सीमित संसाधनों से चल रहा काम

कुछ बड़ी कंपनियां अपने वेंडर्स को अस्थायी रूप से गैस उपलब्ध कराकर सीमित स्तर पर उत्पादन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह समाधान लंबे समय तक टिकाऊ नहीं माना जा रहा।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

उद्योग जगत ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो लाखों परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट आ सकता है और औद्योगिक ढांचा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

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