लोकसभा चुनाव: शिंदे मांगे 13, शाह ने दिए 10? रात भर चला मंथन लेकिन फंस गया पेंच
Lok sabha elections 2024: लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग को लेकर मामला अभी भी फंसा हुआ है। महाराष्ट्र में दो दिवसीय चुनावी दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सह्याद्रि गेस्ट हाउस में देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, और अजित पवार के साथ देर रात बैठक की। ठस् इस बैठक में महाराष्ट्र लोकसभा सीटों शेयरिंग फार्मूंले पर हुई लेकिन शिंदे की मांग के चलते पेंच फंस गया है।

बता दें महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीटें हैं जिसमें से 32 सीटों से अधिक सीटों पर भाजपा इस बार चुनाव लड़ना चाहती है। बाकी बची सीटों को अपने सहयोगी दलों को देने को तैयार हुई है।
जिसमें से 10 सीटें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना (शिंदे गुट) और दो से तीन सीटें एनसीपी (अजित पवार गुट) दिए जाने की बात अमित शाह की बैठक में हुई, लेकिन सूत्रों के अनुसार 10 सीटों पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तैयार नहीं हैं वो 13 सीटों की डिमांड कर रहे हैं जिस कारण सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए गठबंधन में मामला अटक गया है।
बताया जा रहा है कि सह्याद्रि गेस्ट हाउस में अमित शाह के साथ हुई बैठक में आधे घंटे बाद अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस चले गए। इसके बाद अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार की मौजूदगी में एकनाथ शिंदे से ल गभग 45 मिनट तक बात की और उन्हें समझाया कि एकनाथ शिंदे और अजित पवार गुट को केवल जीतने की क्षमता के आधार पर सीटें दी जाएगी।
लेकिन एकनाथ शिंदे अपने मौजूदा सांसदों को टिकट दिया जाए इस मांग को लेकर अड़े रहे। देर रात चली इस बैठक में अमित शाह ने उन्हें जमीनी हकीकत समझा कर 10 सीटों की बात मानने के लिए राजी करने की कोशिश की।
शाह ने शिंदे को ये भी समझाया कि कुछ सीटों का आदान प्रदान करना भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा जरूरत पड़ने पर उन्हें अपने उम्मीदवार को भाजपा के कमल के निशान पर चुनाव लड़ाना भी पड़ेगा।
रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के चुनावी रणनीतिकार और चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने महाराष्ट्र दौरे के दौरान आठ घंटे में दो बैठक सीट शेयरिंग को लेकर की। बैठक में अमित शाह ने एकनाथ शिंदे दोनों को सलाह दी कि सीटों की मांग करते हुए आक्रामक ना बनें, तर्क संगत बात करें।
वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुासर शिवसेना सांसद अपनी उम्मीदवारी को लेकर शिंदे और भाजपा पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर उन्हें टिकट नहीं दिया जाता है तो वो किसी भी हालत में अपने क्षेत्र में भाजपा के लिए चुनाव प्रचार नहीं करेंगे।
सूत्रों के अनुसार भाजपा पर टिकट का दबाव बनाने वालों में पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल, सांसद गजानन कीर्तिकर और पूर्व मंत्री रामदास कदम का नाम प्रमुख है।
बता दें 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने शिवेसना के बीच 25-23 सीटों का बंटवारा हुआ था। तब भाजपा ने 25 और उद्धव ठाकरे गुट वाली पुरानी शिवसेना ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और भाजपा ने 23 और शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा की सरकार थी।
हालांकि इस बार के हालात अलग हैं महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे से एकनाथ शिंदे से बगावत करने के बाद शिवसेना के दो धड़ हो चुके हैं। जिसमें से एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना भाजपा के साथ गठबंधन में रहते हुए महाराष्ट्र में सत्ता पर काबिज है और शिंदे मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं।
वहीं उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना एनडीए गठबंधन के विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल है। ये ही वजह है कि भाजपा एकनाथ शिंद गुट की शिवसेना के उम्मीदवारों को महज उन सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़वाना चाहती है जहां पर शिंदे शिवसेना की जीत पक्की है।












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