महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण की सौगात क्या लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन को दिलाएगी जीत?
Maharashtra Maratha Reservation: महाराष्ट्र में लंबे समय पहले शुरू हुआ मराठा आरक्षण आंदोलन आज 27 जनवरी 2024 को समाप्त हो चुका है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सरकार ने मराठा आरक्षण देने की मांग को मान लिया है। मुख्यमंत्री शिंदे ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आरक्षण के आंदोलनकारी मनोज जरांगे को शनिवार को जूस पिलाकर प्रदर्शन समाप्त करवाया।

कुछ महीने से ये मराठा आरक्षण आंदोलन महाराष्ट्र की शिंदे सरकार की गले की फांस बन चुका था। आइए जानते हैं कि क्या मराठों को आरक्षण देना महाराष्ट्र सरकार के लिए मजबूरी बन चुका था या लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मराठों को आरक्षण की सौगात देकर भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन की जीत पक्की की है?
मराठों को आरक्षण देने की मांग कैसे बढ़ी?
दरसअल, मनोज जरांगे ने 2011 में ही अपने गांव से मराठियों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण दिए जानें की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। 2021 में महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण कानून रद्द होने के बाद ओबीसी आरक्षण की मांग बढ़ी थी।
महाराष्ट्र सरकार ने मराठा कानून को रद्द करने के लिए कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुधारात्मक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की लेकिन वहां भी बात नहीं बनी। वहीं मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे को भी मुंबई होईकोर्ट से जीत मिली और मुंबई में सर्मथकों के साथ प्रवेश की अनुमति भी मिल गई थी साथ कोर्ट ने शिंदे सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा कि नगर की सड़कों पर जाम नहीं हो।
आरक्षण की मांग मानना क्यों आवश्यक हो गया था?
मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे की पदयात्रा में पहले बड़ी संख्या में लोग जुड़ते गए उसके बाद जरांगे की भूख हड़ताल और महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी कि अगर रात तक उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो, वह मुंबई के आजाद मैदान में शनिवार को धरना करेंगे, कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव से पहले मराठा आरक्षण को लेकर उग्र होता आंदोलन महाराष्ट्र में राजनीतिक रूप से विस्फोट बन रहा था।
2024 चुनाव को लेकर बढ़ी उम्मीद
ऐसे में लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले महाराष्ट्र भाजपा-शिंदे गठबंधन सरकार ने मराठाओं को ओबीसी कोटो के तहत आरक्षण का तोहफा देकर खुश कर दिया है। माना जा रहा है कि मराठियों को आरक्षण देकर महाराष्ट्र में भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन 2024 में हो रहे लोकसभा चुनाव के अलावा महाराष्ट्र विधानससभा चुनाव में भी फायदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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महाराष्ट्र और मराठी वोटर/मराठी मुख्यमंत्री
बता दें महाराष्ट्र में 30 से 33 प्रतिशत आबादी मराठियों की है वहीं ओबीसी आबादी कुल 40 फीसदी है। महाराष्ट्र की राजनीति में शुरूआत से लेकर अब तक मराठियों का ही प्रभुत्व रहा है। 1960 में महाराष्ट्र के गठन के बाद अब तक 20 मुख्यमंत्री बने जिनमें से 12 मराठा समुदाय से है। वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार मराठा हैं। देवेंद्र फडणवीस भी मराठी समुदाय से ही हैं।
महाराष्ट्र में मराठी ही क्यों हैं किंग मेकर
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से लगभग 20 से 22 सीटों पर और महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 सीटों में से 80 में से 85 सीटों पर मराठा वोट ही चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में आरक्षण की मांग पूरी करने के बाद आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मराठा वोट मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है।
गौर करने वाली बात ये है कि महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीट में 11 विदर्भ क्षेत्र में हैं जिसमें से 10 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। वहीं 288 विधानसभा सीटों में 62 सीटों इसी क्षेत्र की है और ओबीसी सीटों पर भाजपा का दबदबा है।
मराठा समुदाय सियासी आधार
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी का मराठा समुदाय सियासी आधार रहा है। महाराष्ट्र ही वो राज्य है जहां पर मंडल की राजनीति शुरू होने से पहले ओबीसी राजनीति शुरू हुई। यहां पर बहुत से मराठी ओबसी में आते हैं और बहुत से सामान्य श्रेणी में आते हैं जैसे एनसीपी प्रमुख शरद पवार ओबीसी भी हैं और माराठी भी।
शिंदे ने बढ़ाई ठाकरे की मुसीबत
वहीं महाराष्ट्र के वर्तमान सीएम एकनाथ शिंदे मराठा है। मराठा आंदोलन शुरू करने वाले बाल ठाकरे की सेना के आक्रामक शिवसैनिक रहे शिंदे ने चुनाव से ठीक पहले ये मराठा आरक्षण की मांग को मांग को स्वीकार करके एक तरफ जहां जहां भाजपा-शिंदे गठबंधन को मजबूत और मजबूत कर चुनावों में जीत पक्की की है वहीं दूसरी ओर शिवसेना (यूटीबी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी को धराशायी कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।












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