पुणे में "वर्कलोड" से 26 वर्षीय CA की मौत मामले पर नेताओं का फूटा गुस्‍सा, जानें किसने क्‍या कहा?

Pune CA deth Case: पुणे में अर्न्स्ट एंड यंग (EY) में काम करने वाली 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट अन्ना सेबेस्टियन की वर्क स्‍ट्रेस के कारण दुखद मौत के मामले ने चिंता बढ़ा दी है। कॉर्पोरेट सेटिंग्स में काम के तनाव को कम करने की आवश्यकता पर चर्चा शुरू हो चुकी है। वहीं इस घटना के कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले समेत अन्‍य नेताओं ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है

इसके साथ ही वे कंपनियों द्वारा कर्मचारियों पर काम के दबाव को कम करने और कर्मचारियों की भलाई के लिए सिस्‍टटम में महत्वपूर्ण बदलाव की वकालत कर रहे हैं।

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अजित पवार ने क्‍या कहा?

उपमुख्‍यमंत्री अजीत पवार ने सेबेस्टियन की मौत पर दुख व्‍यक्‍त करते हुए कहा "तनाव के कारण मरने वाले युवाओं के बढ़ते मामलों पर हमें ध्यान देने की आवश्यकता है। मुझे उम्मीद है कि अर्न्स्ट एंड यंग इंडिया सुधारात्मक कदम उठाएगा। उन्होंने ईवाई जैसी कंपनियों के लिए अपने कार्य वातावरण का पुनर्मूल्यांकन करने की बात कही।

सुपिया सुले ने कॉर्पोरेट संस्कृति में बदलाव की मांग की

सुप्रिया सुले ने इस बात पर जोर दिया कि सेबेस्टियन की मौत सरकार और निगमों दोनों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए। उन्होंने श्रम कानूनों के सख्त क्रियान्वयन और डिजिटल रूप से बदलते कार्यस्थल में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए उपायों के कार्यान्वयन की वकालत की। उनका बयान सरकार और कॉर्पोरेट क्षेत्रों की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है कि कर्मचारियों की भलाई सुनिश्चित करके ऐसी घटनाओं को रोकना उनकी प्राथमिकता है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने काम के घंटे कम करने की वकालत

टीएमसी के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले और शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी शामिल हैं। गोखले ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान निजी कंपनियों में टॉक्‍सिक वर्क कल्‍चर के मुद्दे को उठाने की कसम खाई है, जिसमें कर्मचारियों के लिए उचित वेतन और विनियमित कार्य घंटों की वकालत की गई है। चतुर्वेदी ने भारत में अत्यधिक काम करने के महिमामंडन की आलोचना की, इसकी तुलना अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में सख्त कार्य वातावरण मानकों से की।

केटी रामा राव ने दी ये सलाह

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने कार्यस्थल पर दबाव के व्यापक निहितार्थों पर विचार किया और इसे महज समयसीमा से परे गरिमा का मुद्दा बताया। उन्होंने युवा कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्‍स से अपनी नौकरी से ज़्यादा अपने जीवन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री क्‍या बोले?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने घोषणा की कि सेबेस्टियन की मौत की जांच पहले से ही चल रही है। उन्होंने कहा "चाहे वह व्हाइट-कॉलर जॉब हो या कोई और जॉब, किसी भी स्तर पर कार्यकर्ता या कर्मचारी... अगर देश का कोई नागरिक मरता है, तो जाहिर तौर पर हमें इसका दुख होता है।"

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