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Ladki Bahin Yojana: लाडकी बहिन योजना में होने जा रहा बड़ा बदलाव, सरकार की होगी 12000 करोड़ रुपयों की बचत

Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई लाडली बहन योजना में बड़ा खुलासा हुआ है। सरकार द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि इस योजना का लाभ बड़ी संख्या में अपात्र लोग उठा रहे थे, जिसमें कुछ मामलों में पुरुष भी शामिल थे। इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए 68 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर योजना से बाहर कर दिया है।

इस फैसले से सरकार को हर साल करीब 12,240 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। लाडली बहन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को भी विधानसभा चुनाव नतीजों में एनडीए की प्रचंड जीत के पीछे की वजह माना गया था।

Ladki Bahin Yojana

Ladki Bahin Yojana: ई-केवाईसी को बनाया गया अनिवार्य

शुरुआत में इस योजना के तहत करीब 2 करोड़ 47 लाख महिलाओं को लाभार्थी बनाया गया था। हालांकि, 31 मार्च 2026 तक केवल 1 करोड़ 75 लाख महिलाओं ने e-KYC प्रक्रिया पूरी की, जबकि 68 लाख महिलाएं अपात्र पाई गईं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना के लिए e-KYC को अनिवार्य करने का फैसला सरकार के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ। 18 सितंबर 2025 को जारी परिपत्र के तहत लाभार्थियों को दो महीने के भीतर e-KYC पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। बाद में इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 कर दी गई।

Ladki Bahin Yojana: महिलाओं को कब मिलेगी 18वीं किश्‍त? क्‍या अकाउंट में ट्रांसफर होंगे 3000 रुपये?
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Ladki Bahin Yojana: सरकार की होगी 12000 करोड़ की बचत

- जांच में यह भी सामने आया कि पिछले करीब 20 महीनों में अपात्र लाभार्थियों के खातों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की जा चुकी थी। अब इन नामों को हटाने से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।

- राज्य के खजाने पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ भी कम होगा। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पहले इस योजना पर सालाना खर्च 43,740 करोड़ रुपये अनुमानित था, जो अब घटकर 31,500 करोड़ रुपये रह जाएगा।

- इससे सरकार को अन्य विकास योजनाओं के लिए भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह योजना चुनाव से पहले जल्दबाजी में शुरू की गई थी, जिसके कारण शुरुआती दौर में लाभार्थियों की जांच नहीं हो पाई।

अब सरकार ने ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया है। इस कार्रवाई को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही यह भी संकेत है कि भविष्य में सरकारी योजनाओं में तकनीकी निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा, ताकि केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही लाभ मिल सके।

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