क्या संजय राउत शिवसेना नेतृत्व और MVA सरकार से नाराज हैं ?

मुंबई, 9 नवंबर: शिवसेना के राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राजनीति में उसके सबसे बड़े चेहरे संजय राउत आजकल काफी परेशान नजर आ रहे हैं। उनकी परेशानी उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायूड को मंगलवार को भेजी उनकी चिट्ठी से जाहिर होती है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति से शिकायत की है कि केंद्रीय एजेंसियां उनकी पार्टी यानी शिवसेना के नेताओं के खिलाफ लगा दी गई हैं। उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि उसने सरकार बनाने के लिए बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ लिया। उनका दावा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां शिवसेना नेताओं और विधायकों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बना रही हैं। लेकिन, राउत की बौखलाहट दरअसल सिर्फ बीजेपी से नहीं है। कहीं ना कहीं वह अपनी पार्टी के नेतृत्व और महाराष्ट्र की सरकार से भी परेशान नजर आ रहे हैं।

संजय राउत इतने परेशान क्यों हैं ?

संजय राउत इतने परेशान क्यों हैं ?

अभी तक ऐसा कोई केस नहीं है, जिसमें संजय राउत का सीधा नाम है। लेकिन, पिछले हफ्ते ही प्रवर्तन निदेशालय ने उनके एक रिश्तेदार प्रवीण राउत को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। उनपर मुंबई के एक उपनगरीय इलाके गोरेगांव में गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एक प्लॉट के फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) को कथित रूप से फर्जी तरीके से बेचने में शामिल होने का आरोप है। यह कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की एक सब्सिडियरी है। इससे पहले ईडी राउत की पत्नी वर्षा राउत से भी प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी से 55 लाख रुपये लोन लेने के मामले में पूछताछ के लिए बुला चुका है। प्रवीण राउत गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए 1,030 करोड़ रुपये के रिडेवलपमेंट फर्जीवाड़े का आरोपी है। यही नहीं ईडी मैगपाई डीएफएस प्राइवेट लिमिटेड की भी जांच कर रहा है, जिसमें राउत की बेटियां डायरेक्टर हैं। इसका एक डायरेक्टर भी गिरफ्तार हो चुके प्रवीण राउत का करीबी है। राउत ने अपनी चिट्ठी में यह भी आरोप लगाया है कि ईडी और दूसरी एजेंसियां गैरकानूनी तरीके से बेटी की शादी के डेकोरेटर और दूसरे वेंडर समेत 28 लोगों को उठा चुकी है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिनसे 17 साल पहले उन्होंने करीब एक एकड़ जमीन खरीदी थी।

राउत शिवसेना के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं ?

राउत शिवसेना के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं ?

60 साल के संजय राउत 2004 से लगातार तीसरी बार शिवसेना के राज्यसभा सांसद हैं और फिलहाल पार्टी में उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी नेता हैं। वह करीब तीन दशकों से पार्टी के मुखपत्र सामना के भी एग्जिक्यूटिव एडियर हैं। उन्हें महाराष्ट्र की सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी (शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन) का मुख्य सूत्रधार भी माना जाता है। इनकी और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की जुगलबंदी की वजह से ही 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में जीतने के बावजूद शिवसेना ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ हाथ मिलाकर उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने का सपना पूरा किया। महाराष्ट्र के बाहर खासकर राष्ट्रीय राजनीति में ये अभी शिवसेना के सबसे प्रमुख चेहरा हैं और केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी पर हमला करने वाले पार्टी के एकमात्र वरिष्ठ नेता भी। पार्टी ने उन्हें गोवा और यूपी विधानसभा चुनाव में भी अहमियत दे रखी है।

क्या संजय राउत पार्टी नेतृत्व और एमवीए सरकार से नाराज हैं ?

क्या संजय राउत पार्टी नेतृत्व और एमवीए सरकार से नाराज हैं ?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राउत की नाराजगी की तात्कालिक वजह उनके करीबी प्रवीण राउत की गिरफ्तारी ही है। क्योंकि, केंद्रीय एजेंसी उनके करीबी तक पहुंच चुकी है और उन्हें लगता है कि पार्टी नेतृत्व और महा विकास अघाड़ी सरकार उनकी मदद नहीं कर रही है। रविवार को राउत ने उन बीजेपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को लेकर इसकी आलोचना भी की, जो कथित तौर पर गलत कार्यों में शामिल हैं। शिवसेना के एक नेता ने कहा, 'लगता है कि राउत एमवीए सरकार से नाराज हैं, जो कि उस वक्त बीजेपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है, जब केंद्रीय एजेंसियां एमवीए नेताओं को निशाना बना रही हैं। उन्होंने ना सिर्फ शिवसेना प्रमुख की अगुवाई वाली सरकार पर, बल्कि एनसीपी चीफ शरद पवार की भी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर चुप्पी को लेकर सवाल उठाया है।'

संजय राउत के बारे में क्या बोल रहे हैं शिवसेना नेता ?

संजय राउत के बारे में क्या बोल रहे हैं शिवसेना नेता ?

हालांकि, शिवसेना के एक और नेता ने कहा है कि बीजेपी को महसूस हो चुका है कि एमवीए सरकार को गिराना मुश्किल है। 'और राउत जो कि एमवीए सरकार के आर्किटेक्ट हैं, लगातार बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोले रहते हैं। इसलिए ऐसा लगता है कि बीजेपी ने उन्हें परेशान करने का फैसला किया है, क्योंकि राउत किसी दबाव के आगे नहीं झुक रहे हैं। और यह एमवीए नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत हो सकती है। एमवीएम को मिलकर यह तय करना होगा कि आने वाले दिनों में बीजेपी का सामना कैसे करें।'

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