क्या महाराष्ट्र में BJP के प्रति 'नरम' पड़ी NCP,'नाराज' उद्धव ठाकरे ने पवार के सामने उठाया मुद्दा ?
मुंबई, 31 मार्च: महाराष्ट्र में मनी लॉन्ड्रिंग केस में एनसीपी के दो बड़े नेता जेल में हैं। लेकिन,शिवसेना को लग रहा है कि इस मुद्दे पर जितनी वह बीजेपी के खिलाफ संघर्ष कर रही है, उतना एनसीपी नहीं कर रही है। शिवसेना फिलहाल इस वजह से ज्यादा बिलबिलायी हुई है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय की जांच अब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के ससुराल तक पहुंच चुकी है। इस मामले में उद्धव अपनी नाराजगी विधानसभा में भी जाहिर कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक उन्होंने शरद पवार से भी मिलकर एनसीपी के इस मामले में बीजेपी के खिलाफ नरम रवैए की शिकायत की है और सहयोगी से इसपर कुछ ठोस आश्वासन लिया है।

शिवसेना को लगता है कि भाजपा पर 'नरम' है एनसीपी
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी की सरकार में बीजेपी के खिलाफ रवैए को लेकर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और बात इतनी बढ़ चुकी है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे को सीधे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के सामने उठाया है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना को लगता है कि एनसीपी विपक्षी भाजपा के खिलाफ ज्यादा सख्त रवैया अपनाने से बच रही है, जबकि केंद्रीय एजेंसियां गठबंधन के नेताओं को कथित तौर पर टारगेट कर रही हैं। एक-दो नहीं शिवसेना सूत्रों ने ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि पवार की पार्टी भाजपा के खिलाफ में जोरदार तरीके से मोर्चा खोलने से पीछे हट गई है।

शिवसेना नेता दे रहे हैं 'नरमी' के उदाहरण
मसलन, फोन-टैपिंक केस में मुंबई पुलिस ने पहले पूर्व सीएम और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस को बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स के अपने साइबर विंग में आने को कहा था, लेकिन 13 मार्च को उनके मालाबार हिल आवास पर जाकर ही बयान दर्ज कर लिया। गृह विभाग एनसीपी के पास है और शिवसेना पुलिस के इस बदले रवैए से खुश नहीं है। इसी तरह जब ईडी ने एनसीपी नेता और मंत्री नवाब मलिक को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया तो शिवसेना ने जिस तरह से भाजपा के खिलाफ आसमान सिर पर उठाया, उपमुख्यमंत्री अजित पवार (एनसीपी) के सुर नरम रहे और उन्होंने कहा, 'यह दोनों ओर से शांत हो जाने का समय है, हालात को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकें।' पिछले साल जब कथित रूप से विधानसभा अध्यक्ष से बदसलूकी के आरोप में 12 बीजेपी विधायकों को एक साल के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया, तब भी अजित पवार ने कहा था कि सजा देनी ही है तो कुछ घंटों या एक दिन के लिए दिया जाना चाहिए। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी निलंबन के फैसले को असंवैधानिक करार दिया।

'बीजेपी के खिलाफ सिर्फ हम ही लड़ रहे हैं'
शिवसेना नेताओं को एनसीपी के खिलाफ संदेह बढ़ने का ताजा कारण एनसीपी के राज्यसभा सांसद माजीद मेमन का वह ट्वीट है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि 'अगर नरेंद्र मोदी लोगों का जनादेश जीतते हैं और दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं तो निश्चित रूप से उनमें कुछ गुण होंगे या कुछ अच्छा काम किया होगा, जो विपक्ष के नेता समझ पाने में नाकाम रहे हैं।' इन्हीं वजहों से एक वरिष्ठ शिवसेना नेता ने कहा है, 'बीजेपी के खिलाफ सिर्फ हम ही लड़ रहे हैं, न सिर्फ सेना के लिए, बल्कि एनसीपी के लिए भी। शिवसेना के लेफ्टिनेंट और सैनिक फ्रंटफुट पर हैं, जबकि लगता है कि एनसीपी बैकफुट पर है। एनसीपी बीजेपी से उस तरह से नहीं लड़ रही है, जैसे कि उसे लड़ना चाहिए।'

गृह विभाग एनसीपी के पास होने से भी परेशान है सेना
शिवसेना नेता क्या सोच रहे हैं, इस बात की भनक एनसीपी नेताओं को भी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है, 'जिस समय हम बीजेपी का आक्रमकता के साथ सामना कर रहे हैं, सेना के कुछ नेताओं को लगता है कि एनसीपी को और भी आक्रामक होना चाहिए, क्योंकि गृह विभाग हमारे पास है।' सेना के एक नेता का कहना है कि हो सकता है कि एनसीपी और बीजेपी नेताओं के आपसी संबंधों की वजह से भी ऐसा हो रहा हो। सेना नेताओं को शायद लगता है कि गृह विभाग उसके पास होता तो बीजेपी का सामना करना उसके लिए ज्यादा आसान होता।

'सीएम ने पवार तक पहुंचा दी बात'
हाल के दिनों मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी बीजेपी के खिलाफ भड़ास निकालने की कोशिश की है। पार्टी के एक नेता ने कहा भी है, 'मुख्यमंत्री नाखुश हैं।' उनके मुताबिक 'सीएम ने यह बात एनसीपी चीफ शरद पवार तक पहुंचा दी, जो खुद भी बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोले रहने के पक्ष में हैं। आने वाले दिनों में कुछ बदलाव देखने को मिलेगा।' यह बदलाव किस तरह का हो सकता है, इसके बारे में पवार की पार्टी के एक मंत्री ने कहा है सरकार में बीजेपी की पिछली सरकार के दौरान के भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ मामले खोलने पर विचार चल रहा है। हालांकि, इसपर फैसला लेने से पहले शिवसेना को ज्यादा सोचना पड़ेगा, क्योंकि तब वह भी उसी सरकार का हिस्सा थी।

क्यों बढ़ी शिवसेना की बौखलाहट ?
शिवसेना की बौखलाहट इसलिए बढ़ गई है क्योंकि एनसीपी कोटे के दो बड़े नेता अनिल देशमुख और नवाब मलिक पहले ही मनी लॉन्डिंग केस में सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। मलिक ने तो मंत्री पद से इस्तीफा तक नहीं दिया है और ना ही उद्धव ठाकरे ने राजनीति की तय मर्यादा वाली परंपरा ही निभाई है। ऊपर से प्रवर्तन निदेशालय की जांच उद्धव ठाकरे के ससुराल तक पहुंच चुकी है और उनके साले श्रीधर पाटणकर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को विधानसभा में ठाकरे ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था, 'आप अगर सत्ता में आना चाहते हैं तो सत्ता में आएं। लेकिन, इस तरह का 'खोटा' काम ना करें......हमारे या किसी के भी परिवार के सदस्यों को परेशान न करें। हमने आपके परिवार वालों को कभी परेशान नहीं किया।'












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