BMC चुनाव में बीजेपी-एमएनएस गठबंधन? राज ठाकरे से मिलने पहुंचे फडणवीस तो शुरू हुई चर्चा-Video
महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा शुरू हुई है कि बीएमसी चुनाव में बीजेपी और एमएनएस के बीच तालमेल की बात तो नहीं चल रही है। सोमवार को देवेंद्र फडणवीस ने राज ठाकरे से मुलाकात की है।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सोमवार रात अचानक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात के लिए उनके घर पहुंच गए थे। जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे की बातचीत हुई। इसकी वजह से मुंबई की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है और इस मुलाकात को बीएमसी चुनाव से जोड़ा जाने लगा है।
बीएमसी चुनाव में बीजेपी-एमएनएस गठबंधन?
बीएमसी का चुनाव पहले ही लेट हो चुका है और अब इसी साल होना है। ऐसे में एमएनएस चीफ राज ठाकरे से महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात को उसी चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई है और मुलाकात का एजेंडा क्या था, इसकी डिटेल सामने नहीं आ पाई है।
कर्नाटक चुनाव के बाद भाजपा पर तंज कस चुके हैं राज ठाकरे
गौरतलब है कि फडणवीस और ठाकरे की यह मुलाकात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में हुई भारतीय जनता पार्टी की एक बैठक के बाद हुई है। यहां यह जानना भी दिलचस्प है कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद राज ठाकरे ने उसपर तंज भी कसा था।
तब ठाकरे ने कहा था कि जो यह सोचते हैं कि उन्हें कोई हरा नहीं सकता, वह हार के झटके से सीख सकते हैं। वैसे पिछले साल जब राज्य में एकनाथ शिंदे और फडणवीस की सरकार बनी थी तो भाजपा नेता को बधाई देने वालों में राज ठाकरे सबसे आगे थे। लेकिन, बाद में मनसे नेता ने बीजेपी के कुछ फैसलों पर सवाल उठाने शुरू किए तो पार्टी ने भी उसका उसी अंदाज में जवाब दिया।
बीएमसी पर उद्धव गुट का कब्जा
ऐसे में महाराष्ट्र में भाजपा के सबसे बड़े नेता का उनके घर जाकर मिलकर आना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। क्योंकि बीएमसी को 1985 से शिवसेना ने अपना गढ़ बना रखा है। अभी उसपर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) का कब्जा है। राज ठाकरे अपने चचेरे भाई उद्धव से राजनीतिक रूप में चाचा बाल ठाकरे के रहते ही अलग हो चुके हैं।
देश के कुछ छोटे राज्यों से बीएमसी का बजट है ज्यादा
लेकिन, पिछले साल मूल शिवसेना का बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जा चुका है। ऐसे में बीजेपी एशिया के कई निगमों और देश के कुछ छोटे राज्यों से ज्यादा बजट वाली बीएमसी के चुनाव को अपने लिए बहुत बड़ा मौका मान रही है।
पिछले चुनाव में बीजेपी को शिवसेना से 2 सीटें कम मिली थी
तथ्य ये है कि 227 सीटों वाली बीएमसी में 2017 के चुनाव में शिवसेना से अलग लड़कर भी भाजपा ने 82 सीटों पर कब्जा किया था। वहीं तब की मूल शिवसेना उससे 2 सीटें ज्यादा 84 पर ही जीत दर्ज कर सकी थी।
बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में यदि भाजपा, शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और एमएनएस में किसी तरह का तालमेल होता है तो परिमाम दिलचस्प हो सकता है।












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