Iran Israel War: 'उमरा' तीर्थयात्री संकट में, सऊदी अरब में फंसे महाराष्ट्र के 50 हजार से अधिक हज यात्री
Maharashtra Umrah pilgrims: खाड़ी देशों में अचानक पैदा हुए भीषण युद्ध जैसे हालात और ईरान में हुई बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल ने महाराष्ट्र के मुस्लिम समुदाय में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। रमजान के पवित्र महीने में 'उमरा' के लिए सऊदी अरब गए महाराष्ट्र के लगभग 50 हजार से 1 लाख हज यात्री की सुरक्षा अब दांव पर लग गई है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम सीमा पर पहुंच गया है। इस अस्थिरता का सीधा असर हवाई यातायात पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इस संबंध में अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उड़ानों के रद्द होने या हवाई क्षेत्र बंद होने की स्थिति में ये हजयात्री वहीं फंस सकते हैं।

प्यारे खान ने बताया, "हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों का सरकार के पास आधिकारिक रिकॉर्ड होता है, लेकिन उमराह के लिए तीर्थयात्री निजी ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से जाते हैं। इसलिए फंसे हुए लोगों की सटीक संख्या प्राप्त करना मुश्किल है। फिर भी, प्राथमिक अनुमान के अनुसार 50 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों के वहां होने की संभावना है।"
500 निजी ट्रेवेल के जरिए भेजे गए हैं ये उमरा तीर्थयात्री
उमरा यात्रा के लिए कोई केंद्रीकृत सरकारी व्यवस्था न होने के कारण प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य भर से 500 से अधिक निजी ट्रैवल ऑपरेटर्स ने इस साल उमरा तीर्थयात्रियों को भेजा है, जिनमें से 100 से अधिक अकेले मुंबई से सक्रिय हैं। हालांकि, फंसे हुए तीर्थयात्रियों की सटीक जानकारी इकट्ठा करने के लिए जिला स्तर पर प्रयास जारी हैं।
युद्ध के कारण फंसे हज यात्रियों की बढ़ी मुसीबत
आर्थिक तंगी का साया भी इन तीर्थयात्रियों पर मंडरा रहा है। उमराह पर जाने वालों में सिर्फ धनी वर्ग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में ऐसे मध्यम और गरीब वर्ग के लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर यह यात्रा की है। यदि युद्ध के कारण उन्हें लंबा प्रवास करना पड़ा, तो होटल और भोजन का खर्च एक गंभीर समस्या बन जाएगा। हवाई टिकटों का महंगा होना या रद्द होना भी उन्हें बड़े आर्थिक संकट में धकेल सकता है।
सीएम फडणवीस ने केंद्र सरकार से मांगी मदद
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। सऊदी अरब में भारतीय दूतावास के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तीर्थयात्रियों को अस्थायी आश्रय और आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के माध्यम से केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया जाएगा। फंसे हुए यात्रियों को विशेष उड़ानों से सुरक्षित वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय से भी संपर्क साधा जा रहा है।
खामेनेई की मौत के बाद बत्तर हुए हालात
खाड़ी में बिगड़ती इस स्थिति के पीछे ईरान की एक बड़ी घटना जिम्मेदार है। अमेरिकी और इज़राइली सेना द्वारा संयुक्त रूप से किए गए एक हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई का निधन हो गया है। इस हमले में ख़ामेनेई के साथ-साथ उनकी बेटी, दामाद, बहू और पोती की भी जान चली गई।
ईरान सरकार ने देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। इस घटना ने पूरे खाड़ी देशों में युद्ध के बादल ला दिए हैं, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय विमानन पर पड़ रहा है। महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले और गांव से गए इन तीर्थयात्रियों के परिवार अब उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, और सभी की निगाहें अब सरकार और दूतावास के अगले कदम पर टिकी हैं।












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