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अपने दोस्तों से कहें कि.. ', Iran Israel War के बीच संजय राउत ने पीएम मोदी को विश्व गुरु कहते हुए कसा तंज

Sanjay Raut on Iran Israel War: ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। 28 फरवरी, 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए एक संयुक्त हवाई हमले के बाद खाड़ी देशों में तनाव चरम पर है। ईरान-इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तीखे सवाल उठाते हुए कटाक्ष किया है।

Sanjay Raut on Iran Israel War

पीएम के हालिया इजराइल दौरे से युद्ध को जोड़ा

पत्रकारों से बातचीत करते हुए, संजय राउत ने सीधे तौर पर इस युद्ध के भड़कने का संबंध प्रधानमंत्री मोदी के हालिया इजरायल दौरे से जोड़ा। उन्होंने अपने बयान में कहा, "प्रधानमंत्री मोदी दो दिन पहले ही इजरायल दौरे से वापस लौटे हैं और उसके ठीक बाद यह युद्ध भड़क उठा, जो केवल एक संयोग नहीं हो सकता।"

पीएम मोदी अपने दोस्‍तों से कहें अब बस युद्ध...

संजय राउत ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए उनसे आग्रह किया कि वे अपने "दोस्तों" से कहकर इस युद्ध को फौरन रुकवाएं, क्योंकि उनका मानना है कि अब 'बहुत हो गया' है।"

विश्‍व गुरु पीएम मोदी को युद्ध रुकवाना चाहिए

भारत के वैश्विक रुख पर बात करते हुए राउत ने सवाल उठाया कि अगर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोक सकते हैं, तो "विश्व गुरु" का दर्जा रखने वाले नरेंद्र मोदी जैसे बड़े नेता को ईरान-इजराइल संघर्ष में क्यों हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'इतिहास में ऐसा नेता न आज तक पैदा हुआ है और न आगे पैदा होगा', इसलिए मोदी को युद्ध रोकने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

खामेनेई के निधन पर शोक व्‍यक्‍त ना करने पर उठाया सवाल

राउत ने पीएम मोदी द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर संवेदना व्यक्त न करने को "बेहद गंभीर" बताया। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्हें इजराइल को छोड़कर लगभग पूरा विश्व सम्मान की दृष्टि से देखता था। राउत के मुताबिक, खामेनेई हमेशा भारत के सच्चे मित्र रहे थे।

उन्होंने भारत और ईरान के बीच पारंपरिक मित्रता का उल्लेख करते हुए बताया कि संकट की घड़ी में अली खामेनेई ने हमेशा भारत को समर्थन और मदद दी है। राउत ने याद दिलाया कि चाहे भारत-पाकिस्तान युद्ध का मामला हो या कश्मीर का मुद्दा, ईरान ने सदैव भारत का साथ दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अली खामेनेई जवाहरलाल नेहरू के बहुत बड़े प्रशंसक थे, और सवाल किया, "क्या मोदी जी को इस बात का गुस्सा है?"

संजय राउत ने आगे कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय कद के नेता के निधन पर भारत को शोक प्रकट करना चाहिए और अपनी संवेदनाएं व्यक्त करनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से पूछा कि वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं, "आप किससे डर रहे हैं? आप इजराइल से डर रहे हैं या (डोनाल्ड) ट्रंप से डर रहे हैं? शोक प्रकट करने में आपको क्या डर लग रहा है?"

राउत ने नेल्सन मंडेला का उदाहरण देते हुए कहा कि मंडेला स्वयं खामेनेई को अपना नेता मानते थे और ईरान दौरे के दौरान उन्होंने ऐसा सार्वजनिक तौर पर कहा था। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "तो क्या नेल्सन मंडेला आतंकवादी बन गए थे? क्या समझते हो आप अपने आपको?" संजय राउत की इन तीखी और विवादास्पद प्रतिक्रियाओं की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।

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