Guillain Barre Syndrome का पुणे में साया! अब तक 59 केस दर्ज, जानें कैसे फैल रहा और बचाव के उपाय?
Guillain Barre Syndrome: चीन से आए Human Metapneumovirus (HMPV) ने भारत में काफी दहशत का माहौल बना दिया। केंद्र सरकार ने वायरस को लेकर दिशा-निर्देश दिए। जगह-जगह से संक्रमित केस सामने आने लगे। इस बीच, पुणे ने एक दुर्लभ सिंड्रोम ने कदम जमा लिए हैं।
पुणे के सिंहगढ़ रोड इलाके में Guillain-Barre Syndrome (GBS) के अब तक 59 केस दर्ज किए जा चुके हैं। एक दिन में करीब 35 नए केस सामने आने के बाद शहर में हड़कंप की स्थिति बन गई है। यह एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर में अचानक कमजोरी, सुन्नता और मांसपेशियों के काम करने की क्षमता को प्रभावित करती है। इस खबर ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है, और विशेषज्ञों की एक टीम इस पर लगातार नजर रख रही है। आइए जानते हैं...

क्या है Guillain-Barre Syndrome?
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ तंत्रिका तंत्र विकार है, जिसमें रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही नर्व सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) पर हमला करती है। इसके कारण हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगते हैं, और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। यह बीमारी इतनी गंभीर हो सकती है कि मरीज को चलने-फिरने या सांस लेने में भी परेशानी होने लगती है।
पुणे में कहां-कहां केस?
- ग्रामीण इलाकों से- 33
- शहर- 11
- पिंपरी-चिंचवाड़ नगरपालिका सीमा- 12
- पड़ोसी जिलों से- 3
जेंडर वाइज जानें?
- पुरुष - 39
- महिलाएं - 20
पुणे में GBS के मामले
- पुणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ज्यादातर मरीज 12 से 30 साल की उम्र के हैं।
- एक 59 वर्षीय मरीज का भी इलाज जारी है।
- यह मामले मुख्य रूप से सिंहगढ़ रोड इलाके में पाए गए हैं।
- प्रभावित लोगों के नमूने जांच के लिए ICMR-NIV (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) भेजे गए हैं।
क्या महामारी का रूप ले सकती है GBS?
पुणे के नागरिक स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख डॉ. नीना बोराडे ने कहा कि GBS से घबराने की जरूरत नहीं है। यह बीमारी महामारी का रूप नहीं लेती। यह संक्रमण से जुड़ी होती है, खासकर जब कोई बैक्टीरिया या वायरस रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। सही उपचार से अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं।" एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि यह बीमारी बच्चों और युवाओं में भी हो सकती है।
Guillain-Barre Syndrome के लक्षण ?
GBS के लक्षण हल्के से गंभीर हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं...
- कमजोरी और सुन्नता (खासकर हाथ और पैरों में)।
- आंखों और मांसपेशियों में कठिनाई (दृष्टि में परेशानी)।
- बोलने, चबाने या निगलने में समस्या।
- सुई चुभने जैसा दर्द या जलन का अहसास।
- रात में दर्द जो अधिक गंभीर हो सकता है।
- समन्वय संबंधी समस्याएं, चलने में अस्थिरता।
- असामान्य हृदय गति या रक्तचाप में बदलाव।
- पाचन या मूत्राशय नियंत्रण में दिक्कत।
GBS का कारण क्या?
GBS आमतौर पर किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद होता है। जब शरीर संक्रमण से लड़ने की कोशिश करता है, तो गलती से यह तंत्रिकाओं पर हमला कर देता है। इससे शरीर के अंगों में कमजोरी और सुन्नता महसूस होती है।
क्या GBS से पूरी तरह ठीक हुआ जा सकता है?
जी हां, GBS का सही समय पर उपचार किया जाए, तो अधिकांश मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, जल्दी पहचान और इलाज से रिकवरी बेहतर होती है। सही देखभाल के साथ, मरीज धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौट आते हैं।
घबराने की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि GBS महामारी का रूप नहीं लेता। पुणे में स्वास्थ्य विभाग ने इस पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। सभी नमूनों की जांच की जा रही है, और प्रभावित मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है।
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