अजित पवार ने कोऑपरेटिव बोर्ड से शुरू की थी राजनीति, 9वीं बार बने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम
Ajit Pawar biography in Hindi: महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले एनसीपी चीफ शरद पवार को अपने ही भतीजे अजित पवार ने अबतक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। उन्होंने रविवार को बीजेपी-शिवसेना सरकार में 9वीं बार डिप्टी सीएम के रूप में एंट्री की है।
रविवार को अजित पवार एनसीपी के 18 एमएलए के समर्थन के साथ महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना की अगुवाई वाली सीएम एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल हो गए। वह बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस की तरह अब राज्य के नए उपमुख्यमंत्री बने हैं।

9वीं बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बने अजित पवार
अजित पवार के साथ एनसीपी के कई और दिग्गजों नेताओं ने राज्य में मंत्री पद की शपथ ली है। इसमें छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, दिलीप वाल्से पाटिल जैसे नेता भी शामिल हैं। अजित पवार के विद्रोह से शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी में टूट हो गई है। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बनने से पहले तक अजित पवार महाराष्ट्र विधानसभा के 29वें विपक्ष के नेता थे। राज्य के उपमुख्यमंत्री के तौर पर यह उनका 9वां कार्यकाल है।
कोऑपरेटिव बोर्ड से शुरू की राजनीति
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई, 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। मराठा समाज से आने वाले पवार ने चीनी मिलों की कोऑपरेटिव बोर्ड के सदस्य के रूप में 1982 में राजनीति में कदम रखा था।
पेशे से खुद को किसान और बिजनेसमैन बताने वाले अजित पवार 1991 में पुणे जिला कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन चुने गए। बाद में वह छत्रपति चीनी मिल के डायरेक्टर भी रहे। वह छत्रपति बाजार के चेयरमैन और विद्या प्रतिष्ठान और पुणे जिला विकास प्रतिष्ठान के ट्रस्टी की भूमिका भी निभा चुके हैं।
1991 में पहली बार लोकसभा सांसद बने
1991 में वह पहली बार 10वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। लेकिन, चार ही महीने में उन्होंने यह पद छोड़ दिया। बाद में वह महाराष्ट्र में कृषि और ऊर्जा विभाग के राज्यमंत्री बने। जब शरद पवार महाराष्ट्र के सीएम थे, तो भी वह उनकी सरकार में मंत्री पद पर थे।
1995 में पहली बार बने एमएलए
1995 में वे पहली बार बारामती विधानसभा से एमएलए निर्वाचित हुए। 1999 में वह दोबारा विधायक बने और पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाए गए। 1999 से दिसंबर 2003 तक वह सिंचाई मंत्री रहे। इसके बाद अक्टूबर 2004 तक विलासराव देशमुख सरकार में उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग का जिम्मा संभाला।
2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ भी ली थी शपथ
वह 2004, 2009 और 2014 में भी बारामती से एमएलए चुने गए। डिप्टी सीएम के तौर पर उनका सबसे छोटा कार्यकाल नवंबर, 2019 का था, जब उन्होंने सुबह-सुबह राजभवन में देवेंद्र फडणवीस के साथ शपथ ली थी। लेकिन, बाद में शरद पवार ने उद्धव ठाकरे की अगुवाई में महा विकास अघाड़ी सरकार को समर्थन देने का फैसला किया और अजित पवार की कुर्सी चली गई।
अजित पवार के पिता वी शांताराम के लिए कर चुके थे काम
हालांकि, फिर जब उद्धव सीएम बने तो उन्हें फिर से उपमुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई। अजित पवार के पिता अनंतराव ने शुरू में फिल्म निर्माता वी शांताराम के बॉम्बे स्थित राजकमल स्टूडियो के लिए भी काम किया था। लेकिन, उनके दादा गोविंदराव पवार बारामती कोऑपरेटिव ट्रेडिंग के कर्मचारी थे।
दो कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से असहज थे अजित पवार
हाल के दिनों अजित पवार तब से पार्टी लीडरशिप के खिलाफ ज्यादा मुखर हो गए थे, जबसे शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले और सहयोगी प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर एक तरह से भविष्य के उत्तराधिकारी की लाइन सेट करने की कोशिश की थी। इससे पहले उन्होंने खुद भी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन फिर वापस ले लिया।
इसके बाद अजित पवार ने सार्वजनिक रूप से विपक्ष के नेता पद से हटने की इच्छा जताई थी और पार्टी संगठन के लिए काम मांगा था। उन्होंने परोक्ष तौर पर अपने चाचा के नेतृत्व पर भी सवाल उठाने के कोशिशें की थी।












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