कोरोना से ठीक होने के बाद किन बीमारियों का है खतरा और कैसे बरतें सावधानी ? जानिए

नागपुर, 25 मई: कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को कई तरह से तोड़ दिया है। जो लोग ठीक हो चुके हैं, उनमें कुछ ब्लैक फंगस, व्हाइट फंगस और अब तो येलो फंगस की भी चपेट में आ रहे हैं और कई राज्यों ने तो म्यूकोरमाइकोसिस को भी महामारी घोषित कर दिया है। लेकिन, कोविड से ठीक हुए लोगों में कई और भी गंभीर समस्याएं देखी जा रही हैं। ये बीमारियां मुख्य तौर पर खून के जमने की वजह से सामने आ रही हैं, जिसके चलते मरीज सीने, पेट और दूसरे महत्वपूर्ण अंगों में बहुत ज्यादा दर्द की शिकायत करते डॉक्टरों से संपर्क करते देखे जा रहे हैं। कोविड की दूसरी लहर में ठीक हुए मरीजों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लंग और रीनल क्लोटिंग के मामले बढ़ने की शिकायतें मिल रही हैं।

पोस्ट-कोविड हो रही हैं ये बीमारियां

पोस्ट-कोविड हो रही हैं ये बीमारियां

डॉक्टरों का कहना है कि पोस्ट-कोविड मामलों में वैसे होम आइसोलेशन में रहे मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या बहुत कम देखी जा रही है। लेकिन, चिंता की बात ये है कि कुछ युवा मरीजों में भी, जो कोविड से मामूली रूप से बीमार हुए थे, उनके शरीर के विभिन्न अंगों में ब्लड क्लॉटिंग के मामले सामने आ रहे हैं। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर शोएब नदीम ने कहा है कि उन्होंने 41 साल के कोविड से ठीक हुए एक ऐसे मरीज का इलाज किया है, जिसमें रीनल क्लॉटिंग (गुर्दे में खून जमना) की दिक्कत थी। उन्होंने बताया 'ऐसे असाधारण मरीज वैसे तो स्वस्थ होते हैं और उन्हें कोई गंभीर रोग नहीं होते। ऐसे मामले डायबिटीज वाले और कार्डियक मरीजों में ज्यादा होते हैं। आमतौर पर ऐसे मामले हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान या डिस्चार्ज होने के एक महीने के भीतर सामने आते हैं।'

पोस्ट-कोविड मरीज 28 दिन तक अलर्ट रहें

पोस्ट-कोविड मरीज 28 दिन तक अलर्ट रहें

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर रविंद्र सरनाइक कोविड से उबरने के बाद होने वाली बीमारियों के बारे में तो यहां तक सलाह देते हैं कि जो मरीज कोविड के मध्यम या गंभीर श्रेणी में थे, उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद 28 दिनों तक अलर्ट रहना चाहिए। वो कहते हैं, '80 फीसदी कोविड मरीज घर में ही ठीक हो जाते हैं। नोवल कोरोना वायरस की वजह से अगर इनमें से किसी की तबीयत ज्यादा खराब होती है और एसपीओ 2 गिरता है या डी-डायमर बढ़ता है तो वह हल्के से गंभीर हो जाते हैं। पोस्ट-कोविड में मध्यम से लेकर गंभीर श्रेणी के मरीजों को ब्लड क्लॉटिंग का ज्यादा खतरा रहता है, क्योंकि उन्हें ज्यादा ऑक्सीजन और दवाइयों की जरूरत पड़ी थी।'

कई मरीजों को दी जा रही है ब्लड थिनर लेने की सलाह

कई मरीजों को दी जा रही है ब्लड थिनर लेने की सलाह

कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर जसपाल अर्नेजा भी मान रहे हैं कि उनके सामने ब्लड क्लॉटिंग की शिकायत वाले कई मरीज आ रहे हैं। उनका कहना है, 'हमारे पास पोस्ट-कोविड केसों में लंग्स, पेट की धमनियों में काफी रुकावट के साथ-साथ हार्ट अटैक के भी मरीज हैं।.... 'हालांकि, कार्डियो-सर्जन डॉक्टर प्रशांत जगताप ने कहा है कि उनके पास सीने में दर्द की शिकायत लेकर मरीज आते हैं, लेकिन वह ज्यादातर खाली चिंता के चलते होता है, क्योंकि उनका ईसीजी सामान्य रहता है। उनके मुताबिक, 'पिछली गर्मियों के उलट हमने हार्ट अटैक के कम केस देखे हैं। कुछ कोविड मरीजों की कार्डियक समस्याओं के चलते मौत हुई है, लेकिन वो लोग मुख्य रूप से बुजुर्ग थे।' वैसे कुछ छाती रोग विशेषज्ञों का कहना है कि वो होम आइसोलेशन में रहे मरीजों को भी कम से कम दो हफ्तों के लिए कम डोज में ब्लड थिनर लेने की सलाह दे रहे हैं। मसलन, डॉक्टर सैयद तारिक ने कहा है कि मरीजों को कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह लेने की जरूरत है, क्योंकि यह ज्यादा जरूरी है। इसी तरह डॉक्टर विक्रांत देशमुख ने कहा है कि युवा मरीजों को भी, जिनका डी-डायमर स्कोर ज्यादा रहा हो, ब्लड थिनर लेने की सलाह दी जाती है। वो कहते हैं, 'यह अलग-अलग केस पर निर्भर करता है। घटनाएं पहली लहर की तरह ही हो रही हैं।'

कुछ डॉक्टर और आंकड़े जुटाना चाहते हैं

कुछ डॉक्टर और आंकड़े जुटाना चाहते हैं

यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सदाशिव भोले को भी ब्लड क्लॉटिंग की शिकायतों वाले पोस्ट-कोविड मरीजों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, वो कहते हैं, 'यह पोस्ट-कोविड कंप्लीकेशन ही है इसके लिए हमें अलग-अलग सेंटर से कुछ और डाटा जुटाना होगा, ताकि ऐसा दावे के साथ कहा जा सके। हमारे अस्पताल में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या को रोकने के लिए एंटी-कोगुलेंट्स और एंटी-प्लेटलेट्स देते हैं।' ऐसे मामले न्यूरोलॉजी विभाग में भी आ रहे हैं।

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