'जो लुटेरों के साथ उनसे मेरा क्या रिश्ता?', भाई का नाम सुनते ही आपे से बाहर हुए उद्धव ठाकरे
Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र विधानसभा के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा। राज्यकी महिम सीट से मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे अपने करियर का पहला चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) उम्मीदवार से है।
पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि उद्धव ठाकरे अपना उम्मीदवार वापस ले सकती है, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। जब अब चुनाव से ठीक पहले उद्धव ठाकरे से इस फैसले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए किसी ऐसे व्यक्ति के साथ किसी भी तरह के संबंध रखने पर सवाल उठाया जो लुटेरों के साथ गठबंधन करता है। उन्होंने कहा वह ऐसे व्यक्तियों का समर्थन करने की बात सपने में भी नहीं सोच सकता। उन्होंने कहा जो लुटेरों के साथ उनसे मेरा क्या रिश्ता? उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस पर चर्चा के लिए और कुछ नहीं बचा है।
मेरा खून का रिश्ता महाराष्ट्र के लोगों के साथ है
उद्धव ठाकरे ने कहा मेरा खून का रिश्ता महाराष्ट्र के लोगों के साथ है। वो ही मेरा परिवार है। कोरोना काल में मैंने जिस परिवार की जिम्मेदारी ली उस परिवार को लूटा जा रहा है। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनने वाले हैं, जिसका अर्थ है कि इससे महाराष्ट्र का व्यापक शोषण होगा,बड़े पैमाने पर लूट होगी। उद्धव ठाकरे ने "डबल ट्रिपल इंजन" के साथ गठबंधन करने वालों को राज्य का विरोधी करार दिया, और ऐसे लोगों का साथ देने वालों के साथ जुड़ने या उनका समर्थन करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने तो मेरी बीमारी तक का मजाक बनाया
इसके साथ ही शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे की आलोचना करते हुए कहा कि राज ठाकरे ने तो मेरी बीमारी का मज़ाक उड़ाया है। "भगवान न करे, मेरी आलोचना करने वालों ने उस पल या परिस्थिति का अनुभव किया होगा।"
लुटेरों का समर्थन करने वालों की कभी मदद नहीं करूंगा
उद्धव ठाकरे ने राज्य के लुटेरों का समर्थन करने वाले किसी भी व्यक्ति की सहायता न करने की कसम खाई। उन्होंने अपनी बात पर जोर देने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम की शपथ ली और महाराष्ट्र को शोषण से बचाने की बात कही।
रैली की अटकलें और राजनीतिक चालबाज़ी
बता दें माहिम विधानसभा क्षेत्र में ठाकरे गुट के उम्मीदवार महेश सावंत के लिए उद्धव और उनके बेटे आदित्य द्वारा आयोजित रैलियों की अनुपस्थिति के कारण अटकलें लगाई जाने लगीं। इससे राजनीतिक अफ़वाहें फैलने लगीं कि उद्धव ठाकरे सक्रिय रूप से प्रचार न करने के बावजूद अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, उद्धव ठाकरे ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति के बारे में किसी भी अटकल को विराम दे दिया है।












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