धारावी रीडिवेलपमेंट को मिली मंजूरी, लेकिन स्थानीय लोगों में क्यों है नाराजगी? जानिए मास्टर प्लान की बड़ी बातें

Dharavi Redevelopment project: मुंबई की सबसे बड़ी और एशिया की चर्चित झुग्गी बस्ती 'धारावी' के पुनर्विकास को लेकर राज्य सरकार ने मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना अगले कुछ वर्षों में धारावी की तस्वीर पूरी तरह बदलने का दावा कर रही है। हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर धारावी के कई निवासी नाराज हैं और विरोध भी दर्ज करा रहे हैं।

इस रिडिवेलपेंट से सबसे बड़े स्लम एरिया का कायाकल्प पूरी तरह से बदल जाएगी। धारावी पुनर्विकास परियोजना को महाराष्ट्र सरकार और अदाणी ग्रुप का मेगा प्रोजेक्ट है।

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क्या है धारावी पुनर्विकास योजना? What is Dharavi redevelopment project

धारावी पुनर्विकास परियोजना (DRP) महाराष्ट्र सरकार और अदाणी ग्रुप के बीच एक संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना का संचालन नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (एनएमडीपीएल) कर रही है, जिसे स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में गठित किया गया है। इसका उद्देश्य है धारावी को एक आधुनिक, योजनाबद्ध और हरित शहरी क्षेत्र में बदलना।

इस मास्टर प्लान के तहत धारावी में 2.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पूरी तरह से विकसित किया जाएगा, जिसमें ग्रीन स्पाइन, सेंट्रल पार्क, वाटरफ्रंट, म्यूजियम, मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब और मिश्रित-उपयोग वाले रिहायशी और व्यावसायिक परिसर बनाए जाएंगे।

Dharavi project में कितनी लागत? क्या मिलेगा?

इस रीडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹95,790 करोड़ है। इसमें शामिल हैं:

  • 49,832 आवासीय पुनर्वास यूनिट्स
  • 8,700 आवासीय नवीनीकरण इकाइयाँ
  • 12,458 वाणिज्यिक और औद्योगिक पुनर्वास इकाइयाँ
  • 1,010 वाणिज्यिक नवीनीकरण इकाइयाँ

इसके अलावा, 120 एकड़ जमीन पर बिक्री के लिए निर्माण किया जाएगा। पुनर्विकास का मुख्य उद्देश्य धारावी के पुराने और जर्जर ढांचे को हटाकर एक व्यवस्थित और टिकाऊ शहर बसाना है।

Dharavi Redevelopment project: कौन होंगे लाभार्थी?

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, योजना का लाभ सिर्फ उन निवासियों को मिलेगा:

  • 1. जो ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं।
  • 2. जिन्होंने 1 जनवरी 2000 से पहले धारावी में घर बसाया है।
  • ऐसे पात्र निवासियों को 350 वर्ग फुट का नया फ्लैट दिया जाएगा, जिसकी कोई कीमत नहीं ली जाएगी।

क्यों हो रहा इसका विरोध?

यह योजना जितनी भव्य नजर आती है, उतनी ही चिंताओं से घिरी हुई है। कई स्थानीय निवासी और अधिकार कार्यकर्ता इस योजना का विरोध कर रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

सिर्फ ग्राउंड फ्लोर निवासियों को पात्र मानना: धारावी में लाखों लोग दो या तीन मंजिला झोपड़ियों में रहते हैं। लगभग 1.5 से 2 लाख किरायेदार ऊपर की मंजिलों पर हैं जिन्हें पुनर्विकास के दायरे से बाहर किया जा रहा है।

जनसंख्या में भारी गिरावट की योजना: धारावी की मौजूदा आबादी लगभग 10 लाख है। मास्टर प्लान के अनुसार, पुनर्विकास के बाद यह घटकर 4.9 लाख रह जाएगी, यानी करीब आधी आबादी को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

सर्वेक्षण अधूरा और अपारदर्शी: स्थानीय लोगों का कहना है कि पात्र किरायेदारों की संख्या का अभी तक कोई स्पष्ट सर्वे नहीं हुआ है। कुंभारवाड़ा जैसे इलाकों में लोग डोर-टु-डोर सर्वे का विरोध कर रहे हैं।

धारावी की नई पहचान क्या बचेगा स्थानीय व्यवसाय?

धारावी केवल झुग्गियों का इलाका नहीं है, यह मुंबई का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र भी है। यहाँ चमड़े, मिट्टी के बर्तन, कपड़े और रीसाइक्लिंग का बहुत बड़ा व्यापार होता है। मास्टर प्लान में मौजूदा छोटे उद्योगों और दुकानों के लिए पुनर्वास की बात तो कही गई है, लेकिन स्थानीय लोगों को डर है कि गगनचुंबी इमारतों और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स की आड़ में उनकी पारंपरिक आजीविका खत्म हो जाएगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि धारावी को उसकी मूल अवधारणा और पर्यावरणीय दृष्टिकोण के साथ एकीकृत ढंग से विकसित किया जाएगा और कारीगरों तथा छोटे कारोबारियों के पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्य स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर किया जाए।

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