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Maratha Reservation: क्या फडणवीस सरकार ने मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे को धोखा दिया?

Maratha Reservation: मराठा आरक्षण आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले एक दशक से केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है। हाल ही में, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल के नेतृत्व में यह आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया, जब उन्होंने मराठा समाज के लिए OBC श्रेणी में आरक्षण की मांग करते हुए भूख हड़ताल की। आंदोलन के दबाव में सरकार ने बातचीत की, आरक्षण देने का आश्वासन दिया और अंतत: देवेंद्र फडणवीस सरकार जरांगे की अनशन तुड़वाने में कामयाब हो गई।

लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद जरांगे के दोबारा अनशन पर जाने की संभावना बढ़ गई है। जरांगे ने अपना पिछला अनशन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आश्वासन के बाद समाप्त किया था, लेकिन अब फडणवीस के बयान ने पूरी स्थिति को बदल दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या फडणवीस सरकार ने मनोज जरांगे और मराठा समाज के साथ बड़ा खेल कर दिया है?

Maratha reservation agitation

फडणवीस ने मराठा आरक्षण को क्‍या बयान दिया है?

दरअसल, आंदोलन समाप्त होने के एक सप्ताह के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अब स्पष्ट किया कि सभी मराठाओं को कुनबी में शामिल नहीं किया जा सकता, न ही सभी को आरक्षण दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "मराठवाड़ा के सभी रिकॉर्ड हैदराबाद गैजेट में हैं। अंग्रेजों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए हमने फैसला किया है कि हम हैदराबाद गैजेट के रिकॉर्ड के अनुसार चलेंगे। जिसका नाम रिकॉर्ड में शामिल होगा, उसे ही प्रमाण पत्र दिया जाएगा। हर किसी को कुनबी प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा।"

इस निर्णय किसे साधना चाहती है फडणवीस सरकार

फडणवीस का यह फैसला ओबीसी समुदाय के विरोध को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार ओबीसी समुदाया को नाराज नहीं करना चाहती है। याद रहे ओबीसी समुदाय का मानना था कि मराठाओं को कुनबी जाति में शामिल करने से उनके आरक्षण के अधिकार कम हो जाएंगे। फडणवीस ने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि ओबीसी के अधिकारों का हनन नहीं होगा।

फडणवीस बोले- जो लोग रिकॉर्ड में शामिल हैं, उन्हें ही प्रमाण पत्र मिले

फडणवीस कहा, "जो लोग रिकॉर्ड में शामिल हैं, उन्हें ही प्रमाण पत्र मिले, हमने ऐसा आसान प्रोसेस बनाया है। इस वजह से मराठा समाज में जिसके पास सही रिकॉर्ड है, वो वंचित नहीं रहेगा, उसे ही लाभ मिलेगा। ओबीसी समाज की थाली में से कुछ भी निकाला नहीं जाएगा।"

फडणवीस ने क्‍या जरांगे को दिया धोखा?

सीएम फडणवीस के बयान से मराठा आंदोलन को बड़ा झटका लगा है यह बयान आंदोलनकारियों के लिए निराशाजनक था। इसे कुछ लोग विश्वासघात बता रहे हैं क्योंकि मराठा आरक्षण का प्रतिनिधित्‍व कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने इसी शर्त पर अनशन खत्म किया था कि सभी मराठाओं को आरक्षण मिलेगा। जरांगे पाटिल मराठा आरक्षण आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा हैं, जिनकी एक अपील पर लाखों मराठा सड़कों पर उतर आए थे।

मुख्य मांग थी कि मराठवाड़ा के सभी मराठाओं को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण दिया जाए। इसके लिए सरकार सभी मराठाओं को 'कुनबी' जाति में शामिल करे, जो पहले से ही ओबीसी का हिस्सा है।

अपनी मांगों को लेकर मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान में हजारों लोगों के साथ पांच दिनों तक धरना दिया था। जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनसे मैदान खाली करने को कहा, तो फडणवीस सरकार ने उनकी सभी मांगें मानने और मराठा आरक्षण लागू करने का आश्वासन दिया। इसके बाद जरांगे ने अपना अनशन खत्म कर दिया और घोषणा की कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं।

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